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बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन फटी, JMM ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया, सीट बंटवारे पर विवाद

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बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन फटी, JMM ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया, सीट बंटवारे पर विवाद

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन में विवाद की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने महागठबंधन से अलग होकर छह सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी नेता Manoj Pandey ने कहा कि जब उनके मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और सीटें नहीं दी गईं, तो उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा। इसलिए JMM पूरी ताकत के साथ चुनाव में उतरेगी।

माहौल और नतीजों का असर

Manoj Pandey ने कहा कि महागठबंधन में उन्हें कम आंका गया। उनका मानना है कि अगर JMM और गठबंधन एक साथ रहते तो भारत गठबंधन और अधिक प्रभावी प्रदर्शन कर सकता था। उन्होंने बिहार के सीमा क्षेत्रों में अपनी पार्टी की पैठ और नेता की लोकप्रियता का हवाला दिया। अब महागठबंधन को इस अलगाव का परिणाम भुगतना पड़ेगा।

सीटों के बंटवारे पर मतभेद

गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर असहमति कई दिनों से जारी थी। JMM ने हमेशा कहा कि अगर उन्हें सम्मान नहीं मिला तो वह अकेले चुनाव लड़ेंगे। इसी वजह से अंतिम समय तक सीटों का बंटवारा तय नहीं हो सका। इस बार कांग्रेस और RJD ने कई सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिससे गठबंधन में और विवाद बढ़ा है।

गठबंधन में मनमुटाव जारी

महागठबंधन में विभिन्न सहयोगियों की असहमति स्पष्ट दिख रही है। कांग्रेस पार्टी को अपने राज्य अध्यक्ष के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। RJD और कांग्रेस के उम्मीदवार एक ही क्षेत्र में खड़े होने से मुकाबला और रोचक होने वाला है। गठबंधन में सहयोग और समन्वय की कमी के कारण चुनावी रणनीति प्रभावित हो सकती है।

NDA की चुनावी तैयारी

वहीं, एनडीए ने भी बिहार में प्रचार तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय मंत्री लगातार रैलियों के जरिए कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। एनडीए की यह तैयारी यह सुनिश्चित करने के लिए है कि महागठबंधन की खींचतान का फायदा उठाकर वे अधिक सीटें जीत सकें। आने वाला चुनाव बेहद रोमांचक और परिणामों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा

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India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा

India-Bangladesh Relations: संसद के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार 6 फरवरी 2026 को लोकसभा में भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठे। जनता दल यूनाइटेड के सांसद गिरिधारी यादव, दिनेश चंद्र यादव और रामप्रीत मंडल ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या मौजूदा समय में भारत और बांग्लादेश के रिश्ते किसी संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं। सांसदों ने यह भी जानना चाहा कि अगर ऐसा है तो इसके पीछे क्या कारण हैं और इसका भारत के राष्ट्रीय हितों पर क्या असर पड़ सकता है। सवालों के दौरान यह आशंका भी जताई गई कि कहीं पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश तो नहीं कर रहा है। इसके साथ ही बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और सार्वजनिक हत्याओं की खबरों को लेकर सरकार के रुख पर भी स्पष्ट जवाब मांगा गया।

क्या पाकिस्तान उठा सकता है हालात का फायदा

जदयू सांसदों ने विदेश मंत्रालय से यह भी पूछा कि भारत-बांग्लादेश संबंधों में यदि किसी तरह की नरमी या तनाव है तो क्या पाकिस्तान जैसे देश इसका रणनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। सांसदों का कहना था कि पड़ोसी देशों के बीच किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी सवाल किया कि बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के गठन के बाद अल्पसंख्यकों के खिलाफ सामने आई घटनाओं पर भारत सरकार ने क्या कोई औपचारिक बातचीत की है। सांसदों ने चिंता जताई कि अगर समय रहते इन मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो क्षेत्रीय स्थिरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

India-Bangladesh Relations: क्या पाकिस्तान उठा रहा है भारत-बांग्लादेश हालात का फायदा, संसद में उठा मुद्दा

विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह का जवाब

सवालों का जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा को बताया कि भारत और बांग्लादेश पड़ोसी देश होने के साथ-साथ गहरे ऐतिहासिक, भौगोलिक, सांस्कृतिक, भाषाई और सामाजिक संबंध साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते लोगों के विकास और आपसी सहयोग पर आधारित हैं। मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच कई संस्थागत द्विपक्षीय तंत्र सक्रिय हैं जिनके तहत नियमित संवाद, बैठकें और आदान-प्रदान होते रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करता है और यह संदेश अंतरिम सरकार को सभी प्रासंगिक मंचों पर दिया गया है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश के साथ भारत के संबंध किसी तीसरे देश के साथ उसके रिश्तों से स्वतंत्र हैं।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भारत की सख्त नजर

विदेश राज्य मंत्री ने सदन को बताया कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सजग है। यह मुद्दा बांग्लादेशी अधिकारियों के समक्ष कई बार उच्चतम स्तर पर उठाया जा चुका है। उन्होंने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री ने 4 अप्रैल 2025 को मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के साथ बैठक में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया था। इसके अलावा विदेश मंत्री ने 16 फरवरी 2025 को विदेश सलाहकार तौहीद हुसैन के साथ मुलाकात में भी इस विषय पर चर्चा की थी। मंत्री ने कहा कि भारत सरकार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों से जुड़ी हर रिपोर्ट पर लगातार नजर रख रही है। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि बांग्लादेश के सभी नागरिकों, जिनमें धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, के जीवन, स्वतंत्रता और कल्याण की रक्षा करना वहां की सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

