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एकता की बैठक में घमासान, बीजेडी कार्यकर्ताओं की हाथापाई से मचा सियासी तूफान
ओडिशा के पुरी जिले के निमापड़ा विधानसभा क्षेत्र में बीजू जनता दल की एक अहम बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब पार्टी के दो गुटों के बीच तीखी झड़प हो गई। यह बैठक बेगुनिया इलाके के जगुलेई पीठ में आयोजित की गई थी जिसका मकसद संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाना था। शुरुआत में माहौल सामान्य था और नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दे रहे थे। लेकिन अचानक किसी मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रहे तनाव को खुलकर सामने ला दिया है।
धक्का-मुक्की और हाथापाई से बिगड़े हालात
जैसे ही बहस बढ़ी दोनों गुटों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। कुछ ही पलों में यह विवाद हाथापाई में बदल गया जिससे बैठक स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं ने किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि इस दौरान कार्यक्रम पूरी तरह बाधित हो गया और बैठक का उद्देश्य अधूरा रह गया। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद काफी गहरे हो चुके हैं जो कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं।

दिलीप नायक की गैरमौजूदगी बना विवाद का कारण
सूत्रों के मुताबिक यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीजेडी के पूर्व विधायक प्रत्याशी दिलीप नायक जेल में हैं और उनकी गैरमौजूदगी में संगठन को संभालने की कोशिश की जा रही है। इसी दौरान सुब्रत छतोई लगातार बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी और नेतृत्व को लेकर असहमति इस झड़प की बड़ी वजह मानी जा रही है। यह घटना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पार्टी की एकता पर उठे सवाल
जगुलेई पीठ में हुई इस घटना के बाद बीजेडी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस बैठक का मकसद संगठन को मजबूत करना था वही बैठक पार्टी के भीतर की कमजोरियों को उजागर कर गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन यह घटना पार्टी नेतृत्व के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि संगठन को एकजुट रखते हुए कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा और संतुलन कायम किया जाए।
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जेट फ्यूल की कीमतों में उछाल से फ्लाइट टिकट महंगे, यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालातों के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। इसका सीधा असर अब हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है। देश की प्रमुख एयरलाइन Air India ने बढ़ती लागत को देखते हुए फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला लिया है। इस फैसले के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की फ्लाइट्स के टिकट महंगे होने तय हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी आने वाले समय में और भी असर दिखा सकती है और यात्रियों को पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है।
8 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें
एयर इंडिया ने अपने फ्यूल सरचार्ज में बदलाव की घोषणा करते हुए बताया कि नई दरें 8 अप्रैल से अधिकतर रूट्स पर लागू हो जाएंगी। वहीं यूरोप उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के रूट्स पर यह बदलाव 10 अप्रैल 2026 से लागू होगा। इस फैसले के तहत घरेलू उड़ानों के टिकटों में 299 रुपये से लेकर 899 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के टिकटों में 2200 रुपये से लेकर 26000 रुपये तक का इजाफा होने की संभावना है। एयरलाइन के अनुसार यह कदम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ संतुलित विचार के बाद उठाया गया है।

दूरी आधारित सरचार्ज सिस्टम लागू
एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए एक नया दूरी आधारित ग्रिड सिस्टम लागू किया है जिसके तहत यात्रा की दूरी के हिसाब से सरचार्ज तय किया जाएगा। इससे छोटी दूरी की उड़ानों पर कम और लंबी दूरी की उड़ानों पर ज्यादा असर पड़ेगा। वहीं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सरचार्ज में ज्यादा बढ़ोतरी की गई है क्योंकि वहां एविएशन टर्बाइन फ्यूल की कीमतों पर कोई तय सीमा नहीं है। एयरलाइन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बढ़ोतरी फ्यूल की पूरी लागत को कवर नहीं करती और कंपनी अभी भी कुछ हिस्सा खुद वहन कर रही है।
वैश्विक स्तर पर फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल
International Air Transport Association के आंकड़ों के अनुसार 27 मार्च को समाप्त सप्ताह में जेट फ्यूल की औसत कीमत बढ़कर 195.19 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। फरवरी में यह कीमत करीब 99.40 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी महज एक महीने में कीमतों में लगभग 100 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस तेजी ने दुनियाभर की एयरलाइंस पर लागत का भारी दबाव डाल दिया है और यही वजह है कि टिकट कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है। आने वाले समय में अगर फ्यूल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है।
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