मनोरंजन
‘द केरल स्टोरी 2’ पर सियासी संग्राम, हजारों धर्मांतरण का दावा झूठा? शशि थरूर ने उठाए बड़े सवाल
भारतीय राजनीति और सिनेमा के गलियारों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। आगामी फिल्म “द केरला स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड” की रिलीज से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर ने इसके निर्माताओं पर तीखा हमला बोला है। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत करते हुए थरूर ने आरोप लगाया कि फिल्म का दूसरा भाग भी पहले की तरह नफरत फैलाने और समाज को बांटने वाली कहानी को बढ़ावा देता है। उन्होंने कहा कि पहली फिल्म “द केरला स्टोरी” में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के जो दावे किए गए थे, उनका कोई ठोस आधार नहीं था। थरूर का कहना है कि सिनेमा को समाज में सौहार्द बढ़ाने का माध्यम होना चाहिए, न कि भय और विभाजन का वातावरण तैयार करने का।
#WATCH | Delhi | Congress MP Shashi Tharoor says, "The first film, Kerala Story, was a hate-mongering film. It lacked any foundation. They were saying that thousands of people were converted, which is not true. I think there were around 30 such cases over a number of years. Ours… pic.twitter.com/xKQmfIM7Sm
— ANI (@ANI) February 19, 2026
“आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए” – थरूर
शशि थरूर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिल्म में प्रस्तुत आंकड़े वास्तविकता से काफी दूर हैं। उनके अनुसार, हजारों लोगों के धर्मांतरण का दावा पूरी तरह गलत और अतिरंजित है। उन्होंने कहा, “सच्चाई यह है कि वर्षों में ऐसे मुश्किल से 30 मामलों की ही रिपोर्ट सामने आई है। भारत जैसे विशाल देश में कुछ अलग-थलग घटनाओं को आधार बनाकर उसे भयावह राष्ट्रीय संकट के रूप में पेश करना उचित नहीं है।” थरूर ने भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई। उन्होंने मशहूर फिल्म “अमर अकबर एंथनी” का उदाहरण देते हुए कहा कि वह फिल्म सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश देती थी, इसलिए उसे मनोरंजन कर से छूट मिली थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज के दौर में ऐसी फिल्में बनाना जरूरी हो गया है जो लोगों के मन में जहर घोलें और जिनका तथ्यों से कोई सीधा संबंध न हो।
फिल्म का पक्ष और बढ़ता विवाद
विवाद के बीच “द केरला स्टोरी 2 – गोज बियॉन्ड” 27 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। हाल ही में जारी ट्रेलर में धार्मिक धर्मांतरण और कट्टरपंथ जैसे मुद्दों को राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल की पृष्ठभूमि में दिखाया गया है। फिल्म के निर्माताओं का दावा है कि यह फिल्म लक्षित कट्टरपंथ की कठोर सच्चाई को उजागर करती है। प्रचार सामग्री में उन्होंने कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा, “उन्होंने हमारी बेटियों को निशाना बनाया और उनका भरोसा तोड़ा। इस बार हम चुप नहीं रहेंगे, कहानी और आगे जाएगी। इस बार हम सहेंगे नहीं… हम लड़ेंगे।” इस बयानबाजी ने राजनीतिक बहस को और तीखा कर दिया है। जहां समर्थक इसे सच्चाई सामने लाने वाली फिल्म बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे एकतरफा और भड़काऊ करार दे रहे हैं।
कानूनी चुनौतियां और राजनीतिक विरोध
पहली फिल्म, जिसका निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह ने किया था, 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ निर्देशन और सिनेमैटोग्राफी का पुरस्कार जीत चुकी है। लेकिन इसके सीक्वल को अब कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। केरल की छवि को लेकर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें ट्रेलर और फिल्म की प्रस्तुति पर सवाल उठाए गए हैं। अदालत ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सेंसर बोर्ड (सीबीएफसी) और फिल्म निर्माताओं को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी को तय की गई है। वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर फिल्म की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाली मनगढ़ंत कहानियों को खुली छूट देना चिंताजनक है। उन्होंने जनता से अपील की कि केरल की सौहार्दपूर्ण छवि को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों के खिलाफ एकजुट हों।