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Plastic Garbage: प्लास्टिक कचरे में डूब रही है दुनिया! प्लास्टिक संकट की भारत में चौंकाने वाली सच्चाई
Plastic Garbage: 2022 में दुनिया भर में करीब 268 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हुआ जिसमें भारत की हिस्सेदारी केवल 3.54 प्रतिशत रही है। इसी साल करीब 400 मिलियन टन प्लास्टिक का उत्पादन हुआ जिसमें भारत का योगदान 5 प्रतिशत रहा है। यह रिपोर्ट नेचर मैगज़ीन में प्रकाशित हुई है।
चीन बना प्लास्टिक उत्पादन का सरताज
प्लास्टिक के उत्पादन में सबसे आगे चीन है जिसकी हिस्सेदारी 32 प्रतिशत है। उसके बाद अमेरिका आता है जिसकी हिस्सेदारी 42 प्रतिशत बताई गई है। यह आंकड़े दुनिया के कुल प्लास्टिक निर्माण की स्थिति को उजागर करते हैं जो चिंताजनक है।
खपत में भी चीन ही सबसे आगे
प्लास्टिक के उपयोग में भी चीन सबसे आगे है जहां कुल वैश्विक आपूर्ति का 20 प्रतिशत इस्तेमाल होता है। अमेरिका में यह आंकड़ा 18 प्रतिशत है जबकि यूरोपीय यूनियन में 16 प्रतिशत भारत में 6 प्रतिशत और जापान में 4 प्रतिशत उपयोग किया गया है।

प्रति व्यक्ति खपत में अमेरिका सबसे ऊपर
2022 में अमेरिका में हर व्यक्ति ने औसतन 216 किलोग्राम प्लास्टिक का उपयोग किया। जापान में यह 129 किलोग्राम और यूरोपीय यूनियन में यह 87 किलोग्राम प्रति व्यक्ति रहा है। भारत में यह आंकड़ा कम है लेकिन बढ़ती जनसंख्या के साथ चिंता बढ़ रही है।
कचरे का क्या हो रहा है निपटारा
रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में प्लास्टिक कचरे का 40 प्रतिशत लैंडफिल में जाता है 34 प्रतिशत को जलाया जाता है और केवल 9 प्रतिशत को ही रिसायकल किया जाता है। हालांकि 1950 से 2015 के मुकाबले 2022 में लैंडफिल में जाने वाला कचरा थोड़ा कम हुआ है।
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को 6.3 लाख करोड़ की संपत्ति डूबने की खबर
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उथल-पुथल देखने को मिली। BSE सेंसेक्स दोपहर के कारोबार में 1,300 अंकों से अधिक लुढ़क गया। आईटी और ऑटो सेक्टर में तेज बिकवाली ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। इस गिरावट के चलते करीब 6.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बाजार से साफ हो गई। बाजार पूंजीकरण भी गिरकर लगभग 462 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी और ऑटो शेयरों की बिकवाली, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की सतर्कता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
आईटी और ऑटो सेक्टर में दबाव
आईटी सेक्टर के शेयरों में आज खासा दबाव देखने को मिला। अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा अपने क्लॉड कोड टूल के दावे के बाद निवेशकों में आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल को लेकर अनिश्चितता बढ़ी। इस वजह से कारोबारी दिन की शुरुआत में ही आईटी इंडेक्स लगभग 3 प्रतिशत तक फिसल गया। ऑटो सेक्टर में भी बिकवाली तेज रही। निवेशक वैश्विक मंदी और नए टेक्नोलॉजी निवेश के असर से सतर्क दिखाई दिए। इस प्रकार दोनों प्रमुख सेक्टरों की कमजोरी ने बाजार में डर और बेचैनी पैदा की।

वैश्विक संकेत और रुपया की कमजोरी
वैश्विक बाजार से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। अमेरिकी वॉल स्ट्रीट में बीते दिन जोरदार गिरावट देखने को मिली। एशिया के ज्यादातर बाजार भी सुस्त थे। इसके अलावा अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने और ट्रंप के 15 प्रतिशत टैरिफ वाले बयान ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। भारतीय रुपए की स्थिति भी पस्त रही। शुरुआती कारोबार में रुपया 7 पैसे की गिरावट के साथ 90.96 प्रति डॉलर पर ट्रेड करता दिखा। हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने इसे और अधिक गिरने से रोका।
कच्चे तेल की तेजी और निवेशकों की सतर्कता
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 72.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल महंगा होने से आयात-निर्भर देशों जैसे भारत पर व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने का दबाव पैदा होता है। इसके चलते निवेशक और अधिक सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी।
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भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी में भारी तेजी के पीछे की वजहें क्या हैं
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 23 फरवरी को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंक से अधिक उछल गया और निफ्टी 50 ने 25,750 के स्तर को पार कर लिया। निवेशकों में खरीदारी की भावना साफ नजर आ रही है। कारोबारी दिन की शुरुआत में इस तेजी ने निवेशकों को भरोसा दिया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेजी कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारणों से प्रेरित है।
अमेरिका से मिली सकारात्मक खबर का असर
वैश्विक स्तर पर अमेरिका से आई खबर ने भारतीय बाजार को मजबूती दी है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए इंपोर्ट टैरिफ को रद्द करने का फैसला किया था। इसके बाद यूरोप और अमेरिकी बाजार में तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय मांग और सप्लाई चेन से जुड़े सेक्टरों को सकारात्मक संकेत मिला। हालांकि बाद में ट्रंप ने टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने का ऐलान किया, लेकिन निवेशकों का भरोसा घरेलू बाजार पर बना रहा। टेक्सटाइल और एक्सपोर्ट सेक्टर की कंपनियों के शेयर 2 से 8 प्रतिशत तक उछल गए।

