
North Central Railway : उत्तर मध्य रेलवे, आगरा मंडल कार्यालय अपनी मनमानी के लिए लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस कार्यालय का आलम यह है कि इस कार्यालय के खिलाफ जो शिकायत की जाती है वह शिकायत इसी कार्यालय में जाकर बंद हो जाती है।
33 वर्ष की सेवा के बाद सेवानिवृत्त एक बुज़ुर्ग मुख्य टिकट निरीक्षक का नियत चिकित्सा भत्ता (FMA) 01 अगस्त 2025 से बंद कर दिया गया है। यह भत्ता उन्हें 20 वर्ष से अधिक समय तक पेंशन के साथ मिलता रहा।
2017 और 28 अप्रैल 2026 के पेंशन भुगतान आदेश (PPO) में FMA “विकल्पित / स्वीकृत” दर्ज है। 2026 का PPO तो भत्ता बंद होने के नौ महीने बाद जारी हुआ। रेलवे बोर्ड के परिपत्र RBE 22/2008 व 168/2009 के अनुसार FMA के लिए RELHS सदस्यता अनिवार्य नहीं है।
28 सितंबर 2026 को लेखा विभाग ने लिखा कि FMA “अंकित नहीं है”, जबकि उसी पत्र के साथ लगे PPO में FMA “स्वीकृत” दर्ज है। मंडल इस उम्र में RELHS सदस्यता लेने और “फॉर्म नहीं भरा” कहकर दस्तावेज़ लाने को कह रहा है, जबकि ये दस्तावेज़ रेलवे के अपने पास रखे जाने थे। RTI में भी भत्ता बंद करने का कोई आदेश नहीं दिखाया गया।

हर शिकायत, एक ही अंजाम
CPENGRAMS, रेलवे बोर्ड अपील (बिना किसी आदेश के “निस्तारित”), कैबिनेट सचिवालय का लोक शिकायत निदेशालय (DPG), जहाँ बिना राहत के “संतोषजनक निस्तारण” दर्ज हुआ, और AGM, उ.म.रे. की पहल पर “अति आवश्यक” दर्ज शिकायत। हर बार मामला उसी आगरा मंडल को लौटा।
पद, ग्रेड पे (8½ वर्ष बाद सुधार) और पत्नी की जन्मतिथि (तीन अलग-अलग गलत तिथियाँ) भी लंबी लड़ाई के बाद ही सुधरीं।
“अकेला मामला नहीं”
परिवार का कहना है कि आगरा मंडल के कई अन्य पेंशनभोगी भी इसी तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। परिवार का आरोप है कि आगरा कैंट स्थित मंडल वित्त (DFM) कार्यालय का पेंशनभोगियों के प्रति व्यवहार असंवेदनशील है, और बार-बार शिकायत के बावजूद उच्च अधिकारी हस्तक्षेप नहीं कर रहे, क्योंकि हर शिकायत जाँच के लिए उसी कार्यालय को भेज दी जाती है।
पेंशनभोगी बाईपास सर्जरी व रीढ़ की सर्जरी के बाद चल नहीं पाते और अकेले रहते हैं। परिवार ने महाप्रबंधक, उ.म.रे. और रेल मंत्रालय से मुख्यालय स्तर पर स्वतंत्र जाँच और बकाया सहित भत्ता बहाली की माँग की है। राहत न मिलने पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) जाने की तैयारी है।
