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Health Trackers: फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच? जानिए कौन सा हेल्थ ट्रैकर है आपके लिए बेस्ट!

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Health Trackers: फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच? जानिए कौन सा हेल्थ ट्रैकर है आपके लिए बेस्ट!

Health Trackers: हेल्थ ट्रैकर्स छोटे लेकिन बेहद स्मार्ट डिवाइस होते हैं, जो आपकी सेहत से जुड़े अलग-अलग पैमानों को मापते हैं। ये डिवाइस फिटनेस बैंड, स्मार्टवॉच, रिंग्स या मोबाइल ऐप्स के रूप में उपलब्ध होते हैं। इनमें लगे सेंसर हार्ट रेट, ऑक्सीजन लेवल, नींद की क्वालिटी, तनाव स्तर, स्टेप काउंट, कैलोरी बर्न, ईसीजी (ECG) आदि को रिकॉर्ड करते हैं। यह डेटा स्मार्टफोन ऐप में स्टोर किया जाता है, जिससे आप अपनी सेहत को बेहतर तरीके से मॉनिटर कर सकते हैं।

हेल्थ ट्रैकर्स के खास फीचर्स

फिटनेस ट्रैकर्स का हार्ट रेट मॉनिटर फीचर दिल की धड़कनों पर नजर रखता है और वर्कआउट, आराम या नींद के दौरान हार्ट रेट बताता है। यह कार्डियो और रनिंग जैसी एक्सरसाइज के लिए उपयोगी होता है। नींद ट्रैकिंग फीचर आपकी गहरी और हल्की नींद को रिकॉर्ड करता है और कुछ एडवांस्ड ट्रैकर्स इसे स्कोर के रूप में भी दिखाते हैं। ऐप्पल वॉच और सैमसंग गैलेक्सी वॉच जैसे डिवाइसेज़ में ईसीजी (ECG) फीचर होता है, जो हार्टबीट का विश्लेषण करके दिल की अनियमितताओं को पकड़ सकता है। इसके अलावा, कुछ ट्रैकर्स आपकी डेली वॉटर इंटेक भी ट्रैक करते हैं, जिससे आप हाइड्रेटेड रह सकें।

Health Trackers: फिटनेस बैंड या स्मार्टवॉच? जानिए कौन सा हेल्थ ट्रैकर है आपके लिए बेस्ट!

स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मददगार

कैलोरी बर्न ट्रैकिंग से आपको यह पता चलता है कि आपकी बेसल मेटाबॉलिक रेट और फिजिकल एक्टिविटी के आधार पर रोज़ कितनी कैलोरी बर्न हो रही है। कुछ स्मार्टवॉच में AI फिटनेस कोचिंग भी होती है, जो आपके एक्सरसाइज और डाइट को बेहतर बनाने में मदद करती है। मूवमेंट रिमाइंडर फीचर लंबे समय तक बैठे रहने पर आपको चलने की याद दिलाता है, जो ऑफिस वर्कर्स के लिए बहुत फायदेमंद होता है। हाई-एंड ट्रैकर्स में SpO2 सेंसर भी होता है, जो आपके खून में ऑक्सीजन का स्तर मापता है और कोविड जैसी बीमारियों में यह बेहद कारगर साबित हुआ।

हेल्थ ट्रैकर्स का सही उपयोग कैसे करें?

यदि आप हेल्थ ट्रैकर का सही उपयोग करना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने लिए छोटे और वास्तविक लक्ष्य तय करें, जैसे वजन घटाना, तनाव कम करना या दिल की सेहत सुधारना। अपने हेल्थ ट्रैकर से मिलने वाले डेटा को रोज़ाना मॉनिटर करें और अपने स्वास्थ्य लक्ष्यों को ट्रैक करें। अगर हेल्थ ट्रैकर आपको पानी पीने, मूवमेंट करने या सोने की याद दिलाए, तो इसे नज़रअंदाज न करें। सबसे ज़रूरी बात, अगर आपका ट्रैकर किसी भी असामान्य हेल्थ एक्टिविटी को ट्रैक करता है, तो डॉक्टर से ज़रूर सलाह लें। याद रखें, हेल्थ ट्रैकर सिर्फ डेटा देता है, लेकिन असल में सेहत सुधारने के लिए आपको खुद ही हेल्दी आदतें अपनानी होंगी।

