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Tax Evasion Scam: बिरयानी के गायब बिलों से खुला 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला

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Tax Evasion Scam: बिरयानी के गायब बिलों से खुला 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला

Tax Evasion Scam: डिजिटल युग में अपराध करना जितना आसान दिखता है, पकड़ा जाना उससे भी ज्यादा तय हो गया है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला देशभर के रेस्टुरेंट कारोबार से सामने आया है, जहां “गायब” किए गए बिरयानी और अन्य खाद्य पदार्थों के बिलों ने करीब 70,000 करोड़ रुपये के टैक्स चोरी घोटाले का पर्दाफाश कर दिया। 2019 से अब तक 1.77 लाख रेस्टुरेंट्स के बिलिंग डेटा की जांच में पाया गया कि औसतन 27 प्रतिशत बिक्री को दबाया जा रहा था। यह सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि संगठित और सुनियोजित हेराफेरी का बड़ा नेटवर्क था। कुल मिलाकर लगभग 70,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर छिपाया गया, जिससे सरकार को अरबों डॉलर के राजस्व नुकसान की आशंका है। शुरुआती जांच में यह मामला सीमित लगा, लेकिन जैसे-जैसे डेटा की परतें खुलीं, टैक्स चोरी का दायरा कई राज्यों तक फैलता दिखाई दिया।

राज्यों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी, हजारों PAN रडार पर

जांच के दौरान कई राज्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आईं। कर्नाटक में लगभग 2,000 करोड़ रुपये के डिलीट लेन-देन का पता चला, जबकि तेलंगाना में करीब 1,500 करोड़ रुपये की बिक्री छिपाई गई। तमिलनाडु, महाराष्ट्र और गुजरात में भी बड़े स्तर पर गड़बड़ियां सामने आई हैं। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के 3,734 PAN की जांच में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की दबाई गई बिक्री उजागर हुई। सिर्फ 40 रेस्टुरेंट्स के सैंपल में ही करीब 400 करोड़ रुपये का बिना घोषित टर्नओवर मिला। कुछ जगहों पर तो लगभग 25 प्रतिशत तक की बिक्री जानबूझकर छिपाई गई थी। इन खुलासों के बाद केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब विभाग पुनर्निर्मित बिलों का मिलान आयकर रिटर्न और बैंक रिकॉर्ड से कर रहा है, और जल्द ही नोटिस व भारी जुर्माने की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है।

Tax Evasion Scam: बिरयानी के गायब बिलों से खुला 70,000 करोड़ का टैक्स घोटाला

हैदराबाद से शुरू हुआ खुलासा, सॉफ्टवेयर से मिला बड़ा सबूत

पूरे मामले की शुरुआत हैदराबाद में एक नियमित जांच के दौरान हुई। आयकर विभाग के अधिकारी एक रेस्टुरेंट में पहुंचे, जहां सब कुछ सामान्य लग रहा था—ग्राहक भोजन कर रहे थे और काउंटर पर बिलिंग जारी थी। लेकिन अधिकारियों ने गौर किया कि रेस्टुरेंट में मौजूद ग्राहकों की संख्या और बिलिंग सिस्टम में दर्ज बिलों की संख्या में मेल नहीं था। कुछ नकद बिल थोड़ी देर के लिए सिस्टम में दिखाई देते और फिर गायब हो जाते थे। प्रिंटेड सारांश तो सही दिख रहे थे, लेकिन सॉफ्टवेयर लॉग कुछ और कहानी बयान कर रहे थे। जांच में पता चला कि कई रेस्टुरेंट एक ही बिलिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे थे। जब जांच अहमदाबाद स्थित सॉफ्टवेयर प्रदाता के बैकएंड तक पहुंची, तो देशभर के एक लाख से अधिक रेस्टुरेंट्स का लगभग 60 टेराबाइट डेटा सामने आया। हैदराबाद की डिजिटल लैब में विशेषज्ञों ने डिलीट किए गए बिलों को दोबारा जोड़ना शुरू किया और हर लेन-देन के पीछे छिपी डिजिटल ट्रेल को उजागर किया।

