
BIHAR NEWS(India 365 news): बिहार विधान परिषद में नौकरी पाने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। बिहार विधान परिषद में हुई 125 पदों पर नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों के बीच अब 43 कर्मचारियों की दक्षता की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया गया है। इनमें 10 निम्नवर्गीय लिपिक यानी एलडीसी और 33 डाटा एंट्री ऑपरेटर शामिल हैं। इन सभी को 18 नवंबर को जांच के लिए बुलाया गया है।
दरअसल विधान परिषद सचिवालय में पिछले कुछ समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नियुक्त किए गए कुछ कर्मचारियों की काम करने की क्षमता और चयन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं। इसी को देखते हुए सचिवालय ने अब इन कर्मचारियों की दक्षता जांच कराने के लिए नोटिस जारी किया है।
नोटिस में साफ कहा गया है कि सभी संबंधित कर्मचारियों को 18 नवंबर को सचिवालय में होने वाली जांच में शामिल होना जरूरी है। अगर कोई कर्मचारी तय तारीख पर नहीं पहुंचता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है। अधिकारियों की मानें तो आगे दूसरे पदों पर नियुक्त कर्मचारियों की भी जांच कराई जा सकती है।
इससे पहले 6 नवंबर को सचिवालय ने 125 पदों पर बहाल नए कर्मचारियों के कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इनमें एलडीसी और डाटा एंट्री ऑपरेटर के अलावा आशुलिपिक और कार्यालय परिचारी भी शामिल हैं। इन कर्मचारियों की ज्वाइनिंग पिछले साल सितंबर में हुई थी और वे लगातार कार्यालय आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। अचानक रोक लगने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया।
बताया जा रहा है कि इन सभी की नियुक्तियां पूर्व सभापति अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल में हुई थीं। उन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दिया था। फिलहाल रामवचन राय विधान परिषद के सभापति हैं और सचिवालय की तरफ से नियुक्तियों की जांच की जा रही है।
इसी बीच निजी सहायक और स्टेनोग्राफर के सात पदों की शॉर्टहैंड परीक्षा का मामला भी सामने आया है। विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत सफल सात अभ्यर्थियों में से कोई भी परीक्षा देने नहीं पहुंचा। अब इन अभ्यर्थियों को 18 नवंबर को आखिरी मौका दिया गया है। यह मामला 125 पदों वाली भर्ती से अलग है।
फिलहाल 43 कर्मचारियों की जांच के बाद ही उनकी नौकरी को लेकर आगे की स्थिति साफ हो पाएगी।