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Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

Manipur Violence: मणिपुर के चूराचांदपुर में उपमुख्यमंत्रियों नेमचा किपगेन और लोसी दीखो के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर हिंसा भड़क उठी है। इस दौरान सुरक्षाबलों और भीड़ के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का उपयोग किया। मणिपुर में पिछले कई वर्षों से जारी हिंसा के बीच केंद्र सरकार ने पिछले साल राष्ट्रपति शासन लगाया था। इसके बाद हाल ही में युमनाम खेमचंद सिंह की अगुवाई में नई सरकार बनी थी।

सरकार गठन के 24 घंटे बाद ही हिंसा का विस्फोट

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटने और युमनाम खेमचंद सिंह की नई सरकार के गठन के मात्र 24 घंटे बाद ही हिंसा की स्थिति पैदा हो गई। कूकी समुदाय के समूहों ने चूराचांदपुर में सड़कों पर उतरकर अपने समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने से मना किया। उन्होंने पूर्ण बंद और प्रदर्शन का आह्वान भी किया। कई जगहों से फायरिंग की खबरें भी मिलीं। कूकी-जॉ क्षेत्र में संयुक्त मोर्चा 7 ने 12 घंटे के बंद का एलान किया है।

Manipur Violence: मणिपुर में नई सरकार के 24 घंटे बाद भड़की हिंसा, चूराचांदपुर में तनाव फैल गया

नेमचा किपगेन की नियुक्ति से कूकी-जॉ समुदाय में नाराजगी

हिंसा की मुख्य वजह उपमुख्यमंत्री पद पर नेमचा किपगेन की नियुक्ति को लेकर कूकी-जॉ समुदाय में रोष है। कूकी-जॉ विधायक की सरकार में भागीदारी से समुदाय में असंतोष पनपा है, जिससे चूराचांदपुर जिले में नए सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। तुइबोंग इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही, जिसके चलते प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीव्र झड़पें हुईं। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए हैं।

सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, स्थिति पर कड़ी नजर

घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है ताकि स्थिति और बिगड़ने से रोका जा सके। प्रशासन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं, तनाव की वजह से स्थानीय लोग दहशत में हैं और अपने घरों में सीमित रहना पसंद कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में लेने के लिए सभी संभव कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में हालात सुधारने के लिए राजनीतिक स्तर पर भी प्रयास जारी हैं।

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UP News: एक लाख गुमशुदगी और कार्रवाई सिर्फ 9700 मामलों में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

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UP News: एक लाख गुमशुदगी और कार्रवाई सिर्फ 9700 मामलों में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

UP News: उत्तर प्रदेश में लगातार लोगों के लापता होने की घटनाएं सामने आ रही हैं। परिजनों द्वारा थानों में शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मामलों में पुलिस की कार्रवाई न के बराबर बताई जा रही है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बुधवार को स्वतः संज्ञान लिया। कोर्ट ने राज्य में तेजी से बढ़ रहे लापता व्यक्तियों के मामलों को जनहित से जुड़ा मानते हुए एक जनहित याचिका दर्ज की। अदालत के सामने जो आंकड़े रखे गए, उन्होंने न केवल न्यायपालिका को बल्कि पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया। बीते दो वर्षों में एक लाख से अधिक लोग लापता हुए, लेकिन बहुत कम मामलों में ही प्रभावी कार्रवाई की गई।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और चिंता

सुनवाई के दौरान लखनऊ बेंच ने पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की खंडपीठ ने कहा कि लापता व्यक्तियों से जुड़े मामलों में तुरंत और संवेदनशील कार्रवाई की आवश्यकता होती है, लेकिन अधिकारियों का रवैया हैरान करने वाला है। अदालत ने इन आंकड़ों को चौंकाने वाला बताया और साफ शब्दों में कहा कि यह स्थिति बेहद गंभीर है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामले को दोबारा अगले ही दिन सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए ताकि प्रशासन से जवाबदेही तय की जा सके। अदालत का मानना है कि इस तरह की लापरवाही समाज में असुरक्षा की भावना को बढ़ाती है।

UP News: एक लाख गुमशुदगी और कार्रवाई सिर्फ 9700 मामलों में हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

एक लाख से अधिक शिकायतें और बेहद कम कार्रवाई

यह पूरा मामला एक याचिका के दौरान सामने आया, जिसे विक्रम प्रसाद नामक व्यक्ति ने दायर किया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया और पुलिस ने उसे ढूंढने में कोई रुचि नहीं दिखाई। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। हलफनामे के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच राज्य में लगभग 1 लाख 8 हजार 300 लापता व्यक्तियों की शिकायतें दर्ज की गईं। लेकिन इनमें से केवल करीब 9 हजार 700 मामलों में ही पुलिस ने किसी तरह की कार्रवाई शुरू की। बाकी मामलों में न तो जांच तेज की गई और न ही कोई ठोस कदम उठाया गया।

जनहित याचिका दर्ज करने का आदेश और आगे की सुनवाई

इन तथ्यों को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस के सुस्त रवैये पर नाराजगी जाहिर की। अदालत ने माना कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि पूरे राज्य से जुड़ा गंभीर जनहित का मुद्दा है। इसी कारण कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले को “इन रे मिसिंग पर्सन्स इन द स्टेट” शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया जाए। साथ ही अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह से विस्तृत जवाबी हलफनामा भी मांगा गया है। कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में जिम्मेदारी तय की जाएगी और लापता लोगों की तलाश के लिए ठोस व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। अब इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी, जिस पर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हुई हैं।

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