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फरीदाबाद में कूड़ा उठान का टेंडर फिर चर्चा में, सातवीं बार जारी हुई निविदा, ₹202 करोड़ बढ़ा बजट

फरीदाबाद की सफाई व्यवस्था लंबे समय से सवालों के घेरे में है। अब नगर निगम ने कूड़ा उठान के लिए सातवीं बार टेंडर जारी कर दिया है। खास बात यह है कि पुराना टेंडर अभी तक आधिकारिक रूप से रद्द नहीं किया गया, जबकि नए टेंडर में बजट बढ़ाने के साथ कई अहम शर्तों में भी बदलाव किया गया है।

छह कोशिशों के बाद भी नहीं मिली स्थायी एजेंसी

औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में घर-घर से कूड़ा उठाने के लिए नगर निगम लगातार प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक उसे स्थायी एजेंसी नियुक्त करने में सफलता नहीं मिली है। पिछले छह टेंडरों में दो बार वर्क ऑर्डर तक जारी हुए, लेकिन विभिन्न कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। अब निगम ने सातवीं बार नई निविदा जारी कर दी है, जिससे पूरे मामले पर फिर चर्चा तेज हो गई है।

पुराना टेंडर रद्द किए बिना जारी हुआ नया टेंडर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले जारी किए गए टेंडर को अभी तक आधिकारिक रूप से रद्द नहीं किया गया है। उसकी तकनीकी निविदा भी खुल चुकी थी और उसमें भाग लेने वाली कंपनियों की जमानत राशि भी वापस नहीं की गई। इसके बावजूद नगर निगम ने संशोधित शर्तों के साथ नया टेंडर जारी कर दिया। इस कदम ने प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

₹590 करोड़ से बढ़कर ₹792 करोड़ पहुंचा बजट

पहले जारी टेंडर का बजट 590 करोड़ रुपये था, जिसे अब बढ़ाकर 792 करोड़ रुपये कर दिया गया है। यानी नए टेंडर में सीधे 202 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है। नगर निगम का कहना है कि शहर की बिगड़ती सफाई व्यवस्था को सुधारने और बेहतर कूड़ा प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।

फरीदाबाद में कूड़ा उठान का टेंडर फिर चर्चा में, सातवीं बार जारी हुई निविदा, ₹202 करोड़ बढ़ा बजट

नियमों में भी दी गई बड़ी राहत

नए टेंडर में कई महत्वपूर्ण शर्तों को पहले की तुलना में आसान बनाया गया है। पहले एजेंसी के लिए साल के 365 दिन कूड़ा उठाने की अनिवार्यता थी, लेकिन अब इसे घटाकर सप्ताह में छह दिन कर दिया गया है। इसके अलावा ट्रांसफर स्टेशन संचालन का अनुभव अनिवार्य होने की शर्त भी हटा दी गई है। निगम का तर्क है कि इससे अधिक कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में भाग लेंगी और एजेंसी नियुक्त करने में आसानी होगी।

हर दिन निकलता है 1500 टन कूड़ा, सफाई व्यवस्था बनी चुनौती

फरीदाबाद से प्रतिदिन करीब 1500 टन कूड़ा निकलता है। फिलहाल घर-घर से कूड़ा उठाने का काम अधिकतर अवैध वेंडरों के भरोसे चल रहा है, जिन पर मनमानी शुल्क वसूलने के आरोप भी लगते रहे हैं। इसका सीधा असर शहर की स्वच्छता व्यवस्था और स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग पर पड़ रहा है। ऐसे में नई एजेंसी की नियुक्ति शहर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

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