करोड़ों के कथित चिट फंड घोटाले में तीन लोगों पर FIR, निवेशकों से लाखों की ठगी के आरोप

जिले में कथित अवैध चिट फंड (कमेटी) कारोबार से जुड़े एक बड़े मामले ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के बाद तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी देने समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आठ साल के भरोसे के बाद सामने आए आरोप
ज्ञान नगर निवासी प्रवीण कुमार ने सिविल लाइन थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मुख्य आरोपी जोगेंद्र उर्फ लीलू उनके परिचित थे और बचपन से पहचान होने के कारण उन पर पूरा भरोसा था। शिकायत के अनुसार, वर्ष 2016 से आरोपियों ने अधिक मुनाफे का लालच देकर उन्हें कथित कमेटियों (चिट फंड) में निवेश के लिए प्रेरित किया।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जून 2023 तक समय पर भुगतान मिलने से उनका विश्वास और मजबूत हो गया।
बिना लाइसेंस कमेटी चलाने का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने बिना किसी वैध लाइसेंस के कथित रूप से अवैध कमेटियां संचालित कीं। प्रवीण कुमार के अनुसार, जुलाई 2023 से मई 2024 के बीच उन्होंने करीब 7.95 लाख रुपये जमा किए, लेकिन अधिकांश रकम वापस नहीं मिली।

फर्जी फाइनेंस और क्रेडिट कार्ड के दुरुपयोग के आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपियों ने कार खरीदने के नाम पर लाखों रुपये उधार लेकर वापस नहीं किए। इसके अलावा उनके क्रेडिट कार्ड से 40 हजार रुपये से अधिक का भुगतान कराया गया और कथित तौर पर बजाज फाइनेंस के माध्यम से उनकी जानकारी के बिना मोबाइल फाइनेंस भी कराया गया।
पैसे मांगने पर धमकी देने का आरोप
प्रवीण कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, तो आरोपियों ने कथित तौर पर विवाद किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने पुलिस आयुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई।
प्रारंभिक जांच के बाद दर्ज हुई FIR
पुलिस आयुक्त कार्यालय की अनुमति और प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने प्रथम दृष्टया बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट, 2019, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक धमकी से संबंधित धाराओं के तहत 3 जुलाई 2026 को सिविल लाइन थाने में FIR दर्ज कर ली।
जांच जारी, आरोपों की पुष्टि बाकी
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी वित्तीय लेनदेन तथा दस्तावेजों की जांच की जा रही है। फिलहाल शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच और सत्यापन होना बाकी है।
