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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस पहुंची चुनाव आयोग

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से पहले नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करने वाला फैसला बताया है। मामला अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है, जहां कांग्रेस नेताओं ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

चुनाव आयोग पहुंचा कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल

नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस का एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिला। बैठक के बाद पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि आयोग ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है। कांग्रेस का दावा है कि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा लिया गया फैसला तथ्यों और नियमों के अनुरूप नहीं है।

यह मामला सिर्फ एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़ा सवाल बन गया है। इसलिए पार्टी इसे गंभीरता से उठा रही है।

अभिषेक मनु सिंघवी ने उठाए कानूनी सवाल

राज्यसभा सांसद Abhishek Manu Singhvi ने चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया, वह कानूनी रूप से कमजोर है।

सिंघवी के अनुसार, चुनावी नियमों में केवल उन मामलों का खुलासा आवश्यक होता है जिनमें अदालत द्वारा आरोप तय किए गए हों। उन्होंने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में ऐसा कोई आदेश नहीं है, बल्कि केवल नोटिस जारी हुआ था। ऐसे में नामांकन खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता।

भाजपा की आपत्ति क्या है?

भाजपा ने आरोप लगाया है कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी। पार्टी का कहना है कि यह जानकारी उम्मीदवार द्वारा घोषित की जानी चाहिए थी।

आपत्ति में एक याचिका का हवाला दिया गया है, जिसमें कुछ गंभीर आरोपों का उल्लेख है। इसी आधार पर नामांकन की वैधता पर सवाल उठाए गए।

कांग्रेस ने बताया राजनीतिक साजिश

दूसरी ओर, मीनाक्षी नटराजन ने पूरे मामले को राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि उनकी छवि खराब करने और चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने के उद्देश्य से यह विवाद खड़ा किया गया है।

पूर्व मुख्यमंत्री Kamal Nath ने भी भाजपा पर प्रशासनिक और प्रक्रियागत तरीकों से कांग्रेस की सीट छीनने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

राज्यसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले यह विवाद राजनीतिक तापमान बढ़ा सकता है। यदि चुनाव आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाएं इस मामले में हस्तक्षेप करती हैं, तो चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

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