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नील नितिन मुकेश ने ‘द यूनिवर्सल आइडल’ ब्रांड एंबेसडरशिप से किया अचानक इस्तीफा
बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री में अपने अभिनय का जलवा बिखेर चुके नील नितिन मुकेश इस समय सुर्खियों में हैं। इस बार वह किसी फिल्म की वजह से नहीं बल्कि अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के कारण चर्चा में हैं। अभिनेता ने हाल ही में घोषणा की कि वह सिंगिंग रियलिटी शो ‘द यूनिवर्सल आइडल’ से अपने ब्रांड एंबेसडरशिप का नाता तोड़ रहे हैं। उन्होंने ऑर्गनाइजर्स पर फीस का भुगतान न करने का आरोप लगाया और इंडस्ट्री के अन्य कलाकारों को इस तरह के धोखे से बचने की चेतावनी दी।
इंस्टाग्राम स्टोरी में नील ने किया खुलासा
नील नितिन मुकेश ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा कि उन्होंने ‘एचएमसी इवेंट्स’ से जुड़े शो ‘द यूनिवर्सल आइडल’ से अलग होने का फैसला लिया है। उन्होंने अपने पोस्ट में बताया कि कई बार आश्वासन मिलने के बावजूद उन्हें तय किए गए भुगतान की राशि नहीं दी गई। तीन चेक भी बाउंस हो गए। नील ने कहा कि यह भरोसे और जिम्मेदारी की गंभीर कमी को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टीम ने कई बार मुद्दे को शांति से सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

लीगल कार्रवाई और चेतावनी
नील नितिन मुकेश ने यह भी स्पष्ट किया कि वे यूनिवर्सल आइडल, एचएमसी इवेंट्स और श्री शकील हासन समेत उनके सहयोगियों के साथ अपने सभी मौजूदा और भविष्य के संबंधों से तत्काल प्रभाव से अलग हो रहे हैं। उन्होंने अन्य कलाकारों, वेंडर्स और पार्टनर्स को चेतावनी दी कि किसी भी तरह के दावे और वादों के पेमेंट की पूरी जांच-पड़ताल करें। उन्होंने यह भी कहा कि वे कानून के तहत उपलब्ध सभी उचित उपायों का पालन करने के अधिकार सुरक्षित रखते हैं।
नील नितिन मुकेश का करियर और अपकमिंग फिल्में
नील नितिन मुकेश ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘जॉनी गद्दार’ से की थी। इसके बाद उन्होंने ‘न्यूयॉर्क’, ‘प्लेयर्स’, ‘लफंगे परिंदे’, ‘प्रेम रतन धन पायो’, ‘वजीर’, ‘साहो’, ‘जेल’ और ‘इंदु सरकार’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। अपने अभिनय कौशल और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर उन्होंने बॉलीवुड और साउथ इंडस्ट्री दोनों में अपनी पहचान बनाई है। अब उनकी अपकमिंग मलयालम फिल्म ‘खलीफा’ को लेकर दर्शक उत्सुक हैं, जिसमें वह मुख्य भूमिका में नजर आएंगे।
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हैदराबाद में आर्थिक तंगी ने परिवार को मजबूर किया आत्महत्या की डरावनी राह अपनाने पर
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के बापूनगर इलाके में अंबरपेट पुलिस स्टेशन के अंतर्गत एक परिवार ने अपने घर में सुसाइड कर लिया। इस घटना ने पूरे इलाके में सदमे और दहशत का माहौल बना दिया। पुलिस ने तीनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मरने वालों में एक कपल और उनका 24 वर्षीय बेटा शामिल है। पड़ोसियों ने बताया कि लंबे समय तक घर से कोई आवाज़ नहीं आई, तब जाकर उन्होंने पुलिस को सूचित किया।
आत्महत्या के तरीके और परिस्थितियां
प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिलता है कि सबसे पहले घर की महिला ने आत्महत्या की। उसके बाद पति रामराजू ने कथित तौर पर सीलिंग फैन से फांसी लगाई। उनके बेटे शशांक (24) ने कथित तौर पर अपनी कलाई काट ली, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तीनों के शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, और इसी तंगी के चलते यह कदम उठाया गया हो सकता है।

