
बिहार विधान परिषद की नौ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर अगले पखवाड़े में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। चुनाव आयोग जल्द ही इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर सकता है। इस घोषणा के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सत्ता पक्ष व विपक्ष दोनों ही अपने-अपने समीकरण साधने में जुट गए हैं।
एनडीए के लिए संगठन और सरकार के संतुलन की बड़ी परीक्षा
इन चुनावों को एनडीए सरकार के लिए एक अहम राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहां संगठन और सत्ता के बीच संतुलन साधना चुनौती होगी। सूत्रों के अनुसार भाजपा और जदयू अपने संगठन से जुड़े कई नेताओं को इस बार विधान परिषद भेज सकती हैं। निशांत कुमार और दीपक प्रकाश जैसे नामों को लेकर चर्चा तेज है, जो सत्ता समीकरण में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

सीटों का गणित और सहयोगी दलों में बंटवारा
विधान परिषद की कुल 10 सीटें रिक्त हैं, जिनमें से एक पर उपचुनाव होना है। बाकी सात सीटों में भाजपा और जदयू के बीच मुख्य बंटवारा होगा, जबकि लोजपा (रामविलास) को भी एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि छोटे सहयोगी दलों को सीमित हिस्सेदारी मिलने के संकेत हैं, जिससे गठबंधन में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
विपक्ष की रणनीति और राजनीतिक लॉबिंग तेज
विपक्षी दल राजद और कांग्रेस भी इस चुनाव को लेकर सक्रिय हो गए हैं। तेजस्वी यादव की पार्टी अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने वाले चेहरों को आगे कर सकती है। दूसरी ओर, सत्ता पक्ष में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों की सूची तैयार की जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह चुनाव 2026 की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।
