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30 दिन जेल में रहे तो जाएगी कुर्सी? नए विधेयकों पर JPC रिपोर्ट का इंतजार

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केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन अहम विधेयकों पर अब सबकी नजरें संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट पर टिक गई हैं। इन विधेयकों में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों के लिए सख्त प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं, जिसके तहत गंभीर आपराधिक मामलों में 30 दिनों तक हिरासत में रहने पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।

इन विधेयकों में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025, संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025 और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025 शामिल हैं। लोकसभा में समिति की अध्यक्ष अपराजिता सारंगी ने इन पर रिपोर्ट पेश करने के लिए समय बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने मंजूरी दे दी। अब समिति को आगामी मानसून सत्र के अंतिम सप्ताह तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।

इन विधेयकों को पहले अमित शाह ने संसद में पेश किया था। बाद में इन्हें विस्तृत विचार-विमर्श के लिए JPC के पास भेजा गया, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के कुल 31 सदस्य शामिल हैं। इनका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और नैतिकता को मजबूत करना बताया गया है।

सरकार का मानना है कि यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करेगा और सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाएगा। हालांकि, विपक्ष ने इन विधेयकों का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह प्रस्ताव संघीय ढांचे के खिलाफ है और इसके जरिए केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर सकती है।

विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है।

फिलहाल, इन विधेयकों का भविष्य JPC की रिपोर्ट और संसद में होने वाली आगे की चर्चा पर निर्भर करेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ये प्रस्ताव कानून का रूप ले पाते हैं या राजनीतिक विवादों में उलझ जाते हैं।

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