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Punjab sees season’s maximum single day spike in farm fires at 1,251

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Punjab sees season’s maximum single day spike in farm fires at 1,251
2 नवंबर, 2024 को पंजाब के संगरूर जिले के बाहरी इलाके में एक खेत से धान की फसल के अवशेषों को हटाने के लिए पराली (पराली) जलाई गई।

2 नवंबर, 2024 को पंजाब के संगरूर जिले के बाहरी इलाके में एक खेत से धान की फसल के अवशेषों को हटाने के लिए पराली (पराली) जलाई गई। फोटो साभार: शशि शेखर कश्यप

चूंकि पंजाब का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘मध्यम’ से ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है, इसलिए राज्य में एक दिन में अधिकतम वृद्धि देखी गई। खेत की आग चल रहे ‘खरीफ’ कटाई के मौसम के दौरान सोमवार (18 नवंबर, 2024) को।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के सैटेलाइट इमेजरी पर आधारित आंकड़ों के अनुसार 18 नवंबर को पंजाब में खेतों में आग लगने के 1,251 मामले सामने आए। मुक्तसर जिले में खेतों में आग लगने की सबसे अधिक 247 घटनाएं दर्ज की गईं, इसके बाद मोगा (149) और फिरोजपुर (130) का स्थान रहा।

पंजाब में धान (चावल) की कटाई अपने अंतिम चरण पर है, और जबकि इस साल पंजाब में खेतों में आग लगने की घटनाओं में गिरावट देखी गई है पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले, हालांकि, राज्य में पिछले एक पखवाड़े के दौरान खेतों में आग लगने की घटनाओं में धीरे-धीरे वृद्धि देखी गई है, जिससे वायु प्रदूषण को लेकर चिंता बढ़ गई है, जो पंजाब और पड़ोसी क्षेत्रों को परेशान कर रहा है।

यह भी पढ़ें | पंजाब, हरियाणा में पराली जलाना | क्रॉस (खेत) की आग में फंस गया

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा संचालित कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस (CREAMS) के अनुसार, जो पराली जलाने की निगरानी करता है और दैनिक रिपोर्ट प्रदान करता है, पंजाब में 26 अक्टूबर को 108 खेतों में आग लगी (चावल) अवशेष) मामले, जो 8 नवंबर को बढ़कर 730 हो गए, और 11 नवंबर को यह 418 हो गए, जबकि 13 नवंबर को यह 509 थे, और यह पहुंच गया 18 नवंबर को 1,251।

आंकड़ों से पता चलता है कि 26 अक्टूबर से पहले की घटनाओं की तुलना में खेतों में आग लगने की औसत संख्या अपेक्षाकृत अधिक थी। हर साल शरद ऋतु के आसपास पराली जलाना राष्ट्रीय राजधानी सहित देश के उत्तरी क्षेत्र में वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले कारकों में से एक रहा है – नई दिल्ली और आसपास के क्षेत्र।

पीपीसीबी के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू खरीफ सीजन (15 सितंबर-30 नवंबर) में 18 नवंबर तक पंजाब में खेतों में आग लगने के 9,655 मामले सामने आए हैं। पिछले साल इसी अवधि के दौरान ऐसी 33,719 घटनाएं दर्ज की गई थीं। जबकि साल 2022 में 18 नवंबर तक खेतों में आग लगने की 43,489 घटनाएं दर्ज की गईं.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लुधियाना का AQI, जो 26 अक्टूबर को 159 था, 18 नवंबर को 287 हो गया। पटियाला में यह 92 से बढ़कर 259 हो गया। इसी अवधि के दौरान जालंधर में AQI 179 से बढ़कर 249 हो गया। पंजाब और हरियाणा की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ का AQI 18 नवंबर को 268 तक पहुंच गया, जो 26 अक्टूबर को 160 दर्ज किया गया था।

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AI समिट हंगामे पर बढ़ा सियासी संग्राम, कांग्रेस ने लगाया दमन का आरोप

