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JK Cement Share Dividend: शेयरधारकों के लिए खुशखबरी, JK Cement ने ₹15 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड किया घोषित

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JK Cement Share Dividend: शेयरधारकों के लिए खुशखबरी, JK Cement ने ₹15 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड किया घोषित

JK Cement Share Dividend: देश की जानी-मानी सीमेंट कंपनी जेके सीमेंट लिमिटेड ने अपने शेयरधारकों को बड़ी सौगात दी है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ₹15 प्रति इक्विटी शेयर के फाइनल डिविडेंड का ऐलान किया है। हर शेयर की फेस वैल्यू ₹10 है यानी निवेशकों को 150 प्रतिशत का डिविडेंड मिलेगा। यह उन सभी योग्य निवेशकों को मिलेगा जिनके पास रिकॉर्ड तिथि तक जेके सीमेंट के शेयर होंगे। बाजार में फिलहाल जेके सीमेंट के शेयर लगभग ₹6120 पर कारोबार कर रहे हैं और आज इनमें 0.50% की हल्की गिरावट भी देखी गई।

डिविडेंड की रिकॉर्ड डेट और बुक क्लोजर

कंपनी ने डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 8 जुलाई 2025 तय की है। यानी अगर आपने 8 जुलाई तक जेके सीमेंट के शेयर खरीद रखे हैं तो आप इस डिविडेंड के पात्र होंगे। वहीं बुक क्लोजर की तारीख 9 जुलाई से 18 जुलाई 2025 तक रहेगी। इस दौरान शेयर ट्रांसफर आदि की प्रक्रिया बंद रहेगी। जेके सीमेंट लिमिटेड देश की पांचवीं सबसे बड़ी सीमेंट निर्माता कंपनी है और इसका मार्केट कैप लगभग ₹47,326 करोड़ है।

JK Cement Share Dividend: शेयरधारकों के लिए खुशखबरी, JK Cement ने ₹15 प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड किया घोषित

शानदार रिटर्न्स से बना निवेशकों का भरोसा

अगर निवेश की बात करें तो जेके सीमेंट ने अपने शेयरधारकों को लगातार मजबूत रिटर्न्स दिए हैं। इस साल अब तक कंपनी के शेयरों ने करीब 33% का रिटर्न दिया है। वहीं, अगर पिछले 5 सालों की बात करें तो निवेशकों को 333% का दमदार रिटर्न मिला है। सबसे बड़ी बात ये है कि जेके सीमेंट ने अपने शेयर की शुरुआती कीमत से अब तक करीब 3900% का रिटर्न दिया है यानी जिसने 2006 में इस शेयर में पैसा लगाया था उसका पैसा आज 40 गुना हो गया है।

2006 में ₹150 था शेयर, अब ₹6100 के पार

साल 2006 में जब जेके सीमेंट का शेयर ₹150 पर था, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये एक दिन ₹6000 के पार चला जाएगा। लेकिन इस कंपनी ने अपने मजबूत बिजनेस और निवेशकों के भरोसे के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। फिलहाल जेके सीमेंट का 52 हफ्ते का हाई ₹6513 और लो ₹3891 है। ऐसे में डिविडेंड के साथ-साथ शेयर के लॉन्ग टर्म रिटर्न्स को देखकर यह साफ है कि यह कंपनी निवेशकों के लिए फायदे का सौदा रही है और आने वाले समय में भी इसकी पोजीशन मजबूत बनी रहने की उम्मीद है।

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सोना चांदी के दामों में बड़ा बदलाव निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट जारी

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सोना चांदी के दामों में बड़ा बदलाव निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट जारी

घरेलू फ्यूचर मार्केट में इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में पिछले सप्ताह की तुलना में मजबूत तेजी देखने को मिली है। एमसीएक्स के आंकड़ों के अनुसार पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सोना 1,49,650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था जबकि चांदी 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर रही थी। इस सप्ताह दोनों कीमती धातुओं में लगातार उछाल दर्ज किया गया है। सोने की कीमतों में लगभग 3 हजार रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है जबकि चांदी में करीब 10,500 रुपये की तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया है।

