सुप्रीम कोर्ट पहुंचा बंगाल चुनाव विवाद अजय पाल शर्मा पर पक्षपात के आरोप

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा एक बड़े विवाद में घिर गए हैं। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है जिसमें उन्हें तत्काल चुनाव ड्यूटी से हटाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वे बतौर पुलिस ऑब्जर्वर अपनी भूमिका में निष्पक्ष नहीं रहे और उन्होंने चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। इस मामले ने चुनावी माहौल में नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है और प्रशासनिक हलकों में भी हलचल बढ़ा दी है।
याचिका में गंभीर आरोप निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल
दायर याचिका में दावा किया गया है कि अजय पाल शर्मा की भूमिका स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन करती है। आरोप है कि उन्होंने अपने पद का उपयोग करते हुए उम्मीदवारों पर दबाव बनाने और डराने धमकाने जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने और आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है। हालांकि अभी तक सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर कोई औपचारिक संज्ञान नहीं लिया है और यह केवल ई फाइलिंग के रूप में दर्ज है।

यूपी के सिंघम कहे जाने वाले अधिकारी पर पक्षपात के आरोप
अजय पाल शर्मा को उनके एनकाउंटर रिकॉर्ड के कारण यूपी का सिंघम कहा जाता है और वे अपनी सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में बतौर ऑब्जर्वर तैनाती के बाद से उन्होंने राजनीतिक उम्मीदवारों पर अनुचित दबाव बनाया है। आरोपों के अनुसार वे अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर चुनावी माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह की स्थिति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए खतरा बन सकती है।
चुनाव के बीच आरोपों से बढ़ी हलचल 142 सीटों पर आज मतदान
इस पूरे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण का मतदान आज यानी 29 अप्रैल को हो रहा है। कोलकाता सहित छह जिलों की 142 विधानसभा सीटों पर मतदान जारी है जहां 3.21 करोड़ से अधिक मतदाता 1448 उम्मीदवारों की किस्मत तय करेंगे। पहले चरण में रिकॉर्ड 93.2 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था जिससे राजनीतिक दलों में उत्साह बढ़ा हुआ है। टीएमसी और बीजेपी दोनों ही अपनी जीत के दावे कर रही हैं। ऐसे समय में यह विवाद चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील और चर्चित बना रहा है और इसकी निगरानी पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
