
चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने पांच राज्यों में अधिकारियों की तैनाती को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आयोग के निर्देश के मुताबिक गोवा मणिपुर पंजाब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एक ही जिले में तीन साल से जमे अधिकारियों के तबादले किए जाएंगे। इस कदम का मकसद चुनाव से पहले प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करना और चुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखना है।
निर्वाचन आयोग चुनाव के दौरान इस बात पर खास ध्यान देता है कि किसी भी अधिकारी की तैनाती का असर मतदान की प्रक्रिया पर नहीं पड़े। इसी वजह से चुनाव वाले राज्यों में लंबे समय से एक ही जगह काम कर रहे अधिकारियों को दूसरी जगह भेजने की व्यवस्था की जाती है। इससे किसी अधिकारी का एक ही जिले में लंबे समय तक बने रहना चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने की आशंका कम होती है।
इस फैसले के दायरे में गोवा मणिपुर पंजाब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को रखा गया है। इन राज्यों में तय नियमों के तहत ऐसे अधिकारियों की पहचान की जाएगी जो एक जिले में लगातार तीन साल से तैनात हैं। इसके बाद संबंधित विभागों को तबादले की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। हालांकि किन किन पदों पर तैनात अधिकारियों को हटाया जाएगा और तबादले की अंतिम तारीख क्या होगी इसकी विस्तृत जानकारी आधिकारिक निर्देशों से ही साफ होगी।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में चुनाव की तैयारी के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका काफी अहम रहती है। जिले में कानून व्यवस्था बनाए रखने से लेकर चुनाव संबंधी कामकाज तक कई जिम्मेदारियां अधिकारियों के पास होती हैं। ऐसे में निर्वाचन आयोग चाहता है कि चुनाव के समय किसी तरह के पक्षपात या प्रभाव की शिकायत सामने न आए।
निर्वाचन आयोग के इस कदम को चुनावी तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। अधिकारियों के तबादले से प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव होगा और नई जगहों पर तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी। अब संबंधित राज्य सरकारों और विभागों को आयोग के निर्देशों के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होगी।
फिलहाल सबसे ज्यादा नजर उत्तर प्रदेश समेत इन पांच राज्यों में होने वाले तबादलों पर रहेगी। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि किन अधिकारियों को नई जगह जिम्मेदारी दी जाती है और चुनाव से पहले प्रशासनिक स्तर पर कितने बदलाव किए जाते हैं।
