लद्दाख में महिलाओं का बड़ा आंदोलन रुका, शराबबंदी की मांग पर प्रशासन झुका!

Ladakh news(India 365 news): लद्दाख में शराब की बिक्री और नई दुकानों के खिलाफ महिलाओं का चल रहा आंदोलन फिलहाल एक हफ्ते के लिए रोक दिया गया है। गुरुवार 29 अक्टूबर की देर शाम महिला संगठनों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया। प्रशासन ने महिलाओं की मांगों पर सहमति बनाने और समझौते को लिखित रूप देने के लिए 5 नवंबर तक का समय मांगा है।
दरअसल लद्दाख में पिछले एक सप्ताह से अलग अलग धार्मिक समुदायों की महिलाएं शराब की दुकानों और शराब बिक्री की नीति का विरोध कर रही थीं। महिलाओं की साफ मांग है कि लद्दाख में शराब पर पूरी तरह रोक लगाई जाए और पूरे केंद्र शासित प्रदेश को शराब मुक्त घोषित किया जाए।
इस मामले को लेकर लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा और महिला संगठनों की प्रतिनिधियों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई। बातचीत के दौरान प्रशासन शराब मुक्त केंद्र शासित प्रदेश बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए तैयार हुआ। हालांकि प्रशासन ने पर्यटन और रोजगार से जुड़े मामलों के साथ अवैध शराब की तस्करी जैसी परेशानियों का भी जिक्र किया। लेकिन महिलाएं शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की अपनी मांग पर कायम रहीं।
चार प्रमुख महिला संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि प्रशासन उनकी ओर से रखे गए सभी सुझावों और बातों पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हो गया है। इसके बाद गृह विभाग की विशेष सचिव ताशी डोलमा ने 29 अक्टूबर को एक लिखित पत्र जारी कर समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा।
प्रशासन के इस भरोसे के बाद महिला संगठनों ने 29 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अपना धरना रोकने का फैसला किया है। महिलाओं का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के भरोसे पर यह कदम उठाया है और अब उसे अपना वादा पूरा करना होगा।
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन महिलाओं के भरोसे का सम्मान करेगा और उनकी मांगों पर ठोस कदम उठाएगा।
गौरतलब है कि लेह के एनडीएस मेमोरियल पार्क में बौद्ध मुस्लिम और ईसाई समुदाय की महिलाएं लगातार धरना दे रही थीं। महिलाओं का आरोप है कि शराब की नई दुकानें खुलने से इलाके में परेशानी बढ़ी है। अब सभी की नजर 5 नवंबर पर है कि प्रशासन शराबबंदी को लेकर क्या फैसला लेता है।