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गुलाब चंद कटारिया ने गुवाहाटी में हिमंत सरमा शपथ समारोह में लिया हिस्सा

गुवाहाटी में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में असम के नए मुख्यमंत्री के रूप में हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार पद की शपथ ली। इस अवसर पर देश की शीर्ष राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को राष्ट्रीय महत्व का स्वरूप दिया। समारोह में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। यह आयोजन केवल एक औपचारिक शपथ ग्रहण नहीं बल्कि पूर्वोत्तर भारत में राजनीतिक स्थिरता और विकास के नए संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

गुलाब चंद कटारिया की उपस्थिति और पूर्व अनुभव का महत्व

इस समारोह में पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया की उपस्थिति विशेष रूप से चर्चा का विषय रही। उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई दी और उनके नेतृत्व में असम के तेज विकास की आशा जताई। कटारिया स्वयं पूर्व में असम के राज्यपाल रह चुके हैं और उन्होंने सरमा के पिछले कार्यकाल के दौरान प्रशासनिक सहयोग और समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनके अनुभव और राजनीतिक समझ को देखते हुए उनकी मौजूदगी को एक मजबूत प्रशासनिक निरंतरता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

गुलाब चंद कटारिया ने गुवाहाटी में हिमंत सरमा शपथ समारोह में लिया हिस्सा

पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक विविधता और विकास का संदेश

समारोह के दौरान असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक नृत्य, संगीत और पूर्वोत्तर भारत की विविधता को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठन और विभिन्न क्षेत्रों के विशिष्ट अतिथियों ने इस आयोजन में भाग लिया। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वोत्तर भारत अब केवल भौगोलिक सीमाओं का क्षेत्र नहीं बल्कि देश की विकास यात्रा का एक मजबूत आधार बन चुका है। असम में बीते वर्षों में सड़क, पर्यटन, निवेश और सामाजिक विकास के क्षेत्र में हुई प्रगति को भी मंच से रेखांकित किया गया।

नई सरकार से विकास और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की उम्मीद

गुलाब चंद कटारिया ने अपने संबोधन में कहा कि असम ने हाल के वर्षों में जिस गति से विकास किया है, वह देश के अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कि नई सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को और मजबूती देगी तथा सुशासन, सांस्कृतिक संरक्षण और जनकल्याण के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगी। कार्यक्रम के अंत में यह संदेश भी स्पष्ट रूप से सामने आया कि पूर्वोत्तर भारत अब राष्ट्रीय विकास की मुख्यधारा में तेजी से शामिल हो रहा है और आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की आर्थिक और रणनीतिक प्रगति का केंद्र बन सकता है।

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