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Portable Washing Machine: कीमत कम, सुविधा ज्यादा! लेकिन इसके साथ छिपा है एक छोटा सा समझौता

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Portable Washing Machine: कीमत कम, सुविधा ज्यादा! लेकिन इसके साथ छिपा है एक छोटा सा समझौता

Portable Washing Machine: आजकल बाजार में एक नई तकनीक ने लोगों का ध्यान खींचा है जिसे पोर्टेबल वॉशिंग मशीन कहा जाता है। यह मशीन आकार में छोटी होती है और इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। यह खासतौर पर छात्रों, अकेले रहने वालों या छोटे फ्लैट/रूम में रहने वाले लोगों के लिए बनाई गई है। इसकी खासियत है कि इसे चलाने के लिए बड़े स्पेस या भारी बिजली की जरूरत नहीं होती।

फायदे जो इसे खास बनाते हैं

पोर्टेबल वॉशिंग मशीन की सबसे बड़ी खूबी है इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन। यह मशीन बहुत कम जगह घेरती है और आसानी से किसी भी कोने में फिट हो जाती है। इसका वजन भी इतना हल्का होता है कि कोई भी व्यक्ति इसे आसानी से उठा सकता है। यह मशीन कम वोल्टेज में भी चल जाती है और पानी की भी बचत करती है। यदि आप हॉस्टल में रहते हैं या अक्सर शिफ्ट करते हैं तो यह मशीन आपके लिए वरदान साबित हो सकती है।

Portable Washing Machine: कीमत कम, सुविधा ज्यादा! लेकिन इसके साथ छिपा है एक छोटा सा समझौता

जेब पर हल्का, इस्तेमाल में आसान

पोर्टेबल वॉशिंग मशीन की कीमत भी आम वॉशिंग मशीनों की तुलना में बहुत कम होती है। यही वजह है कि यह छात्रों या कम बजट में रहने वालों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है। इसे चलाना बहुत आसान होता है क्योंकि इसमें बहुत कम बटन होते हैं और किसी विशेष तकनीकी ज्ञान की जरूरत नहीं होती। ये मशीनें सिंपल और इकोनॉमिक होती हैं।

लेकिन हर सिक्के के दो पहलू होते हैं

जहां इसके कई फायदे हैं वहीं कुछ कमियां भी हैं। इसकी सबसे बड़ी कमी इसकी सीमित वॉशिंग कैपेसिटी है। यह एक बार में बहुत कम कपड़े धो सकती है। बड़ी फैमिली या भारी कपड़ों के लिए यह मशीन उपयुक्त नहीं है। कई मॉडल्स में स्पिनिंग फंक्शन नहीं होता जिससे कपड़े सुखाने में दिक्कत होती है। साथ ही, पानी भरने और निकालने का काम भी कई बार हाथ से करना पड़ता है।

क्या यह है लॉन्ग टर्म सॉल्यूशन?

अगर आप इसे रोजाना और भारी कपड़े धोने के लिए इस्तेमाल करेंगे तो इसकी मोटर और बॉडी जल्दी खराब हो सकती है। इसकी लाइफ किसी फुल साइज ऑटोमैटिक मशीन की तुलना में कम होती है। यानी ये मशीन एक स्थायी समाधान नहीं है बल्कि एक कॉम्प्रोमाइज जैसा है, खासकर तब जब आपकी जरूरतें बड़ी हैं।

पोर्टेबल वॉशिंग मशीन एक स्मार्ट चॉइस है अगर आप सीमित बजट और स्पेस में रह रहे हैं। लेकिन अगर आप ज्यादा कपड़े धोते हैं या कम मेहनत में ज्यादा सुविधा चाहते हैं, तो ऑटोमैटिक फुल साइज वॉशिंग मशीन ही बेहतर विकल्प होगी। खरीदने से पहले अपनी जरूरतों और इस्तेमाल की मात्रा को जरूर ध्यान में रखें।

