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UIMR से बदलेगी मालवा की तस्वीर, 5 लाख नौकरियां और 16 हजार वर्ग किमी विकास का नया मॉडल

मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी यूनिफाइड इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन (UIMR) योजना राज्य के विकास को नई दिशा देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के तहत यह परियोजना केवल इंदौर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आसपास के जिलों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगी। इस योजना का उद्देश्य मालवा क्षेत्र को औद्योगिक, आर्थिक, पर्यटन और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में देश के अग्रणी क्षेत्रों में शामिल करना है।

16 हजार वर्ग किलोमीटर में फैलेगा विकास मॉडल

UIMR का दायरा अब बढ़ाकर 16,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक कर दिया गया है। इसके अंतर्गत इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, रतलाम और शाजापुर जिलों की 38 तहसीलें तथा 2,781 गांव शामिल किए गए हैं। लगभग सवा करोड़ आबादी वाले इस क्षेत्र को एकीकृत विकास मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी विकास के बीच संतुलन स्थापित हो सके।

5 लाख रोजगार और औद्योगिक क्रांति की तैयारी

मालवा क्षेत्र को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए 13,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि बैंक तैयार किया गया है। इसके साथ 14 नए औद्योगिक पार्क विकसित किए जाने की योजना है। अनुमान है कि इन परियोजनाओं से लगभग 5 लाख नए रोजगार अवसर पैदा होंगे। पीथमपुर को इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस इंजीनियरिंग केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा, जबकि उज्जैन और रतलाम को औद्योगिक और लॉजिस्टिक हब की नई पहचान मिलेगी।

UIMR से बदलेगी मालवा की तस्वीर, 5 लाख नौकरियां और 16 हजार वर्ग किमी विकास का नया मॉडल

60 मिनट कनेक्टिविटी का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता ‘60 मिनट एक्सेस मॉडल’ है। इसके तहत पूरे क्षेत्र में ऐसी सड़क और परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी जिससे प्रमुख आर्थिक केंद्रों तक एक घंटे के भीतर पहुंचा जा सके। इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर, इंदौर-भोपाल एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार जैसी परियोजनाएं इसी सोच का हिस्सा हैं।

किसानों को मिलेगा विकास का सीधा लाभ

UIMR का लैंड पूलिंग मॉडल देश में एक नई पहल माना जा रहा है। इस मॉडल के तहत भूमि देने वाले किसानों को उनकी 60 प्रतिशत विकसित जमीन वापस दी जाएगी। इससे किसान केवल भूमि अधिग्रहण का हिस्सा नहीं रहेंगे, बल्कि विकास प्रक्रिया के प्रत्यक्ष लाभार्थी भी बनेंगे।

पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

तेजी से होने वाले औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए ‘ब्लू-ग्रीन डेवलपमेंट पॉलिसी’ लागू की गई है। जल स्रोतों और वन क्षेत्रों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।

पर्यटन और विरासत को मिलेगा नया आयाम

सरकार ‘विकास भी, विरासत भी’ की अवधारणा पर काम कर रही है। उज्जैन, ओंकारेश्वर, मांडू और महेश्वर को जोड़कर एक विशेष पर्यटन सर्किट विकसित किया जाएगा। इससे धार्मिक, सांस्कृतिक और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय लोगों के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे।

UIMR केवल एक शहरी विकास परियोजना नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के भविष्य की व्यापक विकास रणनीति है। रोजगार, उद्योग, पर्यटन, कनेक्टिविटी और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाला यह मॉडल आने वाले वर्षों में मालवा क्षेत्र को देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले क्षेत्रों में शामिल कर सकता है।

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