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Quick commerce a challenge to retailers, will become political issue: Kotak

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Quick commerce a challenge to retailers, will become political issue: Kotak
उद्योग जगत के दिग्गज उदय कोटक

उद्योग जगत के दिग्गज उदय कोटक | फोटो साभार: विशेष व्यवस्था

वित्तीय सेवा उद्योग के दिग्गज उदय कोटक ने गुरुवार (15 नवंबर, 2024) को कहा कि सफल त्वरित वाणिज्य (क्यू-कॉम) व्यापार खुदरा विक्रेताओं के लिए एक चुनौती है और यह एक राजनीतिक मुद्दा बन जाएगा।

एक कार्यक्रम में बोलते हुए, कोटक ने भारतीय व्यवसायों को “मुक्त और निष्पक्ष व्यापार” में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की भी वकालत की।

क्यू-कॉम पक्ष में एक प्रमुख नाम स्विगी की लिस्टिंग के एक दिन बाद आई टिप्पणियों में उन्होंने कहा, “क्यू-कॉम के पास स्थानीय खुदरा विक्रेता के लिए एक चुनौती है और यह एक चुनौती है जो राजनीतिक मोर्चे पर आएगी।”

निजी क्षेत्र के ऋणदाता कोटक महिंद्रा बैंक के संस्थापक और गैर-कार्यकारी निदेशक ने कहा कि भारत दुनिया का एक अनूठा देश है जहां त्वरित सेवा खुदरा सफल रही है, दुनिया के अधिकांश अन्य हिस्सों के विपरीत जहां यह मॉडल उतना प्रभावी नहीं रहा है।

उन्होंने कहा, यह एक सकारात्मक संकेत है, जहां भारतीय नवाचार जमीन पर काम कर रहा है और इसमें से कुछ मूल्य सृजन वास्तव में वास्तविक और टिकाऊ है।

हालाँकि, भारत को अभी भी ऐप्पल, मेटा, यूनिलीवर आदि जैसे उपभोक्ता ब्रांड उपलब्ध कराने बाकी हैं, जो किसी भी विकसित देश या क्षेत्र में एक प्रमुख विशेषता हैं, कोटक ने भारतीय व्यवसायों को उत्पाद और रचनात्मकता पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

कोटक ने यह भी कहा कि घरेलू बाजार में घरेलू खिलाड़ियों के लिए सुरक्षा दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धात्मकता के दृष्टिकोण से “बहुत खतरनाक” है।

उन्होंने कहा, “मुझे भारतीय व्यापार को मुक्त और निष्पक्ष व्यापार में प्रतिस्पर्धी होते देखना अच्छा लगेगा। हमें घरेलू व्यापार की रक्षा करने के बजाय खुले व्यापार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।”

अरबपति बैंकर ने कहा कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजारों में 900 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है, और ट्रम्प प्रशासन या किसी अन्य वैश्विक घटना के तहत होने वाले बदलावों के साथ, देश को इसमें से 5-10% बाहर जाने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

कोटक ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की भी वकालत करते हुए कहा कि इस मोर्चे पर ताकत ही किसी देश की असली ताकत दिखाती है।

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Mutual funds में बड़ा उछाल! 2035 तक AUM और डायरेक्ट इक्विटी दोनों में तेजी, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

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Mutual funds में बड़ा उछाल! 2035 तक AUM और डायरेक्ट इक्विटी दोनों में तेजी, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

Mutual funds उद्योग की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 2035 तक ₹300 लाख करोड़ के पार जाने की संभावना है, जबकि डायरेक्ट इक्विटी शेयरहोल्डिंग ₹250 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी Bain & Company और ऑनलाइन स्टॉकब्रोकिंग कंपनी Groww की संयुक्त रिपोर्ट ‘How India Invests’ में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, म्यूचुअल फंड AUM में यह तेज़ वृद्धि रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के व्यापक उपयोग से प्रेरित होगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले दशक में भारतीय परिवारों में म्यूचुअल फंड्स की पहुंच दोगुनी होकर 10 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत हो जाएगी।

Mutual funds बन रहे सबसे तेजी से बढ़ते एसेट क्लास

रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि म्यूचुअल फंड उद्योग की अगली वृद्धि की लहर घरेलू अपनाने, मजबूत डिजिटल क्षमताओं, सहायक नियामक ढांचे और बढ़ते निवेशक विश्वास से संचालित होगी। वहीं, डायरेक्ट इक्विटी में बढ़ोतरी का कारण है दीर्घकालिक निवेश की ओर बदलाव और डिजिटल माध्यमों से निवेशकों की बढ़ती पहुँच। Bain India के फाइनेंशियल सर्विसेज़ के पार्टनर और हेड सौरभ तृहन ने कहा, “भारतीय परिवार धीरे-धीरे पारंपरिक बचत के नजरिए से निवेश-केंद्रित दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहे हैं। हाल के वर्षों में म्यूचुअल फंड्स और डायरेक्ट इक्विटीज सबसे तेजी से बढ़ते एसेट क्लास के रूप में उभरे हैं।”