AI की मदद से रिकवर हुए डिलीट बिल, बढ़ सकती है कानूनी कार्रवाई

जांच एजेंसियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स की मदद से डिलीट किए गए बिलों को रिकवर किया। विश्लेषण में सामने आया कि छह वर्षों में संबंधित रेस्टुरेंट्स ने लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये के बिल जनरेट किए थे, जिनमें से 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के बिल रिकॉर्ड होने के बाद मिटा दिए गए थे। कुछ रेस्टुरेंट रोजाना कुछ नकद बिल हटाते थे, जबकि कुछ ने पूरे 30 दिनों के बिल एक साथ डिलीट कर दिए। स्पष्ट है कि कम बिक्री दिखाकर कम टैक्स चुकाने की मंशा से यह खेल खेला गया। अब विभाग इस डेटा के आधार पर बड़े स्तर पर नोटिस जारी करने और जुर्माना लगाने की तैयारी में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई आने वाले समय में डिजिटल टैक्स निगरानी को और सख्त करेगी और टैक्स चोरी करने वालों के लिए यह बड़ा चेतावनी संदेश साबित होगी।

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सोना चांदी के दामों में बड़ा बदलाव निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट जारी

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सोना चांदी के दामों में बड़ा बदलाव निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट जारी

घरेलू फ्यूचर मार्केट में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोना 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था जबकि चांदी 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही थी। इस सप्ताह दोनों कीमती धातुओं में लगातार उछाल दर्ज किया गया है। सोने की कीमतों में लगभग 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है जबकि चांदी में करीब 10,500 रुपये की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है।

चांदी के ताजा भाव और शहरों में कीमतें

12 अप्रैल के ताजा अपडेट के अनुसार देश के प्रमुख शहरों में चांदी के दामों में भी तेजी बनी हुई है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,600 रुपये के आसपास बनी हुई है। वहीं 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को लगभग 26,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। चेन्नई में चांदी की कीमत थोड़ी अधिक है जहां 10 ग्राम चांदी लगभग 2,650 रुपये में बिक रही है। चांदी की कीमतों में यह उछाल वैश्विक बाजार और घरेलू मांग दोनों के कारण देखा जा रहा है जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है।

सोना चांदी के दामों में बड़ा बदलाव निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट जारी

देश के प्रमुख शहरों में सोने का ताजा रेट

सोने के दामों में भी विभिन्न शहरों में अलग अलग स्तर पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,52,990 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,250 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,14,780 रुपये के स्तर पर है। मुंबई और कोलकाता में भी लगभग इसी तरह के भाव देखने को मिल रहे हैं जहां 24 कैरेट सोना 1,52,840 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। चेन्नई में सोने की कीमतें सबसे अधिक हैं जहां 24 कैरेट सोना 1,53,820 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। अहमदाबाद, लखनऊ, पटना और हैदराबाद जैसे शहरों में भी सोने के दाम 1,52,000 रुपये से अधिक बने हुए हैं।

भारत में सोने चांदी का भावनात्मक और निवेश मूल्य

भारत में सोना और चांदी केवल निवेश का साधन नहीं हैं बल्कि यह परंपरा और भावनाओं से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। शादी विवाह और त्योहारों के अवसर पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है और इसे समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। कई परिवारों के लिए यह आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत माध्यम भी है जो जरूरत के समय सहारा बनता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के चलते आने वाले समय में कीमतों में और उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को सोच समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि सोना और चांदी दोनों ही लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते रहे हैं।

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IPO बाजार में जबरदस्त उछाल मार्च 2026 में 38 कंपनियों ने दाखिल किए DRHP

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IPO बाजार में जबरदस्त उछाल मार्च 2026 में 38 कंपनियों ने दाखिल किए DRHP

भारतीय आईपीओ बाजार में मार्च 2026 के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। Securities and Exchange Board of India के पास कुल 38 कंपनियों ने अपने शुरुआती IPO दस्तावेज जमा किए हैं, जिनमें SBI Funds Management और Manipal Health Enterprises जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जहां मार्च 2025 में 22 और मार्च 2024 में केवल 16 आवेदन आए थे। इस वृद्धि से साफ संकेत मिलता है कि कंपनियों का पब्लिक मार्केट में उतरने का भरोसा बढ़ रहा है और नियामकीय प्रक्रिया के प्रति उनकी तैयारी भी मजबूत हुई है।

