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SP MP Controversy: Rana Sanga पर टिप्पणी से गरमाया माहौल, Karni Sena का विरोध, SP कार्यालय में हंगामा
SP MP Controversy: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद रामजी लाल सुमन (Ramji Lal Suman) के बयान पर जबरदस्त हंगामा हुआ। करणी सेना (Karni Sena) ने रविवार को एसपी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और सांसद का पुतला जलाया। इसके साथ ही करणी सेना ने रामजी लाल सुमन का चेहरा काला करने और जूते मारने वाले को 5 लाख रुपये का इनाम देने का ऐलान भी किया।
दरअसल, 21 मार्च को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने मेवाड़ के राजा राणा सांगा (Rana Sanga) को ‘गद्दार’ कह दिया था। इस बयान के बाद करणी सेना समेत कई संगठनों और नेताओं ने उनकी कड़ी आलोचना की। विरोध के चलते भोपाल में तनावपूर्ण स्थिति बन गई।
करणी सेना का विरोध और इनाम की घोषणा
रामजी लाल सुमन के विवादित बयान के बाद करणी सेना ने पूरे मध्य प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया। भोपाल स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य कार्यालय के बाहर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और सांसद का पुतला फूंका।
करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा,
“रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा जैसे महान वीर योद्धा का अपमान किया है। हम उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाएंगे। जो भी व्यक्ति उनका चेहरा काला करेगा और जूतों से मारेगा, उसे 5 लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा।”
हालांकि, इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि एसपी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर और बैनर भी फाड़े गए। पुलिस ने इस आरोप को नकार दिया और कहा कि इस मामले में अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
#WATCH | Lucknow, UP: On Samajwadi Party MP Ramji Lal Suman’s statement, SP Chief Akhilesh Yadav says, “Ramji Lal Suman said what he said because everyone is turning the pages of history… The leaders of BJP want to debate about Aurangzeb. So, Ramji Lal Suman also turned a page… pic.twitter.com/rY9i3SQkGB
— ANI (@ANI) March 23, 2025
रामजी लाल सुमन का बयान: ‘बाबर को राणा सांगा ने बुलाया था’
रामजी लाल सुमन ने राज्यसभा में कहा था कि मुगल शासक बाबर (Babur) को भारत में राणा सांगा ने आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा,
“यह ऐतिहासिक तथ्य है कि राणा सांगा ने बाबर को बुलाया था। मैं किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं रखता।”
सुमन ने आगे कहा,
“हर बार यह कहा जाता है कि बाबर भारतीय मुसलमानों के डीएनए में है। लेकिन भारतीय मुसलमान पैगंबर मुहम्मद साहब (Prophet Muhammad) को अपना आदर्श मानते हैं और सूफी परंपरा का पालन करते हैं।”
सुमन के इस बयान ने करणी सेना को भड़का दिया और पूरे देश में विरोध की लहर दौड़ गई।
भाजपा और कांग्रेस ने किया विरोध, अखिलेश यादव ने दी सफाई
रामजी लाल सुमन के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी (Diya Kumari) और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत (Gajendra Singh Shekhawat) ने सुमन के बयान की निंदा की।
दिया कुमारी ने कहा,
“राणा सांगा जैसे महान योद्धा को गद्दार कहना शर्मनाक है। समाजवादी पार्टी को अपने सांसद के बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”
वहीं, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सांसद रामजी लाल सुमन का बचाव किया। उन्होंने कहा,
“बीजेपी वाले जब औरंगजेब पर बहस करना चाहते हैं, तो रामजी लाल सुमन ने भी इतिहास का एक पन्ना पलटा, जहां ऐसा लिखा गया था।”
इतिहासकारों की राय: क्या बाबर को बुलाया गया था?
रामजी लाल सुमन के बयान पर इतिहासकारों ने भी प्रतिक्रिया दी। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि राणा सांगा ने बाबर को नहीं बुलाया था, बल्कि इब्राहिम लोदी के खिलाफ युद्ध में सहयोग मांगा था।
इतिहासकार प्रो. सुरेश जोशी ने कहा,
“ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य है कि राणा सांगा ने बाबर से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें भारत बुलाने का कोई साक्ष्य नहीं है। बाबर ने भारत पर आक्रमण कर पानीपत की पहली लड़ाई लड़ी थी।”
वहीं, अन्य इतिहासकारों का मानना है कि बाबर का आना उसकी सैन्य रणनीति का हिस्सा था और इसमें राणा सांगा की कोई भूमिका नहीं थी।
करणी सेना का विरोध तेज, कानून व्यवस्था पर सवाल
रामजी लाल सुमन के बयान के बाद करणी सेना ने पूरे मध्य प्रदेश में विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। भोपाल में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस की सतर्कता रही, लेकिन तनाव का माहौल बना रहा।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। फिलहाल रामजी लाल सुमन के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है, लेकिन करणी सेना की धमकी ने मामले को और गरमा दिया है।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं
रामजी लाल सुमन के बयान को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
एक यूजर ने लिखा,
“इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करना बंद कीजिए। राणा सांगा भारत के वीर योद्धा थे, उन्हें गद्दार कहना शर्मनाक है।”
वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा,
“रामजी लाल सुमन का बयान बेहद आपत्तिजनक है। इस पर कार्रवाई होनी चाहिए।”
रामजी लाल सुमन का बयान न केवल राजनीतिक विवाद का कारण बना, बल्कि ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर भी बहस छेड़ गया है। करणी सेना का विरोध प्रदर्शन और इनाम की घोषणा से मामला और गरमा गया है।
