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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवार को दिया बड़ा आश्वासन. न्याय की उम्मीद जगी

भोपाल में 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने आज पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें भरोसा दिलाया कि मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि इस केस की जांच सीबीआई को सौंपने की अनुशंसा की जाएगी ताकि जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से हो सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरोपी रिटायर्ड जज सास की जमानत रद्द कराने के लिए भी कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

परिवार को मिला नया आश्वासन, दोबारा पोस्टमार्टम पर भी विचार

मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया कि यदि अदालत आदेश देती है तो ट्विशा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया जाएगा। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि शव को आवश्यक प्रक्रिया के तहत दिल्ली स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी। राज्य सरकार ने कहा कि वह इस पूरे मामले में परिवार के साथ खड़ी है और न्याय दिलाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। इस मुलाकात के बाद परिवार को उम्मीद है कि जांच अब और तेज और पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ेगी। वहीं प्रशासनिक स्तर पर इस केस को लेकर लगातार बैठकों का दौर भी जारी है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने परिवार को दिया बड़ा आश्वासन. न्याय की उम्मीद जगी

महिला आयोग की सख्ती, डीजीपी से मांगा जवाब

इस बीच राष्ट्रीय स्तर पर भी यह मामला गंभीरता से लिया जा रहा है। National Commission for Women ने मध्य प्रदेश के डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने मुख्य सचिव से भी कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है और मामले में हो रही जांच की प्रगति पर सवाल उठाए हैं। सबसे बड़ा विवाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर है जिसमें मौत का कारण सुसाइड बताया गया था। लेकिन मृतका के परिवार ने इस निष्कर्ष को पूरी तरह खारिज करते हुए जांच पर सवाल खड़े किए हैं। इसी वजह से यह मामला अब प्रशासनिक से बढ़कर संवेदनशील न्यायिक जांच की दिशा में जाता दिख रहा है।

शव संरक्षण और दोबारा जांच की मांग पर विवाद

भोपाल एम्स की ओर से परिजनों को सलाह दी गई है कि शव को जल्द से जल्द घर ले जाया जाए क्योंकि डीकंपोजिशन की स्थिति बन सकती है। दूसरी ओर परिवार लगातार यह मांग कर रहा है कि शव को सुरक्षित रखा जाए ताकि दोबारा पोस्टमार्टम कराया जा सके। एम्स और पुलिस के बीच भी इस मुद्दे पर समन्वय की स्थिति बनी हुई है। परिवार का आरोप है कि शुरुआती पोस्टमार्टम में गंभीर लापरवाही हुई है और कई अहम सबूतों को नजरअंदाज किया गया है। यहां तक कि यह भी दावा किया गया है कि पोस्टमार्टम स्थल से जुड़े कुछ लोगों का मृतका के ससुराल पक्ष से संबंध है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या अदालत दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति देती है और जांच सीबीआई को सौंपी जाती है या नहीं।

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