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गिरते गिरते संभल गए Anil Ambani के शेयर अब दे रहे हैं मल्टीबैगर रिटर्न जानिए क्या है वापसी की असली वजह

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गिरते गिरते संभल गए Anil Ambani के शेयर अब दे रहे हैं मल्टीबैगर रिटर्न जानिए क्या है वापसी की असली वजह

कई सालों की गिरावट और संघर्ष के बाद Anil Ambani की कंपनियां अब शेयर बाजार में धमाल मचा रही हैं। पिछले तीन महीनों में उनके समूह की दो कंपनियों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। इस तेजी ने इन शेयरों को मल्टीबैगर की श्रेणी में पहुंचा दिया है। इससे निवेशकों में भी एक नई उम्मीद जगी है।

रिलायंस पावर ने दिखाई ताकत

रिलायंस पावर के शेयर ने पिछले तीन महीनों में 107 प्रतिशत की छलांग लगाई है। इसका भाव 34 रुपये से बढ़कर 67 रुपये तक पहुंच गया है। हाल ही में इसने 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 76 रुपये को छुआ है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट और मार्जिन में भी सुधार आया है।

गिरते गिरते संभल गए Anil Ambani के शेयर अब दे रहे हैं मल्टीबैगर रिटर्न जानिए क्या है वापसी की असली वजह

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर की मजबूती

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के शेयर ने 3 महीनों में 79 प्रतिशत की मजबूती दिखाई है। यह शेयर 221 रुपये से बढ़कर 396 रुपये तक पहुंच गया है और इसका 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर 421 रुपये है। कंपनी की नकद प्रवाह की स्थिति पिछले दो वर्षों में सुधरी है और मुनाफे में भी इजाफा हुआ है।

रिलायंस होम फाइनेंस का तगड़ा उछाल

रिलायंस होम फाइनेंस के शेयर ने भी बाजार में सबको चौंका दिया है। तीन महीनों में यह शेयर 143 प्रतिशत चढ़ा है। इसका भाव 3 रुपये से बढ़कर 8 रुपये तक पहुंच गया है जो इसका 52 सप्ताह का उच्चतम स्तर भी है। सिर्फ एक महीने में इसने 20 प्रतिशत से ज्यादा रिटर्न दिया है।

क्या है इस जबरदस्त बढ़त का राज

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अनिल अंबानी की कंपनियों में यह तेजी रणनीतिक विकास और वित्तीय मजबूती की वजह से आई है। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और जर्मनी की कंपनी राइनमेटल के बीच डिफेंस सेक्टर में साझेदारी ने निवेशकों को नई उम्मीद दी है। वहीं रिलायंस पावर की भूटान के साथ 25 साल की सोलर और बैटरी स्टोरेज डील ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

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गोल्ड लोन या पर्सनल लोन: आपकी वित्तीय जरूरतों के लिए कौन सही विकल्प है

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गोल्ड लोन या पर्सनल लोन: आपकी वित्तीय जरूरतों के लिए कौन सही विकल्प है

कई बार जीवन में ऐसी स्थिति बन जाती है जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे समय पर न तो इमरजेंसी फंड होता है और न ही कोई पर्याप्त बचत। ऐसे में लोगों के सामने लोन लेना ही एक विकल्प बचता है। इस स्थिति में कुछ लोग पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं, जबकि कई लोग अपने पास मौजूद सोने के बदले गोल्ड लोन लेने का विकल्प चुनते हैं। हालांकि, किसी भी लोन को लेने से पहले यह समझना बेहद जरूरी है कि कौन सा विकल्प आपके लिए सही रहेगा।

गोल्ड लोन: कम क्रेडिट स्कोर वाले लोगों के लिए विकल्प

अगर किसी व्यक्ति का क्रेडिट स्कोर कम है, तो बैंक से पर्सनल लोन लेना मुश्किल हो सकता है या बैंक उच्च ब्याज दर पर ही लोन ऑफर करता है। ऐसे समय में गोल्ड लोन एक बेहतर विकल्प बन सकता है। गोल्ड लोन में आमतौर पर सोना गिरवी रखा जाता है, इसलिए लोन देने वाली संस्थाएं क्रेडिट स्कोर पर ज्यादा निर्भर नहीं करतीं। इसी कारण कम क्रेडिट स्कोर वाले लोग भी आसानी से गोल्ड लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह उन लोगों के लिए राहत साबित होता है जिन्हें तुरंत पैसों की जरूरत होती है।

गोल्ड लोन या पर्सनल लोन: आपकी वित्तीय जरूरतों के लिए कौन सही विकल्प है

पर्सनल लोन: लंबे समय के लिए बेहतर विकल्प

यदि किसी व्यक्ति को लंबी अवधि के लिए लोन चाहिए, तो इस स्थिति में पर्सनल लोन लेना सही माना जाता है। पर्सनल लोन का लाभ यह है कि इसमें अधिक रकम लंबे समय तक चुकाई जा सकती है और ब्याज दरें स्थिर होती हैं। वहीं, यदि आपको सिर्फ 3 से 6 महीने के लिए पैसों की जरूरत है तो गोल्ड लोन बेहतर विकल्प हो सकता है। छोटी अवधि के लिए गोल्ड लोन जल्दी प्राप्त हो जाता है और इसका प्रोसेस भी सरल होता है।