चांदी के ताजा भाव और शहरों में कीमतें

12 अप्रैल के ताजा अपडेट के अनुसार देश के प्रमुख शहरों में चांदी के दामों में भी तेजी बनी हुई है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में 10 ग्राम चांदी की कीमत 2,600 रुपये के आसपास बनी हुई है। वहीं 100 ग्राम चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को लगभग 26,000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। चेन्नई में चांदी की कीमत थोड़ी अधिक है जहां 10 ग्राम चांदी लगभग 2,650 रुपये में बिक रही है। चांदी की कीमतों में यह उछाल वैश्विक बाजार और घरेलू मांग दोनों के कारण देखा जा रहा है जिससे निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है।

सोना चांदी के दामों में बड़ा बदलाव निवेशकों के लिए जरूरी अपडेट जारी

देश के प्रमुख शहरों में सोने का ताजा रेट

सोने के दामों में भी विभिन्न शहरों में अलग अलग स्तर पर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में 24 कैरेट सोना 1,52,990 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है जबकि 22 कैरेट सोना 1,40,250 रुपये और 18 कैरेट सोना 1,14,780 रुपये के स्तर पर है। मुंबई और कोलकाता में भी लगभग इसी तरह के भाव देखने को मिल रहे हैं जहां 24 कैरेट सोना 1,52,840 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है। चेन्नई में सोने की कीमतें सबसे अधिक हैं जहां 24 कैरेट सोना 1,53,820 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। अहमदाबाद, लखनऊ, पटना और हैदराबाद जैसे शहरों में भी सोने के दाम 1,52,000 रुपये से अधिक बने हुए हैं।

भारत में सोने चांदी का भावनात्मक और निवेश मूल्य

भारत में सोना और चांदी केवल निवेश का साधन नहीं हैं बल्कि यह परंपरा और भावनाओं से भी गहराई से जुड़े हुए हैं। शादी विवाह और त्योहारों के अवसर पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है और इसे समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। कई परिवारों के लिए यह आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत माध्यम भी है जो जरूरत के समय सहारा बनता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के चलते आने वाले समय में कीमतों में और उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को सोच समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि सोना और चांदी दोनों ही लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते रहे हैं।

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IPO बाजार में जबरदस्त उछाल मार्च 2026 में 38 कंपनियों ने दाखिल किए DRHP

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IPO बाजार में जबरदस्त उछाल मार्च 2026 में 38 कंपनियों ने दाखिल किए DRHP

भारतीय आईपीओ बाजार में मार्च 2026 के दौरान जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। Securities and Exchange Board of India के पास कुल 38 कंपनियों ने अपने शुरुआती IPO दस्तावेज जमा किए हैं, जिनमें SBI Funds Management और Manipal Health Enterprises जैसे बड़े नाम शामिल हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है, जहां मार्च 2025 में 22 और मार्च 2024 में केवल 16 आवेदन आए थे। इस वृद्धि से साफ संकेत मिलता है कि कंपनियों का पब्लिक मार्केट में उतरने का भरोसा बढ़ रहा है और नियामकीय प्रक्रिया के प्रति उनकी तैयारी भी मजबूत हुई है।

DRHP फाइलिंग में बढ़ोतरी और बड़ी कंपनियों की तैयारी

मार्च 2026 में आई इस तेजी के पीछे कई बड़ी कंपनियों की भागीदारी भी अहम है। रिपोर्ट्स के अनुसार National Stock Exchange of India और Reliance Jio जैसी प्रमुख कंपनियां भी आने वाले समय में अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल करने की तैयारी कर रही हैं। इसके अलावा Sembcorp Industries की भारतीय शाखा, PlaySimple, Fibe और BatterySmart जैसी कंपनियां भी आईपीओ के लिए कतार में हैं। इनमें से कुछ ने गोपनीय फाइलिंग का विकल्प चुना है, जिससे वे बाजार में उतरने से पहले अपनी रणनीति को अधिक सुरक्षित और लचीला बनाए रखना चाहती हैं। यह दर्शाता है कि कंपनियां अब अपने पब्लिक ऑफर को लेकर अधिक रणनीतिक और तैयार दृष्टिकोण अपना रही हैं।

