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RBI ने जारी किए नए नियम, मृतक खाताधारकों के पैसे और लॉकर का दावा 15 दिन में निपटाना होगा

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RBI ने जारी किए नए नियम, मृतक खाताधारकों के पैसे और लॉकर का दावा 15 दिन में निपटाना होगा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को नए नियम जारी किए हैं, जिनके तहत मृतक ग्राहकों के बैंक खाते और लॉकर से जुड़े दावों को 15 दिनों के भीतर निपटाना अनिवार्य होगा। अगर बैंक में देरी होती है, तो नामांकित व्यक्ति को भी मुआवजा दिया जाएगा। यह नियम मृतक ग्राहकों के दावों को तेज़ और समान रूप से निपटाने के उद्देश्य से लाए गए हैं।

नियमों का दायरा और उद्देश्य

ये नियम मृतक ग्राहकों के जमा खातों, सुरक्षित लॉकर और सेफकीपिंग दावों पर लागू होंगे। यदि खाते में नामांकन या सर्वाइवर्स क्लॉज है, तो बैंक को बकाया राशि नामांकित व्यक्ति या उत्तराधिकारी को भुगतान करना होगा। छोटे दावों के लिए, जैसे सहकारी बैंकों में 5 लाख रुपये तक और अन्य बैंकों में 15 लाख रुपये तक, बैंक को सरल प्रक्रिया अपनानी होगी। बड़े दावों के लिए बैंक सक्सेशन सर्टिफिकेट या कानूनी दस्तावेज मांग सकता है।

RBI ने जारी किए नए नियम, मृतक खाताधारकों के पैसे और लॉकर का दावा 15 दिन में निपटाना होगा

लॉकर और सेफ के लिए विशेष नियम

मृतक के लॉकर या सेफ से जुड़े दावों के लिए भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। बैंक को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर दावों का निपटान करना होगा। इसके साथ ही बैंक को दावेदार से परामर्श कर लॉकर का इन्वेंटरी का दिन तय करना होगा। इससे ग्राहकों को पारदर्शिता और समयबद्ध सेवा सुनिश्चित होगी।

देरी होने पर बैंक की जिम्मेदारी

अगर बैंक 15 दिनों में दावे का निपटान नहीं करता है, तो जमा खातों के मामले में बैंक को देरी का कारण बताना होगा। साथ ही देरी की अवधि के लिए वर्तमान बैंक ब्याज दर + 4 प्रतिशत प्रति वर्ष के हिसाब से ब्याज देना होगा। लॉकर या सेफ के मामलों में, देरी होने पर बैंक को ₹5,000 प्रतिदिन मुआवजा देना होगा। यह नियम ग्राहकों और उनके उत्तराधिकारियों के हित की सुरक्षा करते हैं।

ग्राहकों के लिए लाभ और पारदर्शिता

RBI के इन नए नियमों से मृतक ग्राहकों के दावों का निपटान तेज़ और सरल होगा। इससे नामांकित व्यक्ति को समय पर धन मिलेगा और बैंकों द्वारा देरी की स्थिति में मुआवजा भी सुनिश्चित होगा। नियम दस्तावेज़ीकरण को मानकीकृत और सरल बनाते हैं, जिससे ग्राहकों को बेहतर सेवा मिलेगी। मार्च 2026 तक इन नियमों को प्रभावी किया जाएगा।

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FMCG Price Hike 2026: FMCG उत्पादों की कीमतों में 2026 में संभावित वृद्धि, आम जनता के लिए चेतावनी

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FMCG Price Hike 2026: FMCG उत्पादों की कीमतों में 2026 में संभावित वृद्धि, आम जनता के लिए चेतावनी

FMCG Price Hike 2026: देश में केंद्रीय सरकार द्वारा दिए गए GST राहत के फायदे धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। सितंबर 2025 में सरकार ने GST दरों में कटौती की थी, जिससे रोजमर्रा के FMCG उत्पादों की कीमतें घट गई थीं और उपभोक्ताओं को राहत मिली थी। हालांकि अब स्थिति बदलती नजर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार कई FMCG कंपनियां अपने उत्पादों की कीमतों में 5 प्रतिशत तक वृद्धि करने की योजना बना रही हैं, जिससे महंगाई के दबाव में और इजाफा हो सकता है।

कंपनियों ने कीमत बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?

