
फीफा वर्ल्ड कप 2026 की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग को लेकर डिजिटल पहुंच (Accessibility) का मुद्दा अब अदालत तक पहुंच गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए स्ट्रीमिंग को सुलभ न बनाए जाने संबंधी याचिका पर सुनवाई करते हुए जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड से जवाब मांगा है।
दृष्टिबाधितों की पहुंच बना कानूनी मुद्दा
मामला फीफा वर्ल्ड कप 2026 की ऑनलाइन स्ट्रीमिंग से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भारत में प्रसारित की गई स्ट्रीमिंग सेवा दृष्टिबाधित लोगों के लिए पर्याप्त रूप से सुलभ नहीं थी। इससे समान रूप से डिजिटल सामग्री तक पहुंच के अधिकार का प्रश्न खड़ा हुआ है।
अधिवक्ता राहुल बजाज ने दायर की याचिका
दृष्टिबाधित अधिवक्ता Rahul Bajaj ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर आवश्यक एक्सेसिबिलिटी सुविधाओं के अभाव में दृष्टिबाधित दर्शकों को फुटबॉल टूर्नामेंट का समान अनुभव नहीं मिल सका।

जी एंटरटेनमेंट को जारी हुआ नोटिस
सुनवाई के दौरान Zee Entertainment Enterprises Limited को अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कंपनी ने भारत में 2026 FIFA World Cup के प्रसारण के विशेष (एक्सक्लूसिव) अधिकार हासिल किए थे, इसलिए मामले में उससे स्पष्टीकरण मांगा गया है।
डिजिटल एक्सेसिबिलिटी मानकों के पालन का निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने केवल जवाब ही नहीं मांगा, बल्कि जी एंटरटेनमेंट को भारत में डिजिटल एक्सेसिबिलिटी से जुड़े लागू मानकों का पालन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है। इस आदेश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दिव्यांगजन भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री का समान रूप से उपयोग कर सकें।
डिजिटल समावेशन की दिशा में अहम कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी डिजिटल सेवाओं के लिए समावेशी (Inclusive) और सुलभ तकनीक विकसित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। यदि भविष्य में ऐसे मानकों का व्यापक पालन होता है, तो दृष्टिबाधित और अन्य दिव्यांग उपयोगकर्ताओं के लिए डिजिटल सेवाएं अधिक उपयोगी बन सकेंगी।
