बकरियों की आवाज सुन जागा किसान, घर में मिला तेंदुआ; सूझबूझ से टला बड़ा हादसा

बालाघाट के बकवारा गांव में सुबह-सुबह एक किसान के घर तेंदुआ घुसने से हड़कंप मच गया। बकरियों की आवाज सुनकर जागे किसान ने बिना घबराए कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग पहुंचा और कान्हा से आए पशु चिकित्सक की मदद से तेंदुए को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
सुबह साढ़े चार बजे मचा हड़कंप
बालाघाट जिले के मोहगांव ग्राम पंचायत के बकवारा गांव स्थित मडकाटोला में 27 अगस्त की सुबह सामान्य नहीं थी। किसान तेजलाल मरकाम करीब 4:30 बजे बकरियों की अजीब आवाज सुनकर उठे। जब उन्होंने घर के भीतर देखा तो सामने तेंदुआ मौजूद था और बकरियों को शिकार बनाने की कोशिश कर रहा था।
किसान ने दिखाई गजब की सूझबूझ
ऐसे समय में घबराहट भारी पड़ सकती थी, लेकिन तेजलाल ने समझदारी दिखाई। उन्होंने तुरंत तेंदुए को एक कमरे में बंद कर दिया और वन विभाग को सूचना दी। इस फैसले ने न केवल परिवार और आसपास के ग्रामीणों को संभावित खतरे से बचाया, बल्कि तेंदुए को भी बिना नुकसान के रेस्क्यू करने का मौका दिया।

कान्हा से पहुंचा पशु चिकित्सक
सूचना मिलते ही वन विकास निगम के लाम्टा प्रोजेक्ट की टीम मौके पर पहुंची। घर में फंसे जंगली जानवर की स्थिति को देखते हुए कान्हा नेशनल पार्क से पशु चिकित्सक को भी बुलाया गया। टीम ने पूरी सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और तेंदुए को बेहोश कर सुरक्षित बाहर निकाला।
डेढ़ से दो साल का था तेंदुआ
रेस्क्यू के बाद विशेषज्ञों ने तेंदुए की स्वास्थ्य जांच की। अधिकारियों के मुताबिक उसकी उम्र करीब डेढ़ से दो साल थी और वह स्वस्थ पाया गया। किसी ग्रामीण को चोट नहीं आई और तेंदुए को भी कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके बाद उसे सुरक्षित जंगल क्षेत्र में ले जाकर प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
जंगल और बस्तियों के बीच बढ़ता संपर्क
तेंदुए को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। हालांकि घटना शांतिपूर्ण ढंग से खत्म हो गई, लेकिन यह जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संपर्क की ओर इशारा करती है। शिकार की तलाश में वन्यजीव अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं।
सूझबूझ ने बचाई दो जिंदगियां
इस घटना में सबसे अहम भूमिका किसान की समझदारी और वन विभाग की त्वरित कार्रवाई की रही। अगर तेंदुआ खुले कमरे या आंगन में पहुंच जाता, तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। इस घटना ने फिर साबित किया कि वन्यजीव दिखने पर भीड़ जुटाने या उसे उकसाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना देना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