कंपनियों ने GST दरों में कटौती के बाद कीमतों को कुछ समय तक स्थिर रखा। लेकिन अब कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि और रुपये की कमजोरी ने कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल दिया है। वितरकों का कहना है कि इस तिमाही से रोजमर्रा के उत्पाद जैसे डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट और नूडल्स बाजार में नई और बढ़ी कीमतों के साथ आएंगे, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इस बदलाव के कारण अब कंपनियों के लिए कीमत बढ़ाना जरूरी हो गया है।

FMCG Price Hike 2026: FMCG उत्पादों की कीमतों में 2026 में संभावित वृद्धि, आम जनता के लिए चेतावनी

कीमतों में वृद्धि की योजना और कंपनियों के बयान

इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, FMCG कंपनियां लागत दबाव के बीच कीमतें बढ़ाने के कदम उठा रही हैं। डाबर इंडिया के CEO मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी वर्तमान चौथी तिमाही में लगभग 2 प्रतिशत कीमत बढ़ा रही है। डाबर जूस, हेयर ऑयल और कई अन्य FMCG उत्पाद बनाती है। उन्होंने कहा कि पहले एंटी-प्रॉफिटियरिंग नियमों के कारण कीमत बढ़ाने का कदम टाला गया था, लेकिन अब मौजूदा परिस्थितियां इसे आवश्यक बना रही हैं।

होम और पर्सनल केयर उत्पाद भी महंगे होंगे

साबुन, शैम्पू और डिटर्जेंट जैसे होम और पर्सनल केयर उत्पाद भी महंगे होने वाले हैं। इन उत्पादों के निर्माण में क्रूड ऑयल से बने कच्चे माल पर भारी निर्भरता होती है, जिससे लागत बढ़ने पर कीमतों में सीधा असर पड़ता है। हिंदुस्तान यूनिलीवर के CFO निरंजन गुप्ता ने हाल ही में संकेत दिया कि होम केयर उत्पादों की कीमतें जल्द बढ़ाई जाएंगी। कुछ उत्पाद पहले ही नए पैकेजिंग और कीमतों के साथ बाजार में आ चुके हैं, जबकि अन्य उत्पादों की कीमतों में भी शीघ्र बदलाव होगा। हिंदुस्तान यूनिलीवर सर्व एक्सेल, रिन और कई लोकप्रिय FMCG उत्पाद बनाती है।

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Financial Planning Tips: कम आय वाले लोग भी 50-30-20 नियम से भविष्य में करोड़पति बन सकते हैं जानिए कैसे

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Financial Planning Tips: कम आय वाले लोग भी 50-30-20 नियम से भविष्य में करोड़पति बन सकते हैं जानिए कैसे

वित्तीय सुरक्षा और निवेश केवल उच्च आय वालों के लिए नहीं बल्कि हर व्यक्ति के लिए जरूरी हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि उनकी आय कम है इसलिए बचत या निवेश करना संभव नहीं है। लेकिन सच यह है कि चाहे आपकी आय कम हो या अधिक, भविष्य के लिए तैयारी आज ही शुरू करनी चाहिए। यदि आपकी आय सीमित है तब भी हर महीने थोड़ी राशि अलग रखना लाभकारी साबित हो सकता है। नियमित और अनुशासित निवेश ही धीरे-धीरे एक मजबूत फंड तैयार कर सकता है। छोटी बचत भी समय के साथ बड़ी संपत्ति में बदल सकती है।

50-30-20 नियम से शुरू करें निवेश यात्रा

एक आसान तरीका निवेश शुरू करने का 50-30-20 नियम अपनाना है। यह नियम आपके मासिक आय को तीन हिस्सों में विभाजित करता है। 50 प्रतिशत आवश्यक खर्चों के लिए, 30 प्रतिशत व्यक्तिगत जरूरतों के लिए और 20 प्रतिशत निवेश के लिए तय किया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी मासिक आय ₹10,000 है तो ₹5,000 किराया, राशन, बिजली और अन्य जरूरी खर्चों के लिए इस्तेमाल करें। इसके बाद ₹3,000 व्यक्तिगत खर्चों जैसे यात्रा, खरीदारी और मनोरंजन के लिए अलग रखें। सबसे महत्वपूर्ण है ₹2,000 निवेश के लिए बचाना।

Financial Planning Tips: कम आय वाले लोग भी 50-30-20 नियम से भविष्य में करोड़पति बन सकते हैं जानिए कैसे

निवेश राशि में लचीलापन रखें

हर व्यक्ति की जरूरतें अलग होती हैं इसलिए निवेश की राशि थोड़ी बदल सकती है। फिर भी यह जरूरी है कि कम से कम ₹2,000 हर महीने निवेश के लिए रखें। यदि आप अपने खर्चों में कटौती कर पाते हैं तो निवेश राशि बढ़ाना भविष्य में और अधिक फायदेमंद होगा। छोटी आय वालों के लिए भी यह नियम काफी उपयोगी है। नियमित रूप से छोटी बचत और सुरक्षित निवेश से समय के साथ एक मजबूत वित्तीय आधार तैयार किया जा सकता है।

