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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता करीब, जानें कौन-सी कंपनियों के शेयर्स में आया जोरदार उछाल

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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता करीब, जानें कौन-सी कंपनियों के शेयर्स में आया जोरदार उछाल

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापारिक समझौते (Trade Deal) को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया अब अपनी अंतिम चरण में है। दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत-अमेरिका के प्रस्तावित व्यापार समझौते के बारे में केवल तभी अच्छी खबर मिलेगी, जब यह दोनों पक्षों के लिए निष्पक्ष, संतुलित और समान अवसर प्रदान करने वाला हो। मंत्री के इस बयान के बाद बुधवार को एपीक्स फ्रोजन फूड्स, कोस्टल कॉरपोरेशन और अवंती फीड्स के शेयरों में तेजी देखने को मिली।

तेजी के साथ उड़े ये शेयर

बुधवार को बाजार में मछली और समुद्री उत्पाद (Seafood) कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखा गया। एपीक्स फ्रोजन फूड्स के शेयर लगभग 5% बढ़कर ₹305.99 प्रति शेयर पर पहुँच गए, जो कि कंपनी का नया 52-सप्ताह उच्च स्तर है। वहीं, कोस्टल कॉरपोरेशन के शेयरों में 9% की बढ़ोतरी हुई, और अवंती फीड्स के शेयरों में लगभग 12% का उछाल आया। इसके अलावा, ज़ील एक्वा के शेयरों में भी तेज़ी देखी गई। यह तेजी निवेशकों की उम्मीदों और बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया को दर्शाती है।

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता करीब, जानें कौन-सी कंपनियों के शेयर्स में आया जोरदार उछाल

चीन-जापान तनाव और भारतीय समुद्री उत्पाद

हाल ही में, 19 नवंबर को झींगा (Shrimp) कंपनी के शेयरों में अचानक तेजी आई। इसका मुख्य कारण यह था कि चीन ने जापान से सभी समुद्री उत्पादों का आयात प्रतिबंधित कर दिया। यह कदम जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के ताइवान (Taiwan) को लेकर दिए गए बयान के बाद आया। ताकाइची ने संसद में कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो जापान अपनी सेना भेजकर ताइवान की मदद करेगा, क्योंकि ताइवान जापान के सबसे नज़दीक देश है। चीन ने इस बयान को “अविश्वसनीय और उकसाने वाला” करार दिया।

भारतीय व्यापारियों के लिए अवसर

वर्तमान में भारत भी चीन को समुद्री उत्पाद निर्यात करता है। चीन और जापान के बीच उच्च तनाव के कारण अब भारतीय उत्पादों की मांग में बढ़ोतरी की संभावना है। भारतीय झींगा और समुद्री उत्पादों (Seafood) को चीन के बाजार में निर्यात बढ़ाने का यह सही समय हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता और चीन के साथ हाल की परिस्थितियाँ दोनों ही मिलकर भारतीय व्यापारियों और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। इस तरह के मौके से भारत के समुद्री उत्पाद उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती मिलेगी और आर्थिक दृष्टि से लाभ होगा।

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मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित

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मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित

टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स में एक बार फिर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी की चर्चा जोर पकड़ने लगी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी अपने कुल वर्कफोर्स का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा कम कर सकती है। इसका मतलब है कि करीब 16,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडरा सकता है। सूत्रों का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च को संतुलित करने के उद्देश्य से उठाया जा सकता है।

संभावित छंटनी से कर्मचारियों में बढ़ा तनाव

कॉरपोरेट फाइलिंग के अनुसार 31 दिसंबर 2025 तक मेटा में करीब 79,000 लोग काम कर रहे थे। अगर कंपनी अपने वर्कफोर्स में 20 फीसदी की कटौती करती है, तो यह पिछले सालों की छंटनी के बाद अब तक की सबसे बड़ी होगी। हालांकि, फिलहाल यह कदम केवल संभावित माना जा रहा है और कोई आधिकारिक तारीख तय नहीं की गई है। पिछले अनुभव से कर्मचारियों में भारी तनाव और असुरक्षा की स्थिति पैदा होने की संभावना जताई जा रही है।

मेटा में संभावित छंटनी से कर्मचारी परेशान, कंपनी की भविष्य की रणनीति AI पर केंद्रित

मेटा का फोकस एआई पर: भविष्य की रणनीति

कंपनी पिछले एक साल से AI क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगी हुई है। इसके लिए मेटा ने कई टॉप एआई रिसर्चर्स को अपनी सुपरइंटेलिजेंस टीम में शामिल किया है और उन्हें आकर्षक पैकेज ऑफर किए हैं। इसका उद्देश्य कंपनी को अधिक प्रभावी और तेजी से काम करने वाली टीम तैयार करना है, जो AI की मदद से बेहतर प्रोडक्टिविटी दे सके। विशेषज्ञों का कहना है कि मेटा की यह रणनीति उसके भविष्य के कारोबार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिहाज से अहम कदम है।

