
उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बड़ा ऐलान करते हुए राज्य की करीब 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत दिया है। यह घोषणा अलीगढ़ में आयोजित पार्टी की एक अहम समीक्षा बैठक के दौरान की गई।
बैठक में प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली खान ने साफ तौर पर कहा कि पार्टी सिर्फ चुनावी औपचारिकता निभाने के लिए मैदान में नहीं उतरेगी, बल्कि जीत के लक्ष्य के साथ पूरी ताकत झोंकेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों की पहचान अभी से शुरू करें और संगठन को मजबूत करने में जुट जाएं।
इस बैठक में संगठन के भीतर अनुशासन और जवाबदेही को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया। शौकत अली खान ने स्पष्ट कहा कि जो पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभा रहे हैं, उन्हें पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अब केवल नाम के लिए पदाधिकारी बने रहना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जमीनी स्तर पर सक्रियता अनिवार्य होगी।
बैठक के दौरान संगठन की कमजोरियों पर भी खुलकर चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष ने स्वीकार किया कि कई क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ अभी कमजोर है, जिसे मजबूत करने के लिए बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करना होगा। उन्होंने नियमित बैठकों, स्थानीय मुद्दों पर सक्रियता और जनता के बीच सीधा संवाद बढ़ाने पर जोर दिया।
मीडिया से बातचीत में शौकत अली खान ने मेरठ एनकाउंटर को लेकर अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि किसी भी तरह के फर्जी एनकाउंटर को स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करने और न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने की बात कही।
बैठक के बाद एक और मुद्दा चर्चा में रहा, जब उनसे युवा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिया, “मैं क्या बूढ़ा हूं?” उनके इस बयान ने पार्टी के अंदर चल रही खींचतान को और हवा दे दी है।
गौरतलब है कि असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली AIMIM अब उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवाल और अंदरूनी असंतोष पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं।
अलीगढ़ की इस बैठक ने यह संकेत दे दिया है कि AIMIM 2027 के चुनाव को लेकर पूरी तरह गंभीर है। अब देखना होगा कि पार्टी अपनी रणनीति को जमीन पर कितना उतार पाती है और चुनावी मैदान में कितना प्रभाव छोड़ती है।