Mutual funds में बड़ा उछाल! 2035 तक AUM और डायरेक्ट इक्विटी दोनों में तेजी, निवेशकों के लिए बड़ा मौका

रिटेल निवेशक भारत की अर्थव्यवस्था में निभाएंगे अहम भूमिका

Groww के को-फाउंडर और COO हर्ष जैन ने भी इस दृष्टिकोण की पुष्टि की और कहा, “हम भारतीयों में एक संरचनात्मक बदलाव देख रहे हैं। अब लोग ‘पहले निवेश करें’ की मानसिकता अपना रहे हैं, न कि केवल ‘पहले बचत करें’ की।” रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि रिटेल निवेश भारत को $10 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनाने की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। इससे न केवल नई नौकरियों का सृजन होगा, बल्कि वित्तीय क्षेत्र में व्यवसायों के लिए ग्रोथ कैपिटल की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

निवेश के बढ़ते अवसर और आर्थिक असर

रिपोर्ट के अनुसार, म्यूचुअल फंड्स और डायरेक्ट इक्विटी में बढ़ती निवेश प्रवृत्ति से भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर फायदा होगा। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इन निवेशों से 700,000 से अधिक नई नौकरियों का सृजन होगा और व्यवसायों के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और निवेशकों की जागरूकता ने पारंपरिक बचत से निवेश की दिशा में बदलाव को तेजी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति आने वाले दशकों में भारतीय वित्तीय परिदृश्य को नया आकार देगी और घरेलू निवेशकों के लिए व्यापक अवसर पैदा करेगी।

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Indian Stock Market में बड़ा गिरावट! RBI की राहत के बावजूद क्यों हुआ सोमवार को मार्केट क्रैश?

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Indian Stock Market में बड़ा गिरावट! RBI की राहत के बावजूद क्यों हुआ सोमवार को मार्केट क्रैश?

सोमवार, 8 दिसंबर को Indian Stock Market में पहले ट्रेडिंग दिन ही जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में कटौती की और बैंकों को लगभग ₹1.5 लाख करोड़ की तरलता प्रदान की, फिर भी निवेशकों की उम्मीदों के विपरीत बाजार में कोई रैली नहीं देखी गई। इसके चलते निवेशकों को कुछ ही घंटों में लगभग ₹8 लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। सोमवार दोपहर लगभग 2:50 बजे बीएसई सेंसेक्स 700.58 अंकों या 0.82% की गिरावट के साथ 85,011.79 पर ट्रेड कर रहा था, जबकि एनएसई निफ्टी 50 262.40 अंकों या 1.00% की गिरावट के साथ 25,924.05 पर था।

बाजार गिरावट के प्रमुख कारण

सबसे पहला कारण है यूएस फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्कता। निवेशक 9 और 10 दिसंबर को होने वाली दो दिवसीय बैठक के परिणाम का इंतजार कर रहे हैं। इस बैठक का वैश्विक स्तर पर असर पड़ सकता है, इसलिए निवेशक अपने निवेश को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। दूसरा कारण है विदेशी निवेशकों द्वारा शेयरों की बिक्री। विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार में विश्वास नहीं दिखा रहे हैं। शुक्रवार को लगातार सातवें दिन विदेशी निवेशकों ने शेयर बेचे और ₹438.90 करोड़ की निकासी की। दिसंबर महीने में अब तक ₹11,000 करोड़ से अधिक निवेशक निकासी कर चुके हैं।

Indian Stock Market में बड़ा गिरावट! RBI की राहत के बावजूद क्यों हुआ सोमवार को मार्केट क्रैश?

