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बेंगलुरु में CJP का चप्पल आंदोलन, SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने चप्पल आंदोलन शुरू किया। फ्रीडम पार्क में हुए प्रदर्शन में CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका के साथ अभिनेता प्रकाश राज और यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल हुए।

‘SIR रद्द करो’ के लगे नारे

प्रदर्शन के दौरान ‘SIR रद्द करो’ और ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ जैसे नारे लगाए गए। अभिनेता प्रकाश राज ने अपने संबोधन में CEC ज्ञानेश कुमार पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल उठाए और इसे रद्द करने की मांग की।

बेंगलुरु में CJP का चप्पल आंदोलन, SIR और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी

प्रकाश राज ने बताया गंभीर मुद्दा

प्रकाश राज ने कहा कि CJP से लेकर AISA तक अलग-अलग समूह SIR को लेकर चिंता के कारण एक साथ आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मामला कथित ‘वोट चोरी’ से भी ज्यादा गंभीर है और SIR के जरिए चुनाव प्रक्रिया को लेकर देशभर में सवाल खड़े हुए हैं।

अभिजीत दीपके ने इस्तीफे से आगे की मांग उठाई

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी लड़ाई केवल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक, अगर एक व्यक्ति पद छोड़कर चला जाता है तो उसकी जगह कोई दूसरा अधिकारी आ सकता है। इसलिए संगठन SIR प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त करने और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच की मांग कर रहा है।

ध्रुव राठी ने पूछे चुनाव आयोग से सवाल

प्रदर्शन में शामिल ध्रुव राठी ने SIR को लेकर चुनाव आयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह सत्ता बदलने के लिए प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए हैं, बल्कि उनके कुछ सवाल हैं। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और बाद में दोबारा जोड़े जाने को लेकर चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण की मांग की।

आंदोलन जारी रखने का ऐलान

CJP नेताओं ने कहा कि जब तक CEC ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते और SIR प्रक्रिया पर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन से साफ है कि SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी एवं सामाजिक समूहों की आवाज अब सड़कों पर भी तेज हो रही है। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान लगाए गए आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष अलग हो सकता है।

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