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AIADMK नेता पलानीस्वामी ने DMK और कांग्रेस पर तंज, कांग्रेस ने मांग ली 50-50 सीटों और सत्ता में हिस्सेदारी
कून्नूर में मंगलवार को हुई विशाल चुनावी रैली में AIADMK के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल मचा दी। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सत्ता में मौजूद डीएमके और उसके मुख्य सहयोगी कांग्रेस के बीच दरारें दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब सत्ता में हिस्सेदारी और अधिक सीटों की मांग कर रही है। पलानीस्वामी ने कहा कि हाल ही में तिरुनेलवेली में कांग्रेस की बैठक में तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडंकर ने खुलकर 50-50 गठबंधन की मांग की।
कांग्रेस की मांगें और सत्ता में हिस्सेदारी
पलानीस्वामी ने बताया कि चोडंकर ने 2026 विधानसभा चुनाव में तमिलनाडु की 234 सीटों में से 117 सीटों की मांग की। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “डीएमके कब तक अकेले लूटती रहेगी? अब कांग्रेस समझदारी दिखा रही है और सत्ता में हिस्सेदारी मांग रही है।” उन्होंने कांग्रेस के तमिलनाडु विधायी दल नेता और पूर्व टीएनसीसी अध्यक्ष के.एस. अलागिरी द्वारा भी सत्ता में हिस्सेदारी की मांग का जिक्र किया।

डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप
पलानीस्वामी ने डीएमके सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके शासन में किडनी चोरी रैकेट शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि एक डीएमके विधायक के अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ी अनियमितताएं पाई गईं, लेकिन डीएमके सरकार ने आरोपियों को बचाया। इसके अलावा, उन्होंने कल्लाकुरीची में जहरीली शराब त्रासदी का हवाला देते हुए कहा कि 68 लोगों की मौत के बावजूद डीएमके ने जांच के लिए सीबीआई की मांग को खारिज किया।
सीएम स्टालिन और उनके विदेश दौरे पर निशाना
पलानीस्वामी ने सीएम एम.के. स्टालिन के हालिया यूरोप दौरे पर भी हमला किया। उन्होंने कहा कि यह दौरा निवेश आकर्षित करने के लिए नहीं था बल्कि सिर्फ “निवेश” करने के लिए था। उन्होंने डीएमके सांसद कनिमोझी के बयान पर तंज कसते हुए कहा कि एआईएडीएमके का मुख्यालय दिल्ली में नहीं बल्कि चेन्नई में है। उन्होंने डीएमके को याद दिलाया कि पार्टी मुख्यालय कभी नहीं बदला और जनता और कार्यकर्ताओं की ताकत से ही पार्टी चलती है।
पन्नीरसेल्वम और इतिहास की याद
पलानीस्वामी ने पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम को अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया। उन्होंने 11 जुलाई 2022 को एआईएडीएमके मुख्यालय में हुए विरोध और पन्नीरसेल्वम के पार्टी से निष्कासन का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डीएमके चाहे कितने भी “अवतार” ले, एआईएडीएमके नहीं टूट सकती। उन्होंने 1993 की घटना का उदाहरण दिया जब डीएमके के नेता वैको को पार्टी से निकाला गया था और जयंललिता ने अपने समय में डीएमके के नेता एम. करुणानिधि की मदद की थी।
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आप पार्टी के फैसले पर राघव चड्ढा का तीखा जवाब खामोशी को कमजोरी मत समझो
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AAP ने राज्यसभा में राघव चड्ढा से छीना उपनेता पद, बड़ा फैसला सामने आया
राजनीतिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब Aam Aadmi Party ने अपने राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को उपनेता पद से हटा दिया। उनकी जगह Ashok Mittal को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अब राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर बोलने का अवसर नहीं दिया जाए। इस फैसले के बाद साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी उनके संसदीय रोल को सीमित करने के मूड में है।
संसद में सक्रियता के बीच अचानक लिया गया फैसला
पिछले कुछ समय से Raghav Chadha संसद में जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे थे। उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगी चाय से लेकर डिलीवरी बॉयज की समस्याओं तक कई विषयों पर आवाज बुलंद की थी। ऐसे समय में यह कार्रवाई चौंकाने वाली मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक अब संसद में उन्हें मिलने वाले समय में भी कटौती की जा सकती है, जिससे उनकी सक्रियता पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से अलग रुख बना कारण
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व को इस बात से आपत्ति थी कि Raghav Chadha कई मुद्दों पर बिना पार्टी से चर्चा किए अपनी बात रख रहे थे। वह किन विषयों पर बोलने वाले हैं इसकी जानकारी भी पहले से साझा नहीं कर रहे थे। पार्टी ने इसको लेकर उन्हें पहले चेतावनी भी दी थी। हालांकि आधिकारिक रूप से कारण स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाना इस फैसले की मुख्य वजह हो सकती है।
चुप्पी और सियासी संकेतों ने बढ़ाई चर्चाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में Arvind Kejriwal और Manish Sisodia से जुड़े मामलों पर Raghav Chadha की चुप्पी भी पार्टी को खटक रही थी। राउज एवेन्यू कोर्ट से जुड़े फैसलों के बाद भी उनका कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया, जिससे कई तरह के सवाल उठे। अब इस कार्रवाई के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि राघव चड्ढा आगे क्या रणनीति अपनाते हैं और क्या वह पार्टी के साथ अपने संबंधों को फिर से मजबूत कर पाते हैं या यह घटना किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत साबित होगी।
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गुजरात में आप प्रदेश अध्यक्ष की गिरफ्तारी पर सियासी घमासान, नेताओं ने उठाए सवाल
गुजरात की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है और विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि यह गिरफ्तारी राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और पार्टी के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिश है।
आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुजरात में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के दुरुपयोग के जरिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। वहीं दिल्ली की नेता और विधानसभा में विपक्ष की प्रमुख आतिशी ने भी सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि बीजेपी सरकार डर के कारण ऐसी कार्रवाई कर रही है क्योंकि जनता अब बदलाव चाहती है।
इस मामले में अरविंद केजरीवाल ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों में गुजरात में आप कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़ी संख्या में एफआईआर दर्ज की गई हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि सरकार विरोधियों को दबाने का प्रयास कर रही है।
गिरफ्तारी को लेकर यह भी जानकारी सामने आई है कि इशुदान गढ़वी खंभालिया थाने में अपने कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। हालांकि पुलिस की ओर से गिरफ्तारी के कारणों को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
इशुदान गढ़वी का राजनीतिक सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। एक साधारण किसान परिवार से आने वाले गढ़वी ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की थी और बाद में राजनीति में कदम रखा। 2021 में आम आदमी पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से पहचान बनाई और 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी घोषित किया गया था।
इस पूरे घटनाक्रम ने गुजरात की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। जहां एक ओर आप इसे राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है, वहीं सत्ताधारी पक्ष की ओर से अभी तक इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर जब राज्य में चुनावी माहौल धीरे-धीरे बन रहा है।
फिलहाल, यह गिरफ्तारी सिर्फ एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस का केंद्र बन चुकी है, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीति को प्रभावित कर सकती है।
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