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AI समिट हंगामे पर बढ़ा सियासी संग्राम, कांग्रेस ने लगाया दमन का आरोप

दिल्ली में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष Uday Bhanu Chib को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। चिब के साथ देश के विभिन्न राज्यों से कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया था। बीते दिनों ड्यूटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी और पासपोर्ट व इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जमा कराने की शर्त भी रखी थी। हालांकि रिहाई से ठीक पहले पुलिस ने सेशंस कोर्ट में अपील दायर की, जिसके बाद जमानत आदेश पर रोक लगा दी गई। अब अगली सुनवाई 6 मार्च को तय की गई है।

यूथ कांग्रेस का आरोप—‘ऊपर से निर्देश पर हुई कार्रवाई’

यूथ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट जारी कर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि आधी रात को पुलिस ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष रिमांड बढ़ाने की अर्जी दी थी, जिसे अदालत ने अवैध बताते हुए खारिज कर दिया था। इसके बाद जमानत आदेश जारी हुआ। लेकिन जब वकील जमानत की औपचारिकताएं पूरी कर रहे थे, उसी दौरान पुलिस की क्राइम ब्रांच ने सेशंस कोर्ट में अपील कर दी। यूथ कांग्रेस का दावा है कि उनके पक्ष को सुने बिना ही जमानत पर स्टे लगा दिया गया, जो न्यायिक प्रक्रिया की भावना के विपरीत है।

AI समिट हंगामे पर बढ़ा सियासी संग्राम, कांग्रेस ने लगाया दमन का आरोप

कांग्रेस का आरोप—दमन की राजनीति और ट्रेड डील से जुड़ा विरोध

कांग्रेस ने इस घटनाक्रम को राजनीतिक दमन करार दिया है। पार्टी का कहना है कि सरकार और दिल्ली पुलिस मिलकर विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं। यूथ कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि संगठन न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता है, लेकिन जमानत पर रोक के खिलाफ सभी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में रखकर सरकार उन सवालों से ध्यान भटकाना चाहती है जो कथित तौर पर एक ‘युवा-किसान विरोधी ट्रेड डील’ से जुड़े हैं। पार्टी ने चेतावनी दी है कि आंदोलन और तेज किया जाएगा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

भारत मंडपम में AI समिट के दौरान हुआ था हंगामा

दिल्ली के भारत मंडपम में हाल ही में आयोजित एआई समिट में दुनिया भर के नेता और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। इसी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसी क्रम में यूथ कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को भी गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल सेशंस कोर्ट द्वारा जमानत पर रोक लगाए जाने के बाद चिब तिहाड़ जेल में हैं। इस मामले ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है और अब सबकी नजर 6 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है।

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दिल्ली अदालत ने अरविंद केजरीवाल को शराब नीति घोटाले में पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया

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दिल्ली अदालत ने अरविंद केजरीवाल को शराब नीति घोटाले में पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल को शराब नीति मामले में दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों के खिलाफ भी आरोपपत्र को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि सीबीआई के आरोपपत्र में कई खामियां थीं, जिनका कोई ठोस सबूत नहीं मिला। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आबकारी नीति में कोई व्यापक साजिश या आपराधिक इरादा नहीं था। दोषमुक्त होने के बाद केजरीवाल भावुक हो गए और उन्हें संभालते हुए मनीष सिसोदिया की आंखें भी छलक उठीं।

शराब नीति विवाद की लंबी और जटिल टाइमलाइन

शराब नीति घोटाले की जांच और कानूनी प्रक्रिया लगभग दो सालों से चली आ रही थी। अक्टूबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने केजरीवाल को पहली बार समन जारी किया था। इसके बाद उन्होंने कई समनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित और अवैध बताते हुए अनदेखा किया। जनवरी 2024 तक ईडी द्वारा जारी समनों की कानूनी चुनौती दी गई। मार्च 2024 में सत्र न्यायालय ने उन्हें जमानत दी, लेकिन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के बीच लंबी खींचतान चली। जून 2024 में सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया। इस पूरी प्रक्रिया में केजरीवाल ने अपनी कानूनी टीम के साथ कई जटिल याचिकाओं और अंतरिम जमानत के लिए अपील दायर की।

