भारत में गरीबी घटी, लेकिन मुश्किलें क्यों नहीं? 23 करोड़ लोग अब भी बुनियादी सुविधाओं से दूर

भारत में गरीबी को लेकर सामने आए नए आंकड़े एक तरफ बड़ी तस्वीर में सुधार दिखाते हैं, तो दूसरी तरफ कई गंभीर सवाल भी खड़े करते हैं। गरीबी की दर में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है और करोड़ों लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। लेकिन सवाल यह है कि गरीबी रेखा से ऊपर आने के बाद क्या लोगों की जिंदगी वास्तव में बेहतर हो गई है?
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के बहुआयामी गरीबी सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करोड़ों लोग अभी भी साफ पानी, स्वच्छता, बेहतर आवास और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। यही वजह है कि गरीबी घटने के बावजूद आम परिवारों की आर्थिक असुरक्षा का सवाल बना हुआ है।
गरीबी घटने के आंकड़े क्या कहते हैं?
वर्ल्ड बैंक की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2011-12 में भारत की 57.7 प्रतिशत आबादी 4.20 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा से नीचे थी। 2023-24 में यह आंकड़ा घटकर 16.1 प्रतिशत रह गया।
वहीं, 3 डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर 2022-23 में भारत में चरम गरीबी करीब 5.3 प्रतिशत रह गई। नीति आयोग के आंकड़ों में भी बहुआयामी गरीबी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
यानी आंकड़ों के स्तर पर भारत ने गरीबी कम करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
गरीबी रेखा पार करना ही खुशहाली नहीं
यहीं से असली सवाल शुरू होता है। किसी व्यक्ति की आय अगर गरीबी रेखा से थोड़ी ऊपर चली जाए तो वह तकनीकी रूप से गरीब नहीं रह जाता, लेकिन उसकी आर्थिक स्थिति जरूरी नहीं कि मजबूत हो जाए।
अगर किसी परिवार की आय सीमित है और इसी दौरान भोजन, शिक्षा, इलाज, किराया और ईंधन की लागत बढ़ रही है, तो गरीबी रेखा पार करने के बावजूद परिवार आर्थिक दबाव में रह सकता है।
यही वजह है कि आय-आधारित गरीबी और जीवन स्तर की गरीबी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कमाई बढ़ी, लेकिन खर्च का दबाव भी बढ़ा
भारत में रोजगार से जुड़े कुछ संकेतकों में सुधार हुआ है। वर्कर-पॉपुलेशन रेश्यो भी बढ़ा है। लेकिन चुनौती सिर्फ रोजगार मिलने की नहीं, बल्कि स्थिर और पर्याप्त आय वाले रोजगार की है।
नियमित वेतन पाने वाले और स्वरोजगार करने वाले कई परिवारों के सामने महंगाई बड़ी चुनौती है। खाने-पीने की चीजों, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास पर खर्च बढ़ने से कम आय वाले परिवारों की बचत सीमित रहती है।
ऐसे परिवारों के लिए अचानक बीमारी, नौकरी जाने या आय रुकने जैसी स्थिति फिर से आर्थिक संकट पैदा कर सकती है।

असंगठित क्षेत्र सबसे बड़ी चुनौती
भारत के रोजगार बाजार में असंगठित क्षेत्र की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है। करोड़ों श्रमिक ऐसे कामों पर निर्भर हैं जहां नौकरी की स्थिरता, पेंशन, स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा सीमित हो सकती है।
ई-श्रम से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि पंजीकृत असंगठित श्रमिकों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनकी मासिक आय काफी कम है।
इसका मतलब यह है कि कोई व्यक्ति गरीबी रेखा से थोड़ा ऊपर होने के बावजूद आर्थिक रूप से बेहद असुरक्षित हो सकता है।
घर, पानी और शौचालय की कमी क्यों महत्वपूर्ण है?
गरीबी सिर्फ आय की कमी नहीं है। किसी परिवार के पास पर्याप्त भोजन हो लेकिन साफ पानी, शौचालय, सुरक्षित घर, बिजली या बेहतर स्वास्थ्य सुविधा न हो, तो उसका जीवन स्तर कमजोर ही रहेगा।
यही कारण है कि बहुआयामी गरीबी को समझना जरूरी है। इसमें आय के अलावा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता, बिजली और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल किया जाता है।
भारत ने इन क्षेत्रों में काफी प्रगति की है, लेकिन करोड़ों परिवारों के सामने अभी भी कई तरह के अभाव मौजूद हैं।
गरीबी घटने के बावजूद मुश्किलें क्यों बनी हुई हैं?
इसका सबसे सीधा जवाब है—गरीबी से बाहर निकलना और आर्थिक रूप से सुरक्षित होना दो अलग-अलग बातें हैं।
एक परिवार गरीबी रेखा पार कर सकता है, लेकिन अगर उसकी आय अस्थिर है, खर्च लगातार बढ़ रहा है और उसके पास बचत या सामाजिक सुरक्षा नहीं है, तो वह किसी भी आर्थिक झटके से दोबारा गरीबी में जा सकता है।
इसलिए भारत के सामने अगली चुनौती सिर्फ गरीबी का प्रतिशत घटाना नहीं, बल्कि ऐसे रोजगार और आय के अवसर पैदा करना है जो परिवारों को स्थायी आर्थिक सुरक्षा दे सकें।
असली चुनौती अब जीवन स्तर सुधारने की
भारत में गरीबी कम होने के आंकड़े निश्चित रूप से महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं। करोड़ों लोगों का बहुआयामी गरीबी से बाहर आना एक बड़ा बदलाव है। लेकिन इसके साथ यह भी देखना होगा कि इन परिवारों की आय कितनी स्थिर है, बच्चों को कैसी शिक्षा मिल रही है, इलाज कितना सुलभ है और उनके पास भविष्य के संकट से निपटने के लिए कितनी बचत है।
गरीबी की असली जीत सिर्फ गरीबी रेखा पार करने में नहीं, बल्कि ऐसी जिंदगी बनाने में है जहां परिवार दोबारा गरीबी में लौटने के डर के बिना सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जी सके।