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Chimney Suction Power: आपके किचन की हवा ज़हरीली तो नहीं? चिमनी की सक्शन पावर बताएगी सच्चाई

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Chimney Suction Power: आपके किचन की हवा ज़हरीली तो नहीं? चिमनी की सक्शन पावर बताएगी सच्चाई

Chimney Suction Power: आज के समय में किचन केवल खाना पकाने की जगह नहीं बल्कि एक साफ-सुथरा और फ्रेश माहौल बनाए रखने का स्थान भी है। ऐसे में चिमनी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। पहले लोग इसे केवल डिज़ाइन और ब्रांड के आधार पर खरीदते थे लेकिन अब इसके पीछे छिपे तकनीकी पहलुओं को समझना जरूरी हो गया है। खासतौर पर इसकी सक्शन पावर को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

क्या होती है चिमनी की सक्शन पावर?

सक्शन पावर का मतलब होता है कि चिमनी कितनी तेजी से धुआं, तेल की भाप और गंध को खींच सकती है। यह मापी जाती है क्यूबिक मीटर प्रति घंटा (m³/hr) में। जितनी ज्यादा सक्शन पावर होगी, उतनी ही बेहतर तरीके से चिमनी किचन की हवा को साफ कर पाएगी। भारत में तला-भुना खाना ज्यादा पकाया जाता है, इसलिए यहां कम से कम 700 से 1200 m³/hr की चिमनी जरूरी मानी जाती है।

Chimney Suction Power: आपके किचन की हवा ज़हरीली तो नहीं? चिमनी की सक्शन पावर बताएगी सच्चाई

अपने किचन के हिसाब से चुनें सही पावर

हर किचन का आकार और खाना पकाने की आदतें अलग होती हैं। यदि आपके किचन का साइज 60 से 100 स्क्वायर फीट है और आप हल्का खाना जैसे उबालना, भाप देना या कम तेल वाला खाना बनाते हैं, तो 500 से 800 m³/hr की चिमनी पर्याप्त है। वहीं 100 से 150 स्क्वायर फीट के किचन में, जहां रोजमर्रा का खाना बनता है, वहां 800 से 1000 m³/hr की चिमनी बेहतर साबित होगी। यदि आपका किचन बड़ा है या आप अक्सर तला-भुना खाना बनाते हैं, तो 1000 से 1400 m³/hr की सक्शन पावर वाली चिमनी सबसे उपयुक्त होगी।

ज्यादा सक्शन पावर के क्या फायदे हैं?

ज्यादा सक्शन पावर वाली चिमनी आपके किचन को तेल की चिपचिपाहट और धुएं से जल्दी मुक्त कर देती है। इससे न केवल खाना पकाने में आसानी होती है बल्कि दीवारें और टाइल्स भी साफ रहते हैं। इसके अलावा, यह गंध और गर्मी को भी बाहर निकालती है जिससे किचन में ताजगी बनी रहती है। यह मोटर पर भी कम दबाव डालती है और फिल्टर लंबे समय तक साफ रहते हैं।

कम सक्शन पावर की चिमनी से क्या समस्याएं होती हैं?

अगर चिमनी की सक्शन पावर कम होगी तो धुआं और बदबू किचन में बनी रहेगी। इससे न केवल सांस लेने में दिक्कत होती है बल्कि दीवारें भी जल्दी गंदी हो जाती हैं। मोटर पर ज्यादा दबाव पड़ता है और फिल्टर जल्दी जाम हो जाता है जिससे सफाई में भी परेशानी होती है। इसलिए हमेशा सक्शन पावर को प्राथमिकता दें।

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Google Feature: अब गूगल बताएगा पासवर्ड सुरक्षित है या नहीं, जानिए कैसे करता है आपकी डिजिटल सुरक्षा की निगरानी

