PM Modi and Manohar Lal : आज 7 अक्टूबर 2026 को नरेंद्र मोदी एक सरकार के प्रमुख के रूप में 25 वर्ष पूरे कर रहे हैं। यह सार्वजनिक जीवन की ऐसी यात्रा है, जिसकी शुरुआत 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से हुई और 2014 में भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ी।
यह उपलब्धि केवल इसकी लंबी अवधि के कारण महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह दौर है, जिसमें भारत ने आर्थिक, तकनीकी, बुनियादी ढाँचे और सामाजिक क्षेत्रों में व्यापक परिवर्तन देखा है।
केंद्र सरकार में विद्युत और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में एक चौथाई सदी का यह पड़ाव व्यक्तिगत कार्यक्रमों या राजनीतिक उपलब्धियों से आगे बढ़कर देश में हुए व्यापक परिवर्तन को देखने और समझने का अवसर प्रदान करता है।
खट्टर ने कहा कि 2014 के बाद मोदी सरकार ने बड़े पैमाने पर कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढाँचे, वित्तीय समावेशन, विनिर्माण, सामाजिक कल्याण और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भागीदारी पर केंद्रित दृष्टिकोण अपनाया है। समर्थक इस अवधि को तेज गति से हुए राष्ट्र-निर्माण का दौर बताते हैं, जबकि आलोचकों और स्वतंत्र विश्लेषकों ने क्रियान्वयन, संस्थागत प्रक्रियाओं और आर्थिक लाभों के वितरण को लेकर प्रश्न उठाए हैं। इसलिए इस पूरे दौर को समझने के लिए मापनीय बदलावों के साथ-साथ उनसे जुड़े विमर्शों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।
मनोहर लाल खट्टर का मानना है कि इस अवधि की प्रमुख विशेषताओं में से एक ‘डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना’ का विस्तार रहा है। 2015 में शुरू किए गए डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने में सहायता की, जिसमें पहचान, बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सार्वजनिक सेवाएँ बड़े पैमाने पर संचालित हो सकें। 2026 तक भारत में 144 करोड़ से अधिक आधार पहचानें, 57.71 करोड़ जन धन खाते और तेजी से विस्तारित होता डिजिटल सेवाओं का नेटवर्क मौजूद था।
डिजिटल परिवर्तन ने नागरिकों और सरकार के बीच संबंधों को भी बदला है। DigiLocker, UMANG, कॉमन सर्विस सेंटर और भारतनेट जैसे प्लेटफॉर्मों ने सरकारी तथा आवश्यक सेवाओं तक पहुँच का विस्तार किया है। 2026 तक भारतनेट के अंतर्गत 2.21 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सेवा प्रदान करने के लिए तैयार किया जा चुका था, जबकि देशभर में पाँच लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर डिजिटल सेवाएँ उपलब्ध करा रहे थे।
‘बुनियादी ढाँचा’ भी इस अवधि का एक प्रमुख स्तंभ रहा है। पिछले 12 वर्षों के दौरान भारत ने सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, जलमार्गों, आवास, ऊर्जा और शहरी परिवहन में निवेश को तेज किया है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार सार्वजनिक पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2014-15 में लगभग ₹2 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ हो गया। रेलवे विद्युतीकरण, मेट्रो विस्तार और एकीकृत लॉजिस्टिक्स योजना इस निवेश के साथ आगे बढ़े हैं। मार्च 2026 तक भारतीय रेल नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण हो चुका था, जबकि देश का मेट्रो नेटवर्क 1,155 किलोमीटर से अधिक हो गया था।
इस अवधि में ‘प्रौद्योगिकी और प्रत्यक्ष हस्तांतरण’ के माध्यम से सामाजिक कल्याण के विस्तार को भी देखा गया है। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के लिए आधार तैयार किया, जिससे सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों तक पहुँचाई जा सके।
आवास, स्वच्छता, खाना पकाने के ईंधन, पेयजल, स्वास्थ्य बीमा और खाद्य सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर बुनियादी घरेलू जरूरतों को पूरा करने का प्रयास किया गया है। 2026 के केंद्रीय मंत्रिमंडल के एक प्रस्ताव में सरकार ने दावा किया कि इस अवधि में 25 करोड़ से अधिक लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। ऐसे दावे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन गरीबी मापने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पद्धतियों और स्वतंत्र आकलनों के संदर्भ में इन्हें समझना भी आवश्यक है।
