राजनीतिराज्य

भोजशाला पहुंचे मोहन यादव, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक और धार्मिक हलचल

मध्य प्रदेश के धार स्थित Bhojshala को लेकर हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति और धार्मिक माहौल में नई हलचल देखने को मिल रही है। मुस्लिम पक्ष द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बीच मुख्यमंत्री Mohan Yadav सोमवार को भोजशाला पहुंचे और यहां मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने इस दौरान भोजशाला परिसर में ‘सरस्वती लोक’ और ‘राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट’ बनाने की बड़ी घोषणा भी कर दी। उनका यह दौरा कई मायनों में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में पूजा करने वाले वे पहले मुख्यमंत्री बने हैं। भोजशाला परिसर में मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी वहां मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भोजशाला केवल मध्य प्रदेश की नहीं बल्कि पूरे देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है जिसे नई पहचान देने का समय आ गया है।

750 साल पुराने संघर्ष का जिक्र, कोर्ट फैसले को बताया ऐतिहासिक

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि धार राजा भोज की नगरी है और यहां की ऐतिहासिक विरासत पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल कानूनी जीत नहीं बल्कि 750 साल पुराने संघर्ष का परिणाम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत ने सच और झूठ को अलग कर दिया है और इतिहास के साथ न्याय हुआ है। उन्होंने लोगों को गंगा दशहरा के पावन अवसर पर इस फैसले की बधाई दी। मोहन यादव ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा से जोड़ने के लिए भोजशाला को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने ‘सरस्वती लोक’ और ‘राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की स्थापना को भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है कि बीजेपी अब भोजशाला को बड़े सांस्कृतिक एजेंडे के रूप में आगे बढ़ा सकती है।

भोजशाला पहुंचे मोहन यादव, हाईकोर्ट फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक और धार्मिक हलचल

बीजेपी के सांस्कृतिक एजेंडे से जोड़कर देखा जा रहा दौरा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का भोजशाला दौरा केवल धार्मिक यात्रा नहीं बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। अयोध्या, काशी और मथुरा के बाद भोजशाला लंबे समय से बीजेपी और संघ के प्रमुख मुद्दों में शामिल रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह दौरा आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सांस्कृतिक और हिंदुत्व की राजनीति को मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। बीजेपी लगातार अपनी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की कोशिश कर रही है और भोजशाला को उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, शिक्षा और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने पर जोर दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भोजशाला अब मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है और आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज हो सकती है।

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष

गौरतलब है कि 15 मई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने हिंदू समुदाय की दो जनहित याचिकाओं को मंजूर करते हुए इस स्थल की धार्मिक प्रकृति देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में स्वीकार की थी। इसके साथ ही कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के 7 अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसमें मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने 22 मई को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। अब देशभर की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। इस पूरे मामले ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर बहस को और तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में भोजशाला मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा विषय बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button