रुपए में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें

तीसरा कारण है रुपए की लगातार गिरावट। सोमवार के ट्रेडिंग दिन की शुरुआत में रुपया डॉलर के मुकाबले 16 पैसे गिरकर 90.11 पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, जो शेयर बाजार में असुरक्षा की भावना पैदा करता है। चौथा कारण है कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाड़ी देशों से आने वाला ब्रेंट क्रूड 0.13% बढ़कर $63.83 प्रति बैरल हो गया। बढ़ती तेल कीमतें भारत के आयात खर्च और महंगाई को प्रभावित करती हैं, जिससे निवेशक और भी सतर्क हो जाते हैं।

निवेशकों के लिए सावधानी का समय

विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में निवेशकों को अत्यधिक सतर्कता बरतनी चाहिए। वैश्विक आर्थिक घटनाओं, विदेशी निवेशकों की निकासी, रुपये की गिरावट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते बाजार अस्थिर बना हुआ है। हालांकि RBI की तरलता बढ़ाने और रेपो रेट में कटौती जैसी पहल बाजार को सपोर्ट देने के लिए की गई हैं, लेकिन इन उपायों के बावजूद निवेशकों को अलर्ट रहना होगा। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार में जल्दबाजी में कोई निर्णय न लें और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान केंद्रित करें।

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Bank Holiday Next Week: क्रिसमस और नववर्ष से पहले बैंक होंगे बंद! ये चार दिन आपके लेनदेन के लिए बेहद अहम

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Bank Holiday Next Week: क्रिसमस और नववर्ष से पहले बैंक होंगे बंद! ये चार दिन आपके लेनदेन के लिए बेहद अहम

Bank Holiday Next Week: दिसंबर का महीना बैंकों के लिए कई अवसरों पर बंद रहने वाला है, जैसे कि क्रिसमस और नववर्ष की पूर्व संध्या। इसके साथ ही, अगले सप्ताह यानी 8 दिसंबर से 14 दिसंबर के बीच बैंक चार दिन के लिए बंद रहेंगे। ऐसे में यह जानकारी रखना जरूरी है ताकि हम अपने बैंकिंग कार्यों की योजना सही ढंग से बना सकें। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा घोषित छुट्टियों के अनुसार, हर रविवार और महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक सामान्यत: बंद रहते हैं। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय और स्थानीय त्योहारों के कारण भी बैंक बंद रह सकते हैं।

9 और 12 दिसंबर को किन राज्यों में बैंक बंद रहेंगे?

अगले सप्ताह की बात करें तो मंगलवार, 9 दिसंबर को कोच्चि और तिरुवनंतपुरम में बैंक बंद रहेंगे। इसका कारण स्थानीय निकाय चुनाव 2025 की तैयारी है। इस दिन के लिए केवल केरल में बैंक अवकाश रहेगा, जबकि बाकी देश में बैंक सामान्य रूप से खुलेंगे। वहीं शुक्रवार, 12 दिसंबर को मेघालय में बैंक बंद रहेंगे। शिलांग में प. टोगन नेंगमिंजा सांगमा की पुण्यतिथि के अवसर पर यह अवकाश घोषित किया गया है। अन्य राज्यों में बैंक सामान्य रूप से कार्यरत रहेंगे। इससे ग्राहकों को अपने बैंकिंग कार्यों की योजना बनाने में आसानी होगी।

Bank Holiday Next Week: क्रिसमस और नववर्ष से पहले बैंक होंगे बंद! ये चार दिन आपके लेनदेन के लिए बेहद अहम

दिसंबर में कुल 18 बैंक छुट्टियाँ

इसके अलावा, 13 दिसंबर, शनिवार को भी बैंक बंद रहेंगे क्योंकि यह महीने का दूसरा शनिवार है। RBI ने हर महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बैंक बंद रखने को अनिवार्य किया है। इसके साथ ही, दिसंबर के प्रत्येक रविवार को भी बैंक बंद रहेंगे। कुल मिलाकर, दिसंबर 2025 में पूरे देश में बैंक कुल 18 दिनों के लिए बंद रहेंगे। इनमें से कुछ छुट्टियाँ पूरे देश में लागू होंगी, जबकि कई छुट्टियाँ विशेष शहरों या राज्यों तक सीमित होंगी।

क्रिसमस और अन्य महत्वपूर्ण छुट्टियाँ

दिसंबर में सबसे प्रमुख छुट्टी 25 दिसंबर को क्रिसमस के अवसर पर होगी, जब पूरे देश में बैंक बंद रहेंगे। इसके अलावा, विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय त्योहारों और विशेष अवसरों के कारण भी बैंक अवकाश रहेंगे। ऐसे में ग्राहक से यह सुझाव दिया जाता है कि शाखा में जाने से पहले अपने क्षेत्र की स्थानीय बैंकिंग टाइमिंग और छुट्टियों की जानकारी जरूर ले लें। इससे वे अपने लेन-देन और जरूरी बैंकिंग कार्य समय पर पूरा कर सकेंगे और किसी असुविधा से बचेंगे।

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