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CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभाली ज्ञानेश कुमार ने, विपक्ष का विश्वास जीतना बड़ी चुनौती

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CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभाली ज्ञानेश कुमार ने, विपक्ष का विश्वास जीतना बड़ी चुनौती

CEC Gyanesh Kumar: ज्ञानेश कुमार ने राजीव कुमार की जगह पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला है और वे अगले 4 साल तक इस पद पर रहेंगे। इस दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष का विश्वास जीतना होगी। इसके साथ ही, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी अपने पद की जिम्मेदारी ली है।

ज्ञानेश कुमार ने पद संभालते ही क्या कहा?

पद संभालने के बाद, ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राष्ट्र निर्माण की ओर पहला कदम मतदान होता है। इसलिए भारत के प्रत्येक नागरिक को, जिसने 18 साल की उम्र पूरी कर ली हो, एक मतदाता बनना चाहिए और हमेशा मतदान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय संविधान के तहत चुनावी कानून, नियम और दिशा-निर्देशों के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग हमेशा मतदाताओं के साथ था, है और रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में समिति ने किया निर्णय

सोमवार (17 फरवरी, 2025) की देर रात, केंद्रीय सरकार ने ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया। यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक के कुछ ही घंटे बाद लिया गया। इस बैठक में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया। ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति 2023 के कानून के तहत की गई है। इस कानून के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है। इस चयन समिति में प्रधानमंत्री मोदी (अध्यक्ष), प्रधानमंत्री द्वारा नामित कैबिनेट मंत्री – अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों को लेकर सुनवाई

यह नियुक्तियाँ उस समय की गईं हैं, जब सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी को प्राथमिकता के आधार पर उन याचिकाओं की सुनवाई शुरू करनी है, जो 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों को चुनौती देती हैं। यह मामला देश में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर काफी महत्वपूर्ण है और सुप्रीम कोर्ट में इसका निपटारा होगा।

ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल और जिम्मेदारियाँ

ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल 4 साल का होगा, और उन्हें कई महत्वपूर्ण चुनावों की जिम्मेदारी निभानी है। वह इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों और अगले साल पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में होने वाले चुनावों की देखरेख करेंगे। इन चुनावों के दौरान निर्वाचन आयोग को निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने की चुनौती होगी।

CEC Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त पद की जिम्मेदारी संभाली ज्ञानेश कुमार ने, विपक्ष का विश्वास जीतना बड़ी चुनौती

ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली और चुनौती

ज्ञानेश कुमार के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। सबसे पहले तो विपक्ष का विश्वास जीतना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर हमेशा सवाल उठते रहते हैं। इसके अलावा, चुनाव आयोग को सुनिश्चित करना होगा कि आगामी चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित किए जाएं। इसके साथ ही, मतदान की प्रक्रिया में लोगों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करना भी उनके लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

भारत निर्वाचन आयोग का महत्व

भारत निर्वाचन आयोग का संविधान में महत्वपूर्ण स्थान है। यह सुनिश्चित करता है कि चुनाव निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण तरीके से हो। निर्वाचन आयोग का कर्तव्य है कि वह देश के नागरिकों को वोट देने का अधिकार प्रदान करे और यह सुनिश्चित करे कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी हो।

भारत में चुनावों की प्रक्रिया

भारत में चुनाव आयोग की जिम्मेदारी केवल लोकसभा या विधानसभा चुनावों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्यों में उपचुनावों, राष्ट्रपति चुनावों और अन्य चुनावों की भी देखरेख करता है। इसके अलावा, निर्वाचन आयोग चुनाव प्रचार के नियमों की निगरानी भी करता है और चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार के अनुशासनहीनता या धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से लेता है।

ज्ञानेश कुमार की पृष्ठभूमि और अनुभव

ज्ञानेश कुमार के पास प्रशासनिक क्षेत्र में लंबा अनुभव है। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है और उनकी कार्यशैली को लेकर उन्हें सराहा गया है। उन्हें चुनावों के संचालन, नीति निर्धारण, और सरकारी संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने में महारत हासिल है। उनका यह अनुभव निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को और मजबूत बनाएगा।

आने वाले चुनावों के लिए उम्मीदें

ज्ञानेश कुमार के मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद, यह उम्मीद की जा रही है कि आगामी चुनावों में अधिक प्रभावी और पारदर्शी प्रक्रिया देखने को मिलेगी। उनका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का सवाल न उठे और सभी नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार का सही तरीके से प्रयोग करने का अवसर मिले।

