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Model Portfolio: प्रभुदास लीलाधर का मॉडल पोर्टफोलियो जारी, मार्च तक बाजार में स्थिरता संभव
Model Portfolio: भारतीय शेयर बाजार में जारी गिरावट जल्द ही थम सकती है। वित्तीय कंपनी प्रभुदास लीलाधर की पीएल कैपिटल (PL Capital) इकाई के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) के अंत तक बाजार में स्थिरता लौट सकती है। यह रिपोर्ट हाल ही में जारी ‘इंडिया स्ट्रैटेजी रिपोर्ट’ में प्रस्तुत की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अल्पावधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, लेकिन लंबे समय में इसमें मजबूती देखने को मिलेगी।
एफपीआई की वापसी की संभावना
पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के अनुसार, पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में वृद्धि के चलते विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की वापसी हो सकती है। आयकर दरों में कटौती और उपभोक्ता मांग में सुधार के कारण विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार में विश्वास फिर से बढ़ सकता है। प्रभुदास लीलाधर ने अगले 12 महीनों के लिए निफ्टी का लक्ष्य 25,689 निर्धारित किया है।
मांग और उपभोग में सुधार
रिपोर्ट में कहा गया है कि घरेलू मांग में सुधार होगा, जिसका मुख्य कारण खाद्य मुद्रास्फीति में गिरावट है। अक्टूबर 2024 में खाद्य मुद्रास्फीति 10.9% थी, जो अब घटकर 6% पर आ गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कटौती की है, जिससे अगले 3-6 महीनों में खुले बाजार परिचालन (OMO) के माध्यम से बाजार में नकदी की उपलब्धता बढ़ेगी।
इसके अलावा, बजट में करदाताओं के लिए आयकर दरों में कटौती की गई है और उन्हें 1 लाख करोड़ रुपये की राहत दी गई है, जिससे उपभोग में वृद्धि होगी। धार्मिक पर्यटन से भी अर्थव्यवस्था को लाभ होने की उम्मीद है। साथ ही, सरकार द्वारा पूंजीगत व्यय में 17% की वृद्धि की गई है, जिसमें सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) और राज्यों को भी आवंटन किया गया है।
पीएल कैपिटल का मॉडल पोर्टफोलियो
बाजार में मांग में तेजी की उम्मीद को देखते हुए, पीएल कैपिटल ने निवेशकों के लिए अपना मॉडल पोर्टफोलियो जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता से जुड़े शेयरों में पीएल कैपिटल का झुकाव अधिक है। इसका मुख्य कारण कर दरों में कटौती, मुद्रास्फीति में गिरावट और ब्याज दरों में कमी के चलते मांग में संभावित वृद्धि है। इसके अलावा, बैंकिंग और हेल्थकेयर से जुड़े शेयरों पर भी कंपनी का ध्यान केंद्रित है।
पीएल कैपिटल ने अपने पोर्टफोलियो में निम्नलिखित कंपनियों को शामिल किया है:
- सिप्ला (Cipla)
- एस्ट्रल पॉली (Astral Poly)
- मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki)
- आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank)
- कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank)
- एबीबी (ABB)
- भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (Bharat Electronics)
- इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo)
- आईटीसी (ITC)
- भारती एयरटेल (Bharti Airtel)

वहीं, पीएल कैपिटल ने निम्नलिखित कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी घटाई है:
- लार्सन एंड टुब्रो (L&T)
- टाइटन (Titan)
- हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL)
- रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries)
- एचसीएल टेक (HCL Tech)
- एचडीएफसी एएमसी (HDFC AMC)
इसके अलावा, कंपनी ने शैलेट होटल्स (Chalet Hotels), इंगरसोल रैंड (Ingersoll Rand) और केन्स टेक (Kaynes Technology) के शेयरों को भी पसंद किया है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण
रिपोर्ट में बताया गया है कि वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजार में बिकवाली हो रही है। अक्टूबर 2024 से अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार और बॉन्ड से 20.2 अरब डॉलर की निकासी की है, जो हाल के वर्षों में सबसे अधिक है। भारत में 8.2 अरब डॉलर का पूंजी बहिर्वाह हुआ है।
पीएल कैपिटल ने भारतीय बाजार में एफआईआई निवेशों के लिए बाधा दर (हर्डल रेट) की गणना की है और अनुमान लगाया है कि:
- डॉलर के मुकाबले रुपये में 4% की कमजोरी
- पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax)
- 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की दर 4.5% होने के कारण
इन कारकों के चलते एफआईआई निवेश की कटऑफ दर 10.5% तक पहुंच गई है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारत में निवेश करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