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Google Feature: अब गूगल बताएगा पासवर्ड सुरक्षित है या नहीं, जानिए कैसे करता है आपकी डिजिटल सुरक्षा की निगरानी

Google Feature: आज के समय में जैसे हम अपने घर की सुरक्षा के लिए दरवाज़ा लॉक करते हैं ठीक वैसे ही ऑनलाइन खातों की सुरक्षा के लिए मजबूत पासवर्ड ज़रूरी हैं। लेकिन हाल ही में 16 अरब पासवर्ड लीक होने की खबर ने सबको चिंता में डाल दिया है। ऐसे में घबराने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की ज़रूरत है। बहुत कम लोग जानते हैं कि गूगल के पास एक बेहद ज़रूरी टूल है जो आपके पासवर्ड की सुरक्षा पर नज़र रखता है और अगर पासवर्ड कहीं लीक होता है तो आपको तुरंत अलर्ट करता है। इस टूल का नाम है Google Password Checkup।

क्या है Google Password Checkup और ये कैसे काम करता है

जिस तरह एक डॉक्टर आपके शरीर की जांच करता है वैसे ही यह टूल आपके सेव किए हुए पासवर्ड की जांच करता है। यह पता लगाता है कि आपका पासवर्ड कहीं किसी डाटा लीक का हिस्सा तो नहीं बना। अगर आपका कोई पासवर्ड लीक हो चुका होता है तो यह टूल आपको तुरंत अलर्ट भेजता है ताकि आप समय रहते अपना पासवर्ड बदल सकें। लेकिन ध्यान रहे यह टूल तभी काम करेगा जब आपने अपने पासवर्ड Google Password Manager में सेव किए हों। अगर आपने अपने ज़रूरी लॉगिन डिटेल्स गूगल पर सेव कर रखे हैं तो यह टूल उन्हें लगातार मॉनिटर करता है।

Google Feature: अब गूगल बताएगा पासवर्ड सुरक्षित है या नहीं, जानिए कैसे करता है आपकी डिजिटल सुरक्षा की निगरानी

कैसे करें पासवर्ड Google Password Manager में सेव और चेक

सबसे पहले अपने लैपटॉप या कंप्यूटर में Google Chrome ब्राउज़र खोलें। फिर ऊपर दाईं तरफ तीन डॉट्स (⋮) पर क्लिक करें। अब ‘Passwords and Autofill’ या ‘Password Manager’ ऑप्शन पर जाएं। यहां बाईं तरफ आपको Passwords, Checkup और Settings जैसे विकल्प दिखेंगे। अगर आप नया पासवर्ड सेव करना चाहते हैं तो Passwords सेक्शन में जाएं और “Add” पर क्लिक करें। अगर पासवर्ड पहले से सेव हैं तो आप सीधे “Checkup” ऑप्शन पर जाकर यह देख सकते हैं कि कोई पासवर्ड लीक तो नहीं हुआ है। Compromised Passwords सेक्शन में आपको जानकारी मिलेगी कि कौन सा पासवर्ड लीक हुआ है और कौन से पासवर्ड बहुत कमजोर हैं या बार-बार दोहराए गए हैं।

मोबाइल से कैसे करें पासवर्ड चेक और सुरक्षित

अगर आप अपने मोबाइल पर पासवर्ड सेव करते हैं तो वहां भी यह चेक करना आसान है। इसके लिए अपने फोन में Settings > Google > Autofill with Google > Password Manager में जाएं। यहां से आप पता लगा सकते हैं कि कोई पासवर्ड लीक हुआ है या आपने कोई कमजोर पासवर्ड तो नहीं रखा है। इस फीचर की सबसे खास बात यह है कि यह बिना कोई एक्स्ट्रा ऐप डाउनलोड किए सीधे गूगल अकाउंट से जुड़ा होता है और हमेशा आपके पासवर्ड की निगरानी करता है। ऐसे में आपको किसी भी तरह के साइबर फ्रॉड से बचाव का मौका मिल जाता है और आप समय रहते अपने डिटेल्स को अपडेट कर सकते हैं।

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