इस पूरे प्रकरण में समाजवादी पार्टी की छवि को भी झटका लगा है, जबकि करणी सेना ने रामजी लाल सुमन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस विवाद ने एक बार फिर इतिहास को राजनीतिक रंग दे दिया है।
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ओवरटेक विवाद में थार सवारों का हमला, बस स्टाफ पर चाकू और फायरिंग
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में एक मामूली ओवरटेक विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया और चार लोगों की जान पर बन आई। भवारना थाना क्षेत्र के बैरघट्टा में बुधवार रात बीड़ से दिल्ली जा रही एक निजी वॉल्वो बस को रास्ता न देने पर महिंद्रा थार सवार बदमाशों ने हमला कर दिया। यह घटना न केवल सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है बल्कि यह भी दिखाती है कि छोटी सी बहस किस तरह जानलेवा बन सकती है। हमलावरों ने बस को जबरन रुकवाया और चालक परिचालक समेत अन्य लोगों पर चाकू से हमला कर दिया। इतना ही नहीं दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग भी की गई जिससे इलाके में अफरा तफरी मच गई।
चार लोग गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्ती
इस हमले में वॉल्वो बस के चालक सुंदर सिंह और राज कुमार के साथ विजय कुमार और परिचालक प्रवेश कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों को पहले थुरल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए कुछ को टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। घायलों के बयान के अनुसार हमलावर बेहद आक्रामक थे और उन्होंने बिना किसी चेतावनी के हमला कर दिया। यह घटना यात्रियों और आम लोगों के लिए बेहद डरावनी साबित हुई क्योंकि सड़क पर चल रही बस को इस तरह निशाना बनाना एक गंभीर अपराध माना जा रहा है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और तुरंत इलाके में घेराबंदी शुरू कर दी। पुलिस ने बिना नंबर की काली महिंद्रा थार को कब्जे में लिया और तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान पंजाब के पठानकोट निवासी बलविंदर सिंह और अलीश तथा होशियारपुर निवासी निशान पाल के रूप में हुई है। पुलिस ने मौके से चाकू और पिस्टल भी बरामद किए हैं जिनका इस्तेमाल हमले और फायरिंग में किया गया था। इसके अलावा वाहन की तलाशी के दौरान नशीला पदार्थ भी बरामद हुआ जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।
गंभीर धाराओं में केस दर्ज, जांच जारी
कांगड़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है जिसमें हत्या के प्रयास और शस्त्र अधिनियम शामिल हैं। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि आरोपियों के पास अवैध हथियार और नशीले पदार्थ कहां से आए और क्या उनका कोई पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पुलिस लगातार गश्त कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। यह मामला एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि सड़क पर बढ़ती आक्रामकता और कानून का डर खत्म होने से समाज में कितनी बड़ी समस्या खड़ी हो रही है।
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एकता की बैठक में घमासान, बीजेडी कार्यकर्ताओं की हाथापाई से मचा सियासी तूफान
ओडिशा के पुरी जिले के निमापड़ा विधानसभा क्षेत्र में बीजू जनता दल की एक अहम बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब पार्टी के दो गुटों के बीच तीखी झड़प हो गई। यह बैठक बेगुनिया इलाके के जगुलेई पीठ में आयोजित की गई थी जिसका मकसद संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बढ़ाना था। शुरुआत में माहौल सामान्य था और नेता कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दे रहे थे। लेकिन अचानक किसी मुद्दे को लेकर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई। इस घटना ने पार्टी के अंदर चल रहे तनाव को खुलकर सामने ला दिया है।
धक्का-मुक्की और हाथापाई से बिगड़े हालात
जैसे ही बहस बढ़ी दोनों गुटों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। कुछ ही पलों में यह विवाद हाथापाई में बदल गया जिससे बैठक स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद वरिष्ठ नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं ने किसी तरह बीच-बचाव कर स्थिति को नियंत्रित किया। हालांकि इस दौरान कार्यक्रम पूरी तरह बाधित हो गया और बैठक का उद्देश्य अधूरा रह गया। इस घटना ने यह साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद काफी गहरे हो चुके हैं जो कभी भी बड़े विवाद का रूप ले सकते हैं।

दिलीप नायक की गैरमौजूदगी बना विवाद का कारण
सूत्रों के मुताबिक यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बीजेडी के पूर्व विधायक प्रत्याशी दिलीप नायक जेल में हैं और उनकी गैरमौजूदगी में संगठन को संभालने की कोशिश की जा रही है। इसी दौरान सुब्रत छतोई लगातार बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नेतृत्व को लेकर अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी और नेतृत्व को लेकर असहमति इस झड़प की बड़ी वजह मानी जा रही है। यह घटना इस बात का संकेत है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
पार्टी की एकता पर उठे सवाल
जगुलेई पीठ में हुई इस घटना के बाद बीजेडी की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस बैठक का मकसद संगठन को मजबूत करना था वही बैठक पार्टी के भीतर की कमजोरियों को उजागर कर गई। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अगर समय रहते इन मतभेदों को दूर नहीं किया गया तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है लेकिन यह घटना पार्टी नेतृत्व के लिए एक चेतावनी बनकर सामने आई है। आने वाले समय में सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि संगठन को एकजुट रखते हुए कार्यकर्ताओं के बीच भरोसा और संतुलन कायम किया जाए।
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