बाजार के लिए भविष्य की संभावनाएँ
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगले कुछ महीनों में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, लेकिन वर्ष 2025 की चौथी तिमाही तक स्थिरता आने की उम्मीद है। यदि सरकार द्वारा उठाए गए कदम सफल होते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में फिर से मजबूती आ सकती है। विदेशी निवेशकों की वापसी और घरेलू मांग में सुधार के साथ, बाजार में नए निवेशकों को भी अवसर मिल सकते हैं।
प्रभुदास लीलाधर की पीएल कैपिटल रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर बाजार में मौजूदा गिरावट अधिक समय तक नहीं टिकेगी। वित्तीय वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही के अंत तक बाजार में स्थिरता आने की उम्मीद है।
ब्याज दरों में कटौती, आयकर दरों में कमी और पूंजीगत व्यय में वृद्धि से घरेलू उपभोग और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि सरकार और आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम कारगर साबित होते हैं, तो भारतीय बाजार अगले कुछ महीनों में एक नई ऊँचाई पर पहुँच सकता है।
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Silver Price Predictions: चांदी की कीमतों में हो सकता है जबरदस्त उछाल, 2026 तक 200 डॉलर प्रति औंस!
Silver Price Predictions: वर्तमान वैश्विक राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशकों का ध्यान खासतौर पर सोने और चांदी की ओर गया है। जहां शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और गिरावट की स्थिति बनी हुई है, वहीं सोने और चांदी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। इस बीच वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में चांदी की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी। प्रसिद्ध वित्तीय लेखक रॉबर्ट कियोस्की ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर चांदी के महत्व को बढ़ाते हुए कहा है कि आज के तकनीकी युग में चांदी का महत्त्व सोने से भी अधिक हो गया है। वे इसे आधुनिक तकनीक की रीढ़ मानते हैं, जैसे औद्योगिक युग में लोहे का था।
चांदी के दामों में उछाल की संभावनाएं
कियोस्की ने बताया कि चांदी की कीमतें पिछले दशकों में लगातार बढ़ रही हैं। उदाहरण के तौर पर, 1990 में चांदी की कीमत लगभग 5 डॉलर प्रति औंस थी, जो अब 2026 तक बढ़कर लगभग 92 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुकी है। उन्होंने भविष्यवाणी की है कि आने वाले समय में चांदी के दाम 200 डॉलर प्रति औंस तक भी पहुंच सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यह अनुमान गलत भी हो सकता है, लेकिन इसके संभावित उछाल को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह तेजी निवेशकों के बीच एक नई उम्मीद जगाती है कि चांदी अब सिर्फ कीमती धातु नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण तकनीकी धातु बन चुकी है।
चांदी की कीमत बढ़ने के पीछे कारण
चांदी की कीमतों में तेजी के कई अहम कारण हैं। सबसे पहला कारण यह है कि निवेशक इसे सुरक्षित निवेश के रूप में तेजी से अपना रहे हैं। इसके अलावा चांदी की सप्लाई सीमित होती जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सोलर पैनल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सर्वर जैसी आधुनिक तकनीकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। भू-राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक बाजारों में बढ़ता डर भी चांदी की कीमतों को ऊपर धकेल रहा है। इसके अलावा, भारतीय रुपये की कमजोरी भी घरेलू बाजार में चांदी की कीमतों को प्रभावित कर रही है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी की कीमत लगभग 95 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुकी है, जबकि भारत में यह 3.34 लाख रुपये प्रति किलो के करीब चल रही है।
सोना या चांदी – निवेशकों के लिए बेहतर विकल्प?
बाजार में चांदी के साथ-साथ सोने की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। एमसीएक्स पर 24 कैरेट सोना 10 ग्राम के लिए 1.51 लाख रुपये के पार पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन चांदी की चमक उससे कहीं ज्यादा तेज हो सकती है। चांदी तकनीकी जरूरतों में बढ़ती मांग के कारण निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन रही है। ऐसे में निवेशकों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में चांदी सोने से भी बेहतर निवेश साबित हो सकती है। बाजार के उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच, यह धातु निवेश को सुरक्षित और लाभकारी बनाने में मदद कर सकती है।
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