बड़े निवेश और दीर्घकालिक योजनाएं

मेटा कंपनी 2028 तक डेटा सेंटर निर्माण पर लगभग 600 अरब डॉलर खर्च करने की योजना बना रही है। यह निवेश कंपनी के AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह छंटनी और AI में निवेश कंपनी की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, इस बीच कर्मचारियों के लिए यह स्थिति चिंता और अनिश्चितता का समय है। आने वाले हफ्तों में मेटा की ओर से आधिकारिक बयान और अंतिम निर्णय की घोषणा का इंतजार किया जा रहा है।

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मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव

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मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव

मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। लगातार तीन दिनों से बाजार लाल निशान पर बंद हो रहे हैं। शुक्रवार को सेंसेक्स 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 अंक पर बंद हुआ, वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,151.10 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों में चिंता बढ़ रही है और बाजार की इस अस्थिर स्थिति के बीच ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कुछ प्रमुख कंपनियों को अपनी अंडरपरफॉर्म लिस्ट में शामिल किया है।

विप्रो: परामर्श सेवाओं में कमजोर मांग के चलते सावधानी बरतने की सलाह

ब्रोकरेज हाउस जेफरीज ने विप्रो के शेयर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। फर्म का मानना है कि कंपनी का शेयर मौजूदा स्तर से गिरकर करीब 180 रुपये तक जा सकता है, जो बीएसई पर पिछले बंद भाव 202.51 रुपये से लगभग 21 प्रतिशत कम है। जेफरीज के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में विप्रो की मुख्य रेवेन्यू में लगातार दूसरे साल गिरावट आ सकती है। परामर्श सेवाओं वाले सेगमेंट में मांग कमजोर बनी हुई है और इसी वजह से कंपनी का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

मिडिल ईस्ट संकट से भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, विप्रो और सिप्ला पर दबाव

सिप्ला: अमेरिका में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और सप्लाई समस्या से दबाव

सिप्ला के शेयर को लेकर भी जेफरीज ने सतर्क रुख अपनाया है। फर्म का कहना है कि कंपनी की अमेरिका से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि तीन प्रमुख दवाओं में से दो को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा लैंरेओटाइड दवा की सप्लाई सहयोगी मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर से जुड़ी समस्या के कारण प्रभावित हो रही है। इन चुनौतियों की वजह से वित्त वर्ष 2027 में कंपनी का प्रॉफिट आफ्टर टैक्स सालाना आधार पर लगभग 15 प्रतिशत घट सकता है। यही कारण है कि जेफरीज ने इस शेयर पर “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी है।

हुंडई मोटर इंडिया: मांग मजबूत लेकिन प्रतिस्पर्धा चुनौती बनी

हुंडई मोटर इंडिया के शेयर को लेकर जेफरीज का अनुमान है कि इसमें तेजी की संभावना कम है। फर्म ने इसका टारगेट प्राइस लगभग 1,900 रुपये रखा है, जो पिछले बंद भाव के करीब है। हालांकि, जीएसटी में संभावित कटौती, बाजार में लिक्विडिटी की बेहतर स्थिति और सरकारी वेतन बढ़ोतरी जैसे कारणों से भारत में पैसेंजर व्हीकल की मांग मजबूत रह सकती है। लेकिन ऑटो सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और नई वैश्विक चुनौतियां कंपनी के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।

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मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच चीन का बड़ा कदम, गैसोलीन और डीजल की विदेश शिपमेंट रोकी

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मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच चीन का बड़ा कदम, गैसोलीन और डीजल की विदेश शिपमेंट रोकी

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति की अनिश्चितता के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ गई है। कई देशों में तेल और गैस की उपलब्धता को लेकर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बीच चीन ने घरेलू ईंधन संकट को रोकने के लिए मार्च महीने में रिफाइंड ऑयल के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है।

चीन का बड़ा फैसला: गैसोलीन, डीजल और एविएशन फ्यूल पर रोक

चीन की सरकारी संस्था National Development and Reform Commission (एनडीआरसी) ने आदेश जारी किया है कि मार्च महीने में गैसोलीन, डीजल और हवाई ईंधन की विदेशों में शिपमेंट रोकी जाए। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कमी को रोकना है। बीजिंग का यह कदम ऐसे समय में आया है जब Strait of Hormuz में तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष के बीच चीन का बड़ा कदम, गैसोलीन और डीजल की विदेश शिपमेंट रोकी

आईईए और अमेरिका ने उठाए कदम, वैश्विक आपूर्ति स्थिर करने की कोशिश

वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए International Energy Agency (आईईए) ने भी राहत देने का कदम उठाया। एजेंसी ने कहा कि उसके सदस्य देश आपूर्ति संकट से निपटने के लिए 400 मिलियन बैरल तेल आपातकालीन भंडार से जारी करेंगे। यह 1973 के ऑयल क्राइसिस के बाद ऐसा छठा मौका है जब आईईए ने वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर रखने के लिए इस तरह का कदम उठाया। वहीं, अमेरिका ने अपने Strategic Petroleum Reserve से 172 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने का फैसला लिया है।

मध्य पूर्व तनाव और तेल आपूर्ति पर असर

वेस्ट एशिया में तनाव 28 मार्च को बढ़ा जब Israel ने Iran पर हवाई हमले किए। यह संघर्ष अब लगभग दो सप्ताह से जारी है और अगर युद्ध लंबा चलता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन के निर्यात रोकने के फैसले और मध्य पूर्व संघर्ष के कारण आने वाले हफ्तों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।

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