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विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली से शेयर बाजार में गिरावट निवेशक हुए परेशान

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फरवरी के आखिर में ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात शुरू होने के बाद भारतीय शेयर बाजार पर गहरा असर देखने को मिला है। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FIIs ने भारतीय इक्विटी से करीब 19 अरब डॉलर यानी 1.78 लाख करोड़ रुपये की भारी निकासी कर दी है। इस बड़े पैमाने पर बिकवाली के चलते Nifty 50 अपने 52 हफ्तों के उच्च स्तर से 9 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है। जो बाजार कभी वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद हुआ करता था वह अब तेजी से “नो गो जोन” में बदलता नजर आ रहा है। ऊर्जा कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितताओं ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर दिया है।

युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता

ग्लोबल स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से भारत के लिए आर्थिक दबाव बढ़ गया है। इससे चालू खाता घाटा बढ़ने और महंगाई तेज होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते Reserve Bank of India पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। निवेशकों को डर है कि इससे आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ सकती है और बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है।

विदेशी निवेशकों के लिए बदला गणित और कम हुआ आकर्षण

विदेशी निवेशकों के लिए अब भारतीय बाजार का गणित पहले जैसा फायदेमंद नहीं रह गया है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये की कमजोरी ने निवेश पर मिलने वाले रिटर्न को प्रभावित किया है। डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना निवेशकों के मुनाफे को और घटा रहा है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे अन्य उभरते बाजार ज्यादा आकर्षक नजर आ रहे हैं जहां बेहतर रिटर्न की संभावना है। भारत में टैक्स नियमों में बदलाव जैसे शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स में बढ़ोतरी ने भी निवेशकों के लिए लागत बढ़ा दी है जिससे वे अन्य विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।

कमाई पर दबाव और भविष्य को लेकर अनिश्चितता

मौजूदा हालात में सबसे बड़ा डर कंपनियों की कमाई को लेकर है। युद्ध और सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण मैन्युफैक्चरिंग और FMCG सेक्टर पर लागत का दबाव बढ़ने की आशंका है। इससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है और ग्रोथ धीमी हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले कुछ सालों में डॉलर के हिसाब से बाजार ने लगभग जीरो रिटर्न दिया है जिससे निवेशकों का भरोसा और कमजोर हुआ है। अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है और निवेशकों की सतर्कता बनी रहेगी।

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