आर्थिक तंगी या कुछ और कारण?
सिकंदराबाद के एडिशनल डीसीपी नरसैय्या ने बताया कि मामले की जांच चल रही है। पुलिस मृतकों के फाइनेंशियल रिकॉर्ड और घर की स्थिति की जांच कर रही है। इसके अलावा, परिवार के रिश्तेदारों से बातचीत करके यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घटना किन हालातों में हुई। शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि आर्थिक तंगी परिवार पर भारी पड़ सकती है, लेकिन पुलिस यह भी तलाश रही है कि कहीं कोई और मानसिक या सामाजिक कारण तो नहीं था।
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने मामले को दर्ज कर लिया है और पूरी तरह से विस्तृत जांच में जुटी है। फोरेंसिक टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर रही है और पड़ोसियों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस यह भी सुनिश्चित कर रही है कि कोई और व्यक्ति या बाहरी दबाव इस घटना में शामिल न हो। घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और सामाजिक रूप से लोगों में चिंता की लहर दौड़ गई है। पुलिस ने परिवार के घर के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है और आगे की कार्रवाई जारी रखने का भरोसा दिया है।
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JNU झड़प पर बड़ा एक्शन, कैंपस हिंसा के बाद प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी
देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में 22 फरवरी 2026 की रात माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया, जब दो छात्र संगठनों के बीच झड़प की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि वाइस चांसलर शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित के हालिया बयान को लेकर छात्र संगठनों में पहले से तनाव था, जो देर रात हाथापाई में बदल गया। यूनिवर्सिटी प्रशासन के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने कैंपस के अंदर कई अकादमिक भवनों को कथित तौर पर बंद कर दिया और सेंट्रल लाइब्रेरी में प्रवेश कर उन छात्रों पर दबाव बनाया जो प्रदर्शन में शामिल नहीं होना चाहते थे। प्रशासन ने कहा कि इन घटनाओं को बेहद गंभीरता से लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है।
प्रशासन का सख्त रुख, अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
जेएनयू प्रशासन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि कैंपस में किसी भी तरह के बेकाबू व्यवहार और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की कड़ी निंदा की जाती है। प्रशासन का कहना है कि विश्वविद्यालय का माहौल समावेशी और शैक्षणिक गतिविधियों के अनुकूल रहना चाहिए। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि यूनिवर्सिटी के नियमों, रेगुलेशन और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे गैर-जरूरी गतिविधियों से दूर रहें और शांति एवं भाईचारे को बनाए रखने में सहयोग करें। साथ ही यह भी कहा गया कि फिलहाल सभी कक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से चल रही हैं और किसी भी अव्यवस्था को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

एबीवीपी का आरोप: छात्रों को धमकाया, कमरों में बंद किया गया
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी घटना के लिए वामपंथी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया। एबीवीपी का आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से कैंपस का माहौल ‘लॉकडाउन’ जैसा बना दिया गया था और जो छात्र प्रदर्शन में शामिल नहीं होते थे, उन्हें कथित तौर पर धमकाया जाता था। संगठन का कहना है कि फेसियल रिकग्निशन सिस्टम को लेकर विरोध के दौरान लाइब्रेरी में तोड़फोड़ की गई। एबीवीपी के मुताबिक, नकाबपोश छात्र अलग-अलग कमरों में जाकर पढ़ रहे छात्रों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए मजबूर कर रहे थे। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ छात्रों को कमरों में बंद किया गया और कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई। एक छात्र ने पुलिस से मदद मांगने की भी बात कही है। एबीवीपी ने महिला कार्यकर्ताओं को धमकी देने का भी आरोप लगाया है।
वामपंथी संगठनों का पलटवार, वीसी के बयान पर विवाद
वामपंथी छात्र संगठनों ने एबीवीपी के आरोपों को खारिज करते हुए प्रशासन और वाइस चांसलर पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वे पिछले दो सप्ताह से अलग-अलग स्कूलों में यूजीसी इक्विटी और अन्य मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण हड़ताल कर रहे थे। उनका आरोप है कि वाइस चांसलर ने एक पॉडकास्ट में आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके विरोध में जनरल बॉडी मीटिंग में प्रस्ताव पारित किया गया। वामपंथी संगठनों का कहना है कि उन्होंने सीमित भवनों में प्रतीकात्मक ‘लॉकडाउन’ किया था और उनका मार्च शांतिपूर्ण था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाहरी तत्वों को कैंपस में लाया गया और उनके छात्रों पर हमला किया गया। संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी छात्र को नुकसान पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की होगी। फिलहाल कैंपस में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।
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