
NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद्द कर दी गई है, जिसके बाद देशभर में लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इस फैसले से करीब 23 लाख छात्रों का भविष्य एक बार फिर अनिश्चितता में पड़ गया है। इसी मुद्दे को लेकर Tejashwi Yadav ने केंद्र सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बिहार और देश में लगातार हो रहे पेपर लीक अब शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार एक सामान्य परीक्षा भी सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से आयोजित नहीं कर पा रही है।
बीजेपी सरकार की क्षमता और नीयत पर उठाए सवाल
Bharatiya Janata Party पर निशाना साधते हुए तेजस्वी यादव ने कहा कि क्या सरकार के पास इतनी प्रशासनिक क्षमता और इच्छाशक्ति भी नहीं बची है कि वह बिना पेपर लीक के परीक्षा करा सके। उन्होंने कहा कि बार-बार हो रहे ऐसे मामलों से सरकार की नीयत और नीति दोनों पर सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार केवल जांच बैठा देना पर्याप्त नहीं है बल्कि सरकार को आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता संरक्षण में लगातार पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं और इससे छात्रों का भरोसा कमजोर हो रहा है। तेजस्वी ने कहा कि यह केवल परीक्षा का मुद्दा नहीं बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।

दोबारा परीक्षा से बढ़ेगा आर्थिक और मानसिक बोझ
तेजस्वी यादव ने पुनर्परीक्षा को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि अब जब लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ेगी तो इससे आर्थिक और मानसिक बोझ कई गुना बढ़ जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि देशभर के 552 शहरों में दोबारा परीक्षा कराने से लाखों लीटर पेट्रोल और डीजल खर्च होगा, जिसका असर सीधे आम लोगों पर पड़ेगा। इसके अलावा छात्रों और उनके परिवारों को यात्रा, रहने और अन्य खर्चों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी में जुटे छात्रों को मानसिक तनाव और शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ेगी। तेजस्वी ने पूछा कि क्या सरकार ने इन सभी पहलुओं का कोई आकलन किया है।
शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही पर छिड़ी नई बहस
NEET UG 2026 विवाद के बाद देशभर में शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। तेजस्वी यादव ने कहा कि केवल भाषण देने और अपील करने से देश नहीं चलता बल्कि शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान संस्थाओं को मजबूत करने की बजाय राजनीतिक लाभ उठाने पर ज्यादा है। इस पूरे मामले ने एक बार फिर परीक्षा सुरक्षा, तकनीकी निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम और पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया पर टिकी हुई है।