सुरक्षित निवेश विकल्प अपनाएं

यदि निवेश राशि कम है और आप जोखिम नहीं लेना चाहते तो बैंक एफडी, पोस्ट ऑफिस स्कीम और पीपीएफ जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं। ये विकल्प आपके पैसे को सुरक्षित रखते हुए अच्छा रिटर्न भी देते हैं। इसके अलावा, लंबे समय के लिए निवेश करते समय कम्पाउंडिंग का फायदा उठाना आसान होता है। सही योजना और अनुशासन के साथ निवेश शुरू करने से भविष्य में वित्तीय स्वतंत्रता हासिल की जा सकती है।

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Tata Steel Q3 Results: रेलवे कर्मचारी की तत्परता से बची बड़ी दुर्घटना, आग पर तुरंत काबू पाया गया

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Tata Steel Q3 Results: रेलवे कर्मचारी की तत्परता से बची बड़ी दुर्घटना, आग पर तुरंत काबू पाया गया

Tata Steel Q3 Results: टाटा ग्रुप की प्रमुख कंपनी टाटा स्टील ने वित्तीय वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) के नतीजे शुक्रवार, 6 फरवरी को जारी किए। इस तिमाही में कंपनी ने पिछले साल की इसी तिमाही में 326.64 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट की तुलना में 723 प्रतिशत अधिक मुनाफा कमाकर सभी को हैरान कर दिया। इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू भी सालाना आधार पर 6 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 56,646.05 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह प्रदर्शन टाटा स्टील की बढ़ती उत्पादकता और बाजार में मजबूती का संकेत है।

EBITDA मार्जिन में सुधार और उत्पादन में बढ़ोतरी

टाटा स्टील का नेट प्रॉफिट मार्जिन इस तिमाही में 4.79 प्रतिशत रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के 0.55 प्रतिशत से काफी बेहतर है। ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन भी 14.58 प्रतिशत तक बढ़ गया। फॉरेक्स मूवमेंट को एडजस्ट करने के बाद कंसोलिडेटेड EBITDA 8276 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 7155 करोड़ रुपये से अधिक है। कंपनी के प्रोडक्शन और डिलीवरी में भी क्रमशः 12 और 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इस तिमाही में 6.04 मिलियन टन की डिलीवरी के साथ पहली बार 6 मिलियन टन का आंकड़ा पार किया गया है।

Tata Steel Q3 Results: रेलवे कर्मचारी की तत्परता से बची बड़ी दुर्घटना, आग पर तुरंत काबू पाया गया

CEO टीवी नरेंद्रन की बयानबाजी और विदेशी ऑपरेशन की चुनौतियां

टाटा स्टील के CEO और MD टीवी नरेंद्रन ने कहा कि कंपनी ने कैपेसिटी बढ़ाने और फोकस्ड डाउनस्ट्रीम स्ट्रैटेजी की मदद से चुनिंदा क्षेत्रों में अपनी मार्केट लीडरशिप को मजबूत किया है। उन्होंने ऑटोमोटिव सेक्टर में साल-दर-साल 20 प्रतिशत की वृद्धि और रिटेल वर्टिकल में बेहतर गति का भी जिक्र किया। हालांकि, UK और नीदरलैंड्स में कंपनी के ऑपरेशंस में डिलीवरी पिछली तिमाही की तुलना में कम रही क्योंकि वहां मांग धीमी बनी रही। नीदरलैंड्स में इस तिमाही का रेवेन्यू 1.35 बिलियन यूरो रहा, जबकि EBITDA 55 मिलियन यूरो था। UK में रेवेन्यू 468 मिलियन यूरो रहा, लेकिन EBITDA में 63 मिलियन यूरो का नुकसान हुआ।

घाटा कम, लिक्विडिटी मजबूत, शेयरों में मामूली गिरावट

कंपनी का कंसोलिडेटेड घाटा इस तिमाही में घटकर 81,834 करोड़ रुपये हो गया है। टाटा स्टील की लिक्विडिटी स्थिति भी मजबूत रही और 44,062 करोड़ रुपये दर्ज की गई। शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद जब कंपनी ने अपने नतीजे घोषित किए, तब उसके शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर 0.6 प्रतिशत गिरकर 196.51 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए। अगले दिनों बाजार में टाटा स्टील के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है।

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