वैश्विक बाजारों की मजबूती
वैश्विक बाजारों में आई तेजी ने भी भारतीय बाजार को सहारा दिया। एशियाई बाजारों में कॉस्पी 1.5 फीसदी की तेजी के साथ खुला। अमेरिका में शुक्रवार को लगभग 1 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली थी। हालांकि चीन और जापान में छुट्टी होने की वजह से वहां आज कारोबार बंद है। निवेशक वैश्विक बाजारों से प्रेरणा लेकर घरेलू बाजार में सक्रिय रहे। विशेषज्ञ मानते हैं कि वैश्विक बाजारों में स्थिरता और सकारात्मक संकेत भारतीय निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत हैं।
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट
सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी बाजार की तेजी का एक अहम कारण रही। अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर बातचीत के तीसरे दौर की संभावना ने भू-राजनीतिक तनाव को कम करने के संकेत दिए। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 75 सेंट या 1.05 फीसदी गिरकर 71.01 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए राहतभरी है। इससे महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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FIIs Investment February 2026: फरवरी में विदेशी निवेशकों ने दिखाया भरोसा, भारतीय शेयर बाजार में उठा नई उम्मीद
FIIs Investment February 2026: भारतीय शेयर बाजार में हाल के महीनों में विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के बाद फरवरी 2026 में एक राहत भरी खबर सामने आई है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 16,912 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पहले पिछले कुछ महीनों में विदेशी निवेशकों ने बाजार से जमकर निकासी की थी। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों के तिमाही नतीजों में सुधार और आर्थिक संकेतकों की मजबूती से इस भरोसे को बढ़ावा मिला है। इस बदलाव से निवेशकों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।
फरवरी में विदेशी निवेशकों की खरीदारी
फरवरी महीने में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में मजबूत खरीदारी दिखाई है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 16,912 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इसके विपरीत, जनवरी में विदेशी निवेशकों ने करीब 35,962 करोड़ रुपये बाजार से बाहर निकाले थे। वर्ष 2026 की शुरुआत से शुद्ध निकासी लगभग 19,050 करोड़ रुपये रही। फरवरी में आए इस बदलाव ने बाजार में उम्मीद जगाई है और घरेलू निवेशकों का भी भरोसा पहले से बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनियों की ग्रोथ लगातार बेहतर बनी रहती है तो यह ट्रेंड जारी रह सकता है।

विदेशी निवेशक किन सेक्टरों में कर रहे हैं भरोसा
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां पूरे बाजार में समान नहीं रही। आईटी सेक्टर में एंथ्रोपिक शॉक का असर देखा गया, जिससे यहां विदेशी निवेशकों ने तेजी से बिकवाली की। वहीं, वित्तीय सेवाओं और कैपिटल गुड्स सेक्टर में खरीदारी का माहौल बना रहा। इन सेक्टरों को विदेशी निवेशकों का भरोसा मिला और इनके शेयरों में समर्थन बना। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक पूरे बाजार के बजाय चुनिंदा सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित कर अपनी रणनीति बना रहे हैं।
निवेशकों के लिए आगे का नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा कंपनियों के नतीजों और आर्थिक स्थिरता पर निर्भर रहेगा। अगर तिमाही नतीजे मजबूत आते रहे और बाजार की स्थितियां सकारात्मक बनीं तो विदेशी निवेशक और घरेलू निवेशक दोनों ही भारतीय शेयर बाजार में निवेश बनाए रख सकते हैं। फरवरी का यह ट्रेंड निवेशकों के लिए एक आश्वस्त संकेत है कि भारतीय बाजार में सुधार के संकेत दिखाई दे रहे हैं। साथ ही यह बदलाव विदेशी निवेशकों के नजरिए और रणनीति में बदलाव का भी संकेत देता है।
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