इमरजेंसी में गोल्ड लोन की अहमियत

जब किसी व्यक्ति को कम समय में ज्यादा पैसे की जरूरत होती है, तो गोल्ड लोन एक प्रभावी विकल्प बन जाता है। पर्सनल लोन लेने की प्रक्रिया में समय लग सकता है, जबकि गोल्ड लोन तुरंत मिल जाता है। यही वजह है कि इमरजेंसी स्थिति में लोग अपने सोने के बदले लोन लेने का फैसला करते हैं, ताकि उनकी पैसों की जरूरत तुरंत पूरी हो सके। वित्तीय जानकार भी कहते हैं कि गोल्ड लोन का विकल्प सोच-समझ कर लेना चाहिए और इसे केवल आवश्यक समय और आवश्यक रकम के लिए ही उपयोग करना चाहिए।

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निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं

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निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत हुई। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण पश्चिम एशिया की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में गतिविधियां तेज हो गई हैं और निवेशक तेल की कीमतों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से तेल आयातक देशों जैसे भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया, सप्लाई में होगी कमी

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी विवाद के बीच ईरानी सरकार ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। यह मार्ग बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कमी आएगी। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। इस कारण से सप्लाई में रुकावट होने पर तेल की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और भावों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, निवेशकों की नजर

तेल बाजार में हाल ही में अस्थिरता के बीच कीमतों ने तेजी दिखाई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, IG Group के रिटेल ट्रेडिंग प्रोडक्ट में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत $75.33 प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह शुक्रवार की बंद कीमत से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत $76 से $81 प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। निवेशक और तेल कंपनियां लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और वैश्विक असर

हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसे विश्व के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा LPG निर्यातक है, अपने लगभग सभी LPG का निर्यात इसी मार्ग के माध्यम से करता है। इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सप्लाई और बाधित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।

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NHAI ने देश का पहला हाईवे बनाया जहाँ रात में चमकती हैं लाल चेतावनी पट्टियां

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NHAI ने देश का पहला हाईवे बनाया जहाँ रात में चमकती हैं लाल चेतावनी पट्टियां

मध्य प्रदेश के जबलपुर-भोपाल हाईवे (NH-45) पर यात्रियों को इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश में पहली बार सड़क पर चमकदार लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स बिछाई हैं। यह तकनीक न केवल देखने में अलग है, बल्कि इसके पीछे सुरक्षा और वैज्ञानिक कारण भी हैं। हाईवे का यह हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से होकर गुजरता है, जहां जंगली जानवर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आते थे। NHAI की यह पहल इन हादसों को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए की गई है।

ब्राइट रेड तकनीक कैसे करती है ड्राइवर को सतर्क

यह सिर्फ रंग का प्रयोग नहीं है। लाल पट्टियों को सड़क की सतह पर उभार कर बनाया गया है। जैसे ही कोई वाहन इन लाल पट्टियों के ऊपर से गुजरता है, टायर और सड़क के घर्षण से गाड़ी में कंपन और आवाज पैदा होती है। इससे ड्राइवर तुरंत सतर्क हो जाता है और ब्रेक लगाने की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है। लाल रंग का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी काम करता है, क्योंकि लाल रंग को खतरे का संकेत माना जाता है। इससे ड्राइवर को पहले ही चेतावनी मिल जाती है कि वह एनिमल क्रॉसिंग जोन में प्रवेश कर रहा है।

NHAI ने देश का पहला हाईवे बनाया जहाँ रात में चमकती हैं लाल चेतावनी पट्टियां

रात में सुरक्षा कवच का काम करेगी यह तकनीक

हाईवे पर ज्यादातर सड़क हादसे रात के समय होते हैं, जब विजिबिलिटी कम होती है। घने जंगलों के बीच जंगली जानवर अचानक सड़क पार कर लेते हैं। इन लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स की खासियत यह है कि रात के वक्त हेडलाइट की रोशनी में ये चमकती हैं, जिससे ड्राइवर को काफी पहले पता चल जाता है कि आगे एनिमल क्रॉसिंग है। इसका परिणाम यह होता है कि वाहन धीमी गति से गुजरते हैं और जंगली जानवर सुरक्षित होकर सड़क पार कर पाते हैं। इस पहल से ड्राइवर और जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

वन्यजीवों और इंसानों दोनों के लिए फायदेमंद

NHAI की यह पहल इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे बाघ, तेंदुए, हिरण और अन्य दुर्लभ जानवर सुरक्षित रहेंगे। साथ ही, सड़क पर जानवरों से टकराने के कारण होने वाले हादसों में इंसानी जान भी बचाई जा सकेगी। यह तकनीक न केवल हाईवे की सुरक्षा बढ़ाती है, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति समाज को भी जागरूक करती है। इसे भारत में सड़क सुरक्षा और वन्यजीव सुरक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल माना जा रहा है।

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