COVID-19 महामारी इस अवधि की सबसे असाधारण शासन संबंधी चुनौतियों में से एक रही। भारत ने CoWIN डिजिटल प्लेटफॉर्म के सहयोग से दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक संचालित किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से 220 करोड़ से अधिक वैक्सीन की खुराक दी गईं, जबकि eSanjeevani जैसी डिजिटल स्वास्थ्य पहलों ने टेलीमेडिसिन की पहुँच का विस्तार किया। साथ ही, महामारी ने स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा में मौजूद असमानताओं को भी उजागर किया तथा यह स्पष्ट किया कि तकनीकी क्षमता के साथ संस्थागत मजबूती और अंतिम छोर तक सेवाओं की प्रभावी पहुँच भी आवश्यक है।
मोदी काल का एक अन्य महत्वपूर्ण आयाम भारत की ‘वैश्विक आर्थिक और रणनीतिक उपस्थिति’ को मजबूत करने का प्रयास रहा है। भारत ने स्वयं को ग्लोबल साउथ की आवाज, एक प्रमुख प्रौद्योगिकी और विनिर्माण अर्थव्यवस्था तथा जलवायु कार्रवाई से लेकर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तक विभिन्न वैश्विक पहलों में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में प्रस्तुत किया है।
हालाँकि, सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की कहानी को केवल उपलब्धियों की सूची तक सीमित नहीं किया जा सकता। इस अवधि में भारत की यात्रा रोजगार, असमानता, कृषि संकट, केंद्र-राज्य संबंधों, संस्थागत स्वायत्तता, सामाजिक समरसता और सार्वजनिक विमर्श की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों से भी जुड़ी रही है।
भारत के आर्थिक विस्तार ने महत्वपूर्ण अवसर पैदा किए हैं, लेकिन यह सुनिश्चित करना कि आर्थिक विकास पर्याप्त उत्पादक रोजगार पैदा करे और समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे, अभी भी एक सतत चुनौती है। ये विमर्श शासन की किसी भी लंबी अवधि का मूल्यांकन करने का अभिन्न हिस्सा हैं।
इसलिए 25 वर्षों का यह पड़ाव जिस बात को विशेष बनाता है, वह है परिवर्तन के प्रयास का व्यापक पैमाना। गुजरात के राज्य प्रशासन से लेकर विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेतृत्व तक, नरेंद्र मोदी का सार्वजनिक जीवन भारत के उस संक्रमण के साथ जुड़ा रहा है, जिसमें देश एक बड़े पैमाने पर पारंपरिक अर्थव्यवस्था से दुनिया के सबसे अधिक डिजिटल रूप से जुड़े समाजों में से एक की ओर बढ़ा है। देश के भौतिक बुनियादी ढाँचे का विस्तार हुआ है, इसकी डिजिटल प्रणालियों को वैश्विक पहचान मिली है और इसकी महत्वाकांक्षाएँ घरेलू विकास से आगे बढ़कर वैश्विक प्रभाव की दिशा में बढ़ी हैं।
भारत के लिए अगला अध्याय इस बात से निर्धारित होगा कि ये आधार उत्पादकता, रोजगार, मानव विकास और जीवन स्तर में निरंतर सुधार में कितनी प्रभावी रूप से परिवर्तित होते हैं। ‘विकसित भारत 2047’ का राष्ट्रीय लक्ष्य इस चुनौती को एक दीर्घकालिक दृष्टिकोण के भीतर रखता है।
प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल के दौरान हरियाणा को भी राष्ट्रीय विकास यात्रा में महत्वपूर्ण निवेश और विकास परियोजनाएँ मिली हैं, जिससे राज्य की आर्थिक विकास में भूमिका मजबूत हुई है। प्रमुख परियोजनाओं में गुरुग्राम मेट्रो, एम्स रेवाड़ी, द्वारका एक्सप्रेसवे तथा रेलवे और राजमार्ग कनेक्टिविटी का विस्तार शामिल है।
उनकी सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य, ऊर्जा, विमानन और औद्योगिक बुनियादी ढाँचे से जुड़ी नई परियोजनाओं को भी समर्थन दिया है। 2026 में हरियाणा जींद और सोनीपत के बीच भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन चालित ट्रेन का केंद्र बना। इसके साथ लगभग ₹14,700 करोड़ की बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ भी जुड़ी हैं। ये पहल कनेक्टिविटी, निवेश, प्रौद्योगिकी और हरियाणा के लोगों के लिए अवसरों पर केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।
नरेंद्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के इस 25 वर्ष के सफर का महत्व अंततः यात्रा के पैमाने और उससे उत्पन्न हुई आकांक्षाओं के पैमाने में निहित है। इस यात्रा का अगला मापदंड यह होगा कि आज की संस्थाओं, बुनियादी ढाँचे और तकनीकी क्षमताओं को भारत के 140 करोड़ नागरिकों के लिए अवसर, समृद्धि और बेहतर जीवन स्तर में कितनी प्रभावी ढंग से बदला जा सकता है। और 2047 के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में कैसे देश के हर एक नागरिक के जीवन को जोड़ा जा सकता है।