दिल्ली अदालत ने अरविंद केजरीवाल को शराब नीति घोटाले में पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया

कानूनी लड़ाई और गिरफ्तारी की घटनाएं

10 मई 2024 को सर्वोच्च न्यायालय ने केजरीवाल को अंतरिम जमानत दी, जिससे वे लोकसभा चुनाव प्रचार में भाग ले सके। 2 जून 2024 को उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया, लेकिन 5 जून को अदालत ने उनकी अंतरिम जमानत खारिज कर दी। 20 जून 2024 को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उन्हें नियमित जमानत मिली, जबकि 26 जून 2024 को सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया। इसके बाद की जमानत याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने अपना फैसला सुरक्षित रखा। 13 सितंबर 2024 को उन्हें जमानत मिली और जनवरी 2026 में दिल्ली अदालत ने ईडी के दोनों मामलों में उन्हें बरी कर दिया।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की क्लीन चिट से आम आदमी पार्टी और उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आरोपपत्र में कई कमियां थीं और कोई ठोस साक्ष्य नहीं था। इससे न केवल राजनीतिक विवाद खत्म हुआ, बल्कि दिल्ली में विपक्ष और नागरिकों के बीच भी मामला अब शांत हुआ। इस फैसले के बाद राजनीति में आगामी चुनौतियों और आगामी चुनावों पर भी इसका असर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना भारतीय न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता की मिसाल के रूप में याद रखी जाएगी।

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले नेहरू मूर्ति गिराने की घटना ने बढ़ाई राजनीति

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असम में विधानसभा चुनाव से पहले नेहरू मूर्ति गिराने की घटना ने बढ़ाई राजनीति

असम में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कछार जिले से एक हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की 10 फीट ऊँची मूर्ति गिरा दी गई। यह घटना राज्य की राजनीति में नया विवाद पैदा कर रही है। स्थानीय लोग और राजनीतिक दल इस मामले में सवाल उठाते हुए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

बीजेपी और आरएसएस कार्यकर्ताओं पर आरोप

स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि बीजेपी और आरएसएस के कुछ कार्यकर्ताओं ने इस मूर्ति को गिराया। प्रतिमा गिरने की घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। घटना मंगलवार सुबह की बताई जा रही है, जब सुबह सैर करने वाले लोग मूर्ति को क्षतिग्रस्त अवस्था में देखकर चौंक गए। लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद अधिकारी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की।

असम में विधानसभा चुनाव से पहले नेहरू मूर्ति गिराने की घटना ने बढ़ाई राजनीति

CCTV फुटेज में हुआ खुलासा

प्रदीप कुमार डे, कांग्रेस नेता, ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि मूर्ति गिरने की सूचना मिलते ही उन्होंने पुलिस को सूचित किया। अधिकारियों ने शुरुआती जांच में दावा किया कि प्रतिमा अपने आप गिर गई, लेकिन आगे की जांच में सीसीटीवी फुटेज सामने आया। फुटेज में स्पष्ट देखा गया कि एक ग्रुप मशीन का उपयोग करते हुए मूर्ति को तोड़ रहा था। इस खुलासे ने घटना को और गंभीर बना दिया है और राजनीतिक हलकों में बहस तेज कर दी है।

राजनीति और कानून की नजरें

इस घटना के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्षी दल बीजेपी और आरएसएस के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान के लिए सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों का अध्ययन किया जा रहा है। असम की सियासत में यह घटना विधानसभा चुनाव से ठीक पहले नया मोड़ लेकर आई है, और आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है।

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