DRHP फाइलिंग में बढ़ोतरी और बड़ी कंपनियों की तैयारी

मार्च 2026 में आई इस तेजी के पीछे कई बड़ी कंपनियों की भागीदारी भी अहम है। रिपोर्ट्स के अनुसार National Stock Exchange of India और Reliance Jio जैसी प्रमुख कंपनियां भी आने वाले समय में अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल करने की तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा Sembcorp Industries की भारतीय शाखा, PlaySimple, Fibe और BatterySmart जैसी कंपनियां भी आईपीओ के लिए कतार में हैं। इनमें से कुछ ने गोपनीय फाइलिंग का विकल्प चुना है, जिससे वे बाजार में उतरने से पहले अपनी रणनीति को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाए रखना चाहती हैं। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब अपने पब्लिक ऑफर को लेकर अधिक रणनीतिक और तैयार दृष्टिकोण अपना रही हैं।

IPO बाजार में जबरदस्त उछाल मार्च 2026 में 38 कंपनियों ने दाखिल किए DRHP

लंबित मंजूरियां और मजबूत होती IPO पाइपलाइन

Axis Capital की रिपोर्ट के अनुसार, कई कंपनियां पहले से ही SEBI से मंजूरी का इंतजार कर रही हैं, जबकि 124 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन उन्होंने अभी तक अपने शेयर बाजार में जारी नहीं किए हैं। वहीं 64 कंपनियां DRHP जमा कर मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं। मार्च 2025 से अब तक 20 कंपनियों ने गोपनीय DRHP फाइल किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 109 मेनबोर्ड आईपीओ आए, जिनमें से अधिकांश लिस्टिंग के समय अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड हुए। यह डेटा बताता है कि बाजार में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है और आईपीओ पाइपलाइन लगातार भरती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भी यह रुझान जारी रह सकता है।

बाजार की अस्थिरता के बावजूद कंपनियों का भरोसा कायम

हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के बावजूद कंपनियों का आईपीओ की ओर रुझान बना हुआ है। डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe ने अपनी लिस्टिंग को कुछ समय के लिए टाल दिया है, लेकिन कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में पब्लिक लिस्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह तेजी केवल समयसीमा का परिणाम नहीं है बल्कि कंपनियों की बेहतर तैयारी, निवेशकों का भरोसा और मजबूत रेगुलेटरी ढांचे का संयुक्त प्रभाव है। जानकार यह भी मानते हैं कि अब कंपनियां सही समय और बेहतर मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए आईपीओ लॉन्च कर रही हैं, जिससे बाजार में एक संतुलित और स्थिर विकास देखने को मिल रहा है।

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घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना

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घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना

गुल्फ़ देशों में जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण आयात में कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप तेल विपणन कंपनियों के पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से घट रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और कंपनियां दोनों ही आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडरों में एलपीजी की आपूर्ति को घटाने पर विचार किया जा रहा है। योजना यह है कि हर सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम की बजाय लगभग 10 किलोग्राम गैस दी जाएगी। ऐसा करने से कुल उपलब्ध आपूर्ति में कमी होने के बावजूद अधिक परिवारों तक गैस पहुंचाई जा सकेगी।

आयात पर बढ़ा दबाव

देश में एलपीजी आयात की स्थिति फिलहाल चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वर्तमान में, गल्फ़ देशों से नई खेपें नहीं आ रही हैं। पिछले सप्ताह लगभग 92,700 टन गैस दो जहाजों के माध्यम से पहुंची, जो पूरे देश की एक दिन की खपत के बराबर है। वहीं, वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए आपूर्ति फिर से शुरू होने से उपलब्ध सीमित स्टॉक पर और दबाव पड़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने हाल ही में कई बार कहा कि देश में एलपीजी की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना

कम मात्रा वाले सिलेंडरों की कीमत कैसे तय होगी

अगर सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम करने का निर्णय लागू किया गया तो इसकी कीमत अनुपात के आधार पर तय की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सिलेंडरों पर विशेष स्टिकर लगाया जाएगा ताकि स्पष्ट हो कि इसमें कम मात्रा की गैस है। इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स को अपनी आंतरिक प्रणालियों में बदलाव करना होगा और आवश्यक नियामक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कंपनियों की चिंताएं और संभावित विरोध

इस योजना को लेकर संबंधित कंपनियों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका मानना है कि अचानक सिलेंडरों के वजन में कमी से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है। इसके चलते जनता में असंतोष और विरोध की भावना पैदा होने की संभावना है। विशेष रूप से उन राज्यों में, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कंपनियों के अनुसार, यदि अगले महीने स्थिति और बिगड़ती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

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