
चंद्रनाथ रथ हत्याकांड मामले में गिरफ्तार किए गए राज सिंह को अब कोर्ट से राहत मिल गई है। लंबे समय तक शक के आधार पर हिरासत में रहने के बाद उसकी रिहाई ने इस पूरे केस को नया मोड़ दे दिया है। रिहाई के बाद मीडिया के सामने आए राज सिंह ने दावा किया कि अगर सीबीआई इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं करती तो उसकी जान को गंभीर खतरा हो सकता था और उसका एनकाउंटर भी किया जा सकता था। उसके इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
दबाव और डर के बीच गिरफ्तारी का दर्द
राज सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गिरफ्तारी के दौरान उस पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया गया था। उसके अनुसार उसे लगातार डराया गया और हालात ऐसे बना दिए गए थे कि वह खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा था। राज का कहना है कि उसे यह तक आशंका थी कि उसे कभी भी गोली मारी जा सकती है। हालांकि उसने यह भी कहा कि उसके परिवार ने मजबूत तरीके से सबूत और दस्तावेज पेश किए, जिससे उसकी रिहाई संभव हो सकी। यह पूरा घटनाक्रम जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

सीसीटीवी फुटेज बना निर्णायक सबूत
राज की बहन दीपशिखा ने बताया कि अदालत में सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों को प्रमुख सबूत के तौर पर पेश किया गया, जिसके आधार पर यह साबित हुआ कि घटना के दिन राज सिंह बलिया में मौजूद था। कोलकाता की अदालत ने इन सबूतों को गंभीरता से लेते हुए उसे जमानत दे दी। वहीं सीबीआई ने भी परिवार द्वारा दिए गए सबूतों की जांच की, जो सही पाए गए। इसी वजह से जांच की दिशा बदल गई और राज को रिहाई मिली।
संगठन और परिवार की प्रतिक्रिया भी सामने आई
रिहाई के बाद राज सिंह ने कहा कि अगर उसके पास सीसीटीवी सबूत नहीं होते तो शायद आज वह जिंदा नहीं होता। उसने यह भी आरोप लगाया कि जिस संगठन से वह जुड़ा है, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, उसने इस मुश्किल समय में उसका साथ नहीं दिया। इस कारण वह जल्द ही इस्तीफा देने पर विचार कर सकता है। वहीं उसकी मां ने कहा कि उन्हें रामलला पर पूरा भरोसा था और अयोध्या में दर्शन के बाद ही उनका विश्वास मजबूत हुआ था। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है।
