
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर में एक मासूम के साथ कथित हैवानियत ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों के मुताबिक, बच्चा अचानक डरने लगा था। CCTV फुटेज सामने आने के बाद मारपीट और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों पर पुलिस ने मामला दर्ज किया।
बच्चे के बदले व्यवहार से हुआ शक
मौजपुर के एक प्ले स्कूल में पढ़ने वाला करीब साढ़े तीन साल का बच्चा पिछले कुछ दिनों से सहमा हुआ था। परिजनों ने बताया कि वह रात में डरकर उठ जाता था और टॉयलेट जाने के नाम से घबरा जाता था।
बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाने पर उसके कानों में गंभीर सूजन सामने आई। इसके बाद परिवार को स्कूल में उसके साथ किसी तरह की ज्यादती होने का संदेह हुआ।
CCTV फुटेज ने खोला पूरा मामला
परिजनों ने स्कूल प्रशासन से CCTV फुटेज दिखाने की मांग की। आरोप है कि शुरुआत में कैमरे खराब होने की बात कही गई। बाद में फीस के नाम पर 1500 रुपये लेने के बाद अगले दिन फुटेज दिखाने के लिए बुलाया गया।

CCTV देखने के बाद परिवार के होश उड़ गए। फुटेज में कथित तौर पर स्कूल स्टाफ बच्चे के साथ मारपीट करता दिखाई दिया। एक अन्य फुटेज में आया पर बच्चे के निजी अंगों से छेड़छाड़ करने का आरोप है।
कुर्सी से बांधने का भी आरोप
परिजनों के मुताबिक, बच्चे को घंटों एक कुर्सी से बांधकर रखा गया। उसे लात मारकर नीचे गिराने और खाना छीनने जैसी घटनाएं भी CCTV में दिखाई दीं।
इतनी कम उम्र के बच्चे के साथ कथित तौर पर हुई यह घटना सिर्फ एक परिवार की पीड़ा नहीं है, बल्कि छोटे बच्चों की स्कूलों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाती है।
निदेशिका पर संवेदनहीनता का आरोप
परिवार का आरोप है कि CCTV फुटेज सामने रखने के बाद स्कूल की निदेशिका ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय कथित तौर पर कहा, “बच्चे ऐसे रोज पीटते हैं, तुम्हें जो करना है कर लो।”
इसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया। बच्चे का JPC और GTB अस्पताल में मेडिकल कराया गया। परिवार के अनुसार, मेडिकल जांच में आंख के पास और जांघ पर चोट के निशान तथा कानों में सूजन की पुष्टि हुई।
POCSO समेत गंभीर धाराओं में केस
जाफराबाद थाना पुलिस ने स्कूल की निदेशिका, प्रधानाचार्या, शिक्षिका और आया के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस ने POCSO Act, Juvenile Justice Act और BNS की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की है।
जांच के दौरान पुलिस ने CCTV फुटेज वाला DVR भी कब्जे में लिया है। यही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मामले में आरोपों की जांच के लिए अहम साबित हो सकता है।
बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
इस घटना ने अभिभावकों के सामने एक बेहद अहम सवाल खड़ा कर दिया है—क्या स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियम जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू हो रहे हैं?
मासूम बच्चे अक्सर अपने साथ हुई घटनाओं को शब्दों में बता नहीं पाते। ऐसे में उनके व्यवहार में अचानक बदलाव, डर या चोट के निशान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मौजपुर की यह घटना जांच के जरिए सच सामने आने और दोष साबित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करती है।