IPO बाजार में जबरदस्त उछाल मार्च 2026 में 38 कंपनियों ने दाखिल किए DRHP

लंबित मंजूरियां और मजबूत होती IPO पाइपलाइन

Axis Capital की रिपोर्ट के अनुसार, कई कंपनियां पहले से ही SEBI से मंजूरी का इंतजार कर रही हैं, जबकि 124 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है लेकिन उन्होंने अभी तक अपने शेयर बाजार में जारी नहीं किए हैं। वहीं 64 कंपनियां DRHP जमा कर मंजूरी की प्रतीक्षा में हैं। मार्च 2025 से अब तक 20 कंपनियों ने गोपनीय DRHP फाइल किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 109 मेनबोर्ड आईपीओ आए, जिनमें से अधिकांश लिस्टिंग के समय अपने इश्यू प्राइस से ऊपर ट्रेड हुए। यह डेटा बताता है कि बाजार में निवेशकों की भागीदारी मजबूत बनी हुई है और आईपीओ पाइपलाइन लगातार भरती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में भी यह रुझान जारी रह सकता है।

बाजार की अस्थिरता के बावजूद कंपनियों का भरोसा कायम

हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के बावजूद कंपनियों का आईपीओ की ओर रुझान बना हुआ है। डिजिटल पेमेंट कंपनी PhonePe ने अपनी लिस्टिंग को कुछ समय के लिए टाल दिया है, लेकिन कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में पब्लिक लिस्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह तेजी केवल समयसीमा का परिणाम नहीं है बल्कि कंपनियों की बेहतर तैयारी, निवेशकों का भरोसा और मजबूत रेगुलेटरी ढांचे का संयुक्त प्रभाव है। जानकार यह भी मानते हैं कि अब कंपनियां सही समय और बेहतर मूल्यांकन को ध्यान में रखते हुए आईपीओ लॉन्च कर रही हैं, जिससे बाजार में एक संतुलित और स्थिर विकास देखने को मिल रहा है।

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घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना

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घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना

गुल्फ़ देशों में जारी संघर्ष का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण आयात में कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप तेल विपणन कंपनियों के पास उपलब्ध स्टॉक तेजी से घट रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और कंपनियां दोनों ही आवश्यक कदम उठाने की तैयारी कर रही हैं। Economic Times की रिपोर्ट के अनुसार घरेलू गैस सिलेंडरों में एलपीजी की आपूर्ति को घटाने पर विचार किया जा रहा है। योजना यह है कि हर सिलेंडर में 14.2 किलोग्राम की बजाय लगभग 10 किलोग्राम गैस दी जाएगी। ऐसा करने से कुल उपलब्ध आपूर्ति में कमी होने के बावजूद अधिक परिवारों तक गैस पहुंचाई जा सकेगी।

आयात पर बढ़ा दबाव

देश में एलपीजी आयात की स्थिति फिलहाल चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। वर्तमान में, गल्फ़ देशों से नई खेपें नहीं आ रही हैं। पिछले सप्ताह लगभग 92,700 टन गैस दो जहाजों के माध्यम से पहुंची, जो पूरे देश की एक दिन की खपत के बराबर है। वहीं, वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए आपूर्ति फिर से शुरू होने से उपलब्ध सीमित स्टॉक पर और दबाव पड़ गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने हाल ही में कई बार कहा कि देश में एलपीजी की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।

घरेलू गैस सिलेंडरों में 14.2 किलोग्राम की जगह 10 किलोग्राम की संभावना

कम मात्रा वाले सिलेंडरों की कीमत कैसे तय होगी

अगर सिलेंडरों में गैस की मात्रा कम करने का निर्णय लागू किया गया तो इसकी कीमत अनुपात के आधार पर तय की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे सिलेंडरों पर विशेष स्टिकर लगाया जाएगा ताकि स्पष्ट हो कि इसमें कम मात्रा की गैस है। इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स को अपनी आंतरिक प्रणालियों में बदलाव करना होगा और आवश्यक नियामक अनुमोदन प्राप्त करने के बाद ही यह प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

कंपनियों की चिंताएं और संभावित विरोध

इस योजना को लेकर संबंधित कंपनियों ने भी अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका मानना है कि अचानक सिलेंडरों के वजन में कमी से उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा हो सकता है। इसके चलते जनता में असंतोष और विरोध की भावना पैदा होने की संभावना है। विशेष रूप से उन राज्यों में, जहां विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। कंपनियों के अनुसार, यदि अगले महीने स्थिति और बिगड़ती है, तो यह गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।

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