ज्ञानेश कुमार का मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभालना भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व में निर्वाचन आयोग को और अधिक निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी बनाने की उम्मीद है। उनके द्वारा उठाए गए कदम भारतीय चुनाव प्रक्रिया को और भी मजबूत बना सकते हैं, जिससे चुनावों में जनता का विश्वास और बढ़ेगा।

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भारतीय सेना का बड़ा कदम, हर जवान अब ड्रोन ऑपरेशन में पूरी तरह प्रशिक्षित

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भारतीय सेना का बड़ा कदम, हर जवान अब ड्रोन ऑपरेशन में पूरी तरह प्रशिक्षित

आधुनिक युद्ध में ड्रोन सबसे घातक और प्रभावी हथियार के रूप में तेजी से उभर रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध हो या पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, हर जगह ड्रोन की निर्णायक भूमिका देखी जा रही है। भारतीय सेना ने इस बदलते युद्ध स्वरूप को समझते हुए अपनी सैन्य क्षमताओं को ड्रोन तकनीक से लैस करना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने ड्रोन का प्रभावी इस्तेमाल कर अपनी ताकत साबित की। इस दौरान न केवल अपने ड्रोन से निगरानी और हमले किए गए, बल्कि दुश्मन के ड्रोन को भी मार गिराया गया।

हर सैनिक बनेगा ड्रोन ऑपरेटर

भारतीय सेना अब हर जवान को ड्रोन ऑपरेशन की ट्रेनिंग दे रही है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इंफेंट्री यूनिट्स में बेसिक ड्रोन ट्रेनिंग का पहला चरण पूरा हो चुका है। इसके तहत हर सैनिक को ड्रोन उड़ाने और उसकी बुनियादी जानकारी दी गई है। दूसरे चरण में एडवांस ट्रेनिंग शुरू की गई है, जिसमें सैनिकों को स्पेशल ऑपरेशन, सर्विलांस और काउंटर-ड्रोन तकनीक सिखाई जा रही है। देशभर में इसके लिए विशेष ट्रेनिंग सेंटर भी बनाए जा रहे हैं।

भारतीय सेना का बड़ा कदम, हर जवान अब ड्रोन ऑपरेशन में पूरी तरह प्रशिक्षित

हर बटालियन में अश्नी प्लाटून

सेना ने हर इंफेंट्री बटालियन में एक ड्रोन यूनिट बनाई है, जिसे अश्नी प्लाटून नाम दिया गया है। अब तक करीब 380 बटालियनों में ये प्लाटून सक्रिय हो चुके हैं। इनके पास अलग-अलग प्रकार के आधुनिक ड्रोन मौजूद हैं। ड्रोन ट्रेनिंग को मजबूत करने के लिए प्रमुख सैन्य संस्थानों जैसे देहरादून की इंडियन मिलिट्री अकादमी (IMA), महू का इन्फैंट्री स्कूल और चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में खास सुविधाएं तैयार की गई हैं। जवानों के साथ-साथ अधिकारियों को भी ड्रोन ऑपरेशन में प्रशिक्षित किया जा रहा है।

ईगल इन द आर्म और भविष्य की योजना

भारतीय सेना ने इस मिशन को ईगल इन द आर्म नाम दिया है, जिसका मतलब है कि हर सैनिक अपने हथियार की तरह ड्रोन का भी इस्तेमाल कर सके। ड्रोन का इस्तेमाल केवल हमले तक सीमित नहीं है बल्कि निगरानी, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट और मेडिकल इमरजेंसी जैसे मरीजों को निकालने में भी किया जा रहा है। साथ ही दुश्मन के ड्रोन को नष्ट करने के लिए काउंटर-ड्रोन सिस्टम भी तेजी से तैनात किए जा रहे हैं। सेना का लक्ष्य है कि 2027 तक इंफेंट्री के 100% जवान ड्रोन ऑपरेशन में पूरी तरह प्रशिक्षित हों। इस बहु-स्तरीय योजना से युद्ध का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है और यह देश की सुरक्षा को नई मजबूती देने वाला साबित होगा।

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ED ने PACL घोटाले में 126 संपत्तियों पर की जबरदस्त जब्ती, कीमत 5 हजार करोड़

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ED ने PACL घोटाले में 126 संपत्तियों पर की जबरदस्त जब्ती, कीमत 5 हजार करोड़

