रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के बोनस का ऐलान, कैबिनेट ने दी मंजूरी; जानिए कितने रुपये मिलें

रेलवे के लाखों कर्मचारियों के लिए त्योहारों से पहले बड़ी राहत की खबर सामने आई है। 14 अक्टूबर 2026 को हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में नॉन-गजेटेड रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिन के वेतन के बराबर प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस को मंजूरी दी गई है।
यह बोनस हर साल रेलवे कर्मचारियों को उनकी उत्पादकता और प्रदर्शन से जुड़े प्रावधानों के तहत दिया जाता है।
78 दिन के बोनस की गणना कैसे होती है?
मौजूदा व्यवस्था के तहत रेलवे कर्मचारियों के 78 दिन के बोनस की गणना 7,000 रुपये की न्यूनतम वेतन सीमा के आधार पर की जाती है। इसी आधार पर बोनस की राशि करीब 17,951 रुपये बैठती है।
यह न्यूनतम वेतन सीमा वर्ष 2014-15 से नहीं बदली है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन लंबे समय से इसमें बदलाव की मांग कर रहे हैं।
18 हजार रुपये की लिमिट की मांग
रेलवे कर्मचारियों के कई संगठनों ने सरकार से बोनस की गणना के लिए न्यूनतम वेतन सीमा को 7,000 रुपये से बढ़ाकर कम से कम 18,000 रुपये करने की मांग की थी।
अगर 18,000 रुपये की सीमा पर 78 दिन के बोनस की गणना की जाती, तो कर्मचारियों को करीब 46,184 रुपये का बोनस मिल सकता था। यानी मौजूदा गणना की तुलना में राशि काफी अधिक होती।

कर्मचारियों की मांग अभी क्यों अहम?
रेलवे कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पिछले 11 वर्षों से बोनस कैलकुलेशन में इस्तेमाल होने वाली न्यूनतम वेतन सीमा में बदलाव नहीं हुआ है। इस दौरान वेतन, महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
ऐसे में कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि बोनस की गणना के लिए मौजूदा वेतन सीमा को भी वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप संशोधित किया जाए।
त्योहारों से पहले मिलेगा आर्थिक सहारा
रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब देश में त्योहारी सीजन चल रहा है। लाखों कर्मचारियों के लिए यह अतिरिक्त भुगतान परिवार के खर्च, खरीदारी और दूसरी जरूरतों में आर्थिक मददगार साबित हो सकता है।
हालांकि, कर्मचारियों के लिए बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या बोनस की गणना की 7,000 रुपये वाली सीमा में भी बदलाव किया जाएगा या नहीं।
78 दिन का बोनस क्यों महत्वपूर्ण है?
रेलवे देश के सबसे बड़े नियोक्ताओं में शामिल है और लाखों कर्मचारी यात्री तथा माल परिवहन व्यवस्था को सुचारू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बोनस का सीधा असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
अब कर्मचारियों की नजर इस बात पर है कि 78 दिन के बोनस के साथ सरकार न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाने की उनकी पुरानी मांग पर भी कोई फैसला करती है या नहीं।
