
पूर्व सांसद और बाहुबली नेता Anand Mohan Singh एक बार फिर अपने बयानों को लेकर बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। पिछले कुछ दिनों से लगातार उनके तीखे बयान सामने आ रहे हैं। पहले उन्होंने Nitish Kumar की पार्टी जेडीयू को “थैली की पार्टी” बताया था और अब उन्होंने सवर्ण राजनीति को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की बैठक में आनंद मोहन ने खुलकर कई नेताओं के नाम लिए और सवाल उठाया कि जब कुछ नेता भी सवर्ण समाज से आते हैं तो उन पर सवाल क्यों नहीं उठाए जाते। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। इस बयान के बाद बिहार की सियासत में जातीय समीकरणों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।
ललन सिंह और नितिन नवीन का नाम लेकर पूछे बड़े सवाल
दिल्ली में हुई बैठक के दौरान आनंद मोहन ने Rajiv Ranjan Singh, Sanjay Jha और Nitin Nabin का नाम लेते हुए कहा कि ये सभी नेता भी सवर्ण समाज से आते हैं लेकिन इनके खिलाफ कोई आवाज क्यों नहीं उठाता। उन्होंने कहा कि जब आनंद मोहन कोई बयान देते हैं तो उन पर सवाल खड़े किए जाते हैं लेकिन दूसरे नेताओं को लेकर चुप्पी साध ली जाती है। आनंद मोहन ने यह भी कहा कि समाज के भीतर ही उन्हें विरोध का सामना करना पड़ता है। उनके अनुसार राजपूत समाज के लोग भी कई बार उनके बयानों का समर्थन करने के बजाय विरोध करने लगते हैं। इस बयान ने बिहार की राजनीति में सवर्ण नेतृत्व और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आनंद मोहन अपने बयानों के जरिए एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रभावशाली मंत्रालय को लेकर उठाए सवाल
अपने भाषण में आनंद मोहन ने बिहार सरकार में राजपूत नेताओं की हिस्सेदारी और प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर बिहार विधानसभा में राजपूत समाज के सबसे ज्यादा विधायक हैं तो फिर इस समाज को प्रभावशाली मंत्रालय क्यों नहीं दिए गए। उन्होंने सीधे तौर पर सत्ता के भीतर जातीय संतुलन पर सवाल खड़ा किया। आनंद मोहन ने कहा कि जब वह इस तरह की बातें उठाते हैं तो उन्हें विवादित बना दिया जाता है जबकि असल मुद्दों पर चर्चा नहीं होती। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक दल लगातार जातीय समीकरणों को साधने में जुटे हुए हैं। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ही आने वाले राजनीतिक समीकरणों को लेकर रणनीति बना रहे हैं। ऐसे में आनंद मोहन के बयान ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है। कई राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावों से पहले सवर्ण वोट बैंक को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं।
बिहार यात्रा की तैयारी में जुटे आनंद मोहन
सूत्रों के मुताबिक आनंद मोहन आने वाले दिनों में बिहार में बड़ा राजनीतिक अभियान शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि वह 27 मई को पटना लौटेंगे और इसके बाद पूरे बिहार का दौरा करेंगे। उनके करीबी लोगों का कहना है कि इस यात्रा की शुरुआत नालंदा से हो सकती है। इस अभियान के जरिए आनंद मोहन समाज और राजनीति से जुड़े कई मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जाएंगे। उनके छोटे बेटे अंशुमन आनंद भी इस कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि आनंद मोहन अपनी नई राजनीतिक रणनीति के तहत सामाजिक समर्थन को मजबूत करने में जुटे हैं। बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव लंबे समय से बना हुआ है और उनके बयानों का असर कई इलाकों में देखने को मिलता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में उनका यह अभियान बिहार की राजनीति में कौन सा नया मोड़ लेकर आता है।