केंद्रीय जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL लिमिटेड से जुड़े वित्तीय घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ED ने दिल्ली और पंजाब में स्थित 126 संपत्तियों को जब्त किया है, जिनकी कुल कीमत ₹5,046.91 करोड़ आंकी गई है। यह मामला एक धोखाधड़ी निवेश योजना से जुड़ा है, जिसमें कंपनी ने पूरे देश में लाखों निवेशकों से लगभग ₹48,000 करोड़ जुटाए। निवेशकों को जमीन देने का वादा किया गया, लेकिन अधिकांश निवेशकों को न तो जमीन मिली और न ही उनकी राशि वापस हुई।

CBI ने 2014 में शुरू की जांच, ED ने PMLA के तहत मामला दर्ज किया

PACL घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 2014 में शुरू की थी। इसके बाद ED ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि कंपनी ने शेल कंपनियों और नकली लेन-देन के जरिए निवेशकों की राशि को धोखाधड़ी से शुद्ध किया। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में निवेशकों की राशि की वापसी के लिए समिति बनाई थी, लेकिन इसके बावजूद कंपनी की संपत्तियों की अवैध बिक्री और हेराफेरी जारी रही। ED के अनुसार अब तक इस मामले में कुल ₹22,656 करोड़ की संपत्तियों को जब्त किया जा चुका है।

ED ने PACL घोटाले में 126 संपत्तियों पर की जबरदस्त जब्ती, कीमत 5 हजार करोड़

देश के सबसे बड़े वित्तीय धोखाधड़ी और पोंजी योजना मामलों में से एक

PACL यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड घोटाला भारत के सबसे बड़े वित्तीय धोखाधड़ी और पोंजी योजना मामलों में गिना जाता है। यह ‘कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम’ (CIS) के रूप में संचालित होती थी। निवेशकों को उनके पैसे दोगुना करने या जमीन देने का लालच दिया जाता था। इसके तहत कृषि और रियल एस्टेट परियोजनाओं में निवेश का वादा करके लोगों से पैसा इकट्ठा किया जाता था।

पोंजी योजना की चालाकी और आरोपी संस्थापक

जांच में पता चला कि PACL ने पोंजी योजना के रूप में काम किया। नए निवेशकों से मिली राशि का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने और एजेंटों को भारी कमीशन देने में किया गया। इस योजना के पीछे पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू थे, जिनका अगस्त 2024 में निधन हो गया। अभी भी इस मामले की जांच जारी है और ED और अन्य जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क और निवेशकों की राशि की वापसी पर काम कर रही हैं।

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राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू और राबड़ी की याचिका खारिज कर दिया, बड़ा झटका

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राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू और राबड़ी की याचिका खारिज कर दिया, बड़ा झटका

दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने दोनों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका लैंड-फॉर-जॉब्स मामले में ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराने की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि हर दस्तावेज प्राप्त करना आरोपियों का अधिकार नहीं है। पहले अभियोजन पक्ष अपने सबूत पेश करेगा, उसी आधार पर सुनवाई होगी। बिना ठोस बचाव के आरोपियों को अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की अनुमति नहीं है।

अन्य आरोपियों की याचिकाएं भी खारिज

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने लालू के निजी सचिव आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दीं। महाजन ने एक और कपूर ने 23 दस्तावेज उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने कहा कि ये दस्तावेज अभियोजन पक्ष की शिकायत में भरोसेमंद नहीं हैं और इनका उद्देश्य मुकदमे को लंबा खींचने का प्रतीत होता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी याचिकाओं से न्यायिक प्रक्रिया अव्यवस्थित और उल्टी गंगा बहाने जैसी बन सकती है।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू और राबड़ी की याचिका खारिज कर दिया, बड़ा झटका

आरोपियों के इरादों पर संदेह

न्यायाधीश गोगने ने 35 पृष्ठों के आदेश में कहा कि आरोपियों द्वारा जिरह की आड़ में न्यायिक प्रक्रिया पर वैधानिक नियंत्रण हथियाने की कोशिश हो रही है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि आरोपियों का गुप्त उद्देश्य कार्यवाही को लंबा खींचना है। कोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई और शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए साक्ष्यों को वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप दर्ज करने पर जोर दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया, न्यायिक कार्यवाही पर शर्त नहीं लगाई जा सकती

अदालत ने कहा कि आरोपियों का यह अनुरोध कि बचाव की तैयारी से पहले सभी या कुछ ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, अस्वीकार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों को पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण करने का पर्याप्त अवसर दिया गया है, जो साक्ष्यों के उस समूह का हिस्सा हैं और अभियोजन पक्ष ने शिकायत में उनका इस्तेमाल नहीं किया।

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