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Sharib Hashmi की सफलता के पीछे कौन? फैमिली मैन स्टार ने खुद बताया पत्नी का अहम रोल
बॉलीवुड और ओटीटी की दुनिया में अपनी दमदार अदाकारी से खास पहचान बना चुके अभिनेता Sharib Hashmi आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ‘द फैमिली मैन’ में जेके तलपड़े के किरदार से उन्होंने हर वर्ग के दर्शकों का दिल जीता। इसके बाद विजय वर्मा और फातिमा सना शेख के साथ ‘गुस्ताख इश्क’ में भी उनकी भूमिका को काफी सराहना मिली। पर्दे पर भले ही जेके तलपड़े शादी और डेटिंग को लेकर उलझे नजर आते हों, लेकिन असल जिंदगी में शरीब एक जिम्मेदार पति और दो बच्चों के पिता हैं। खास बात यह है कि शरीब अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी पत्नी नसीरीन को देते हैं, जो हर मुश्किल वक्त में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी रहीं।
30 साल का साथ और चार बार कैंसर से जंग
Sharib Hashmi की पत्नी का नाम नसीरीन है और दोनों की साथ की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। शरीब ने हाल ही में एक पोस्ट के जरिए बताया कि जब उनकी मुलाकात हुई थी, तब वे 18 साल के थे और नसीरीन 19 साल की। दोनों का रिश्ता धीरे-धीरे गहरा होता गया और साल 2003 में उन्होंने शादी कर ली। हालांकि, यह सफर आसान नहीं था। एक तरफ शरीब का करियर संघर्षों से भरा था, तो दूसरी ओर नसीरीन जिंदगी की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही थीं। नसीरीन को ओरल कैंसर हुआ, और हैरानी की बात यह है कि उन्होंने इस बीमारी को एक-दो नहीं बल्कि चार बार मात दी। हर सर्जरी के बाद उन्होंने खुद को संभाला और परिवार को टूटने नहीं दिया।
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नौकरी छोड़ी, सपने टूटे… फिर भी पत्नी बनी ताकत
Sharib Hashmi ने शादी के बाद लंबे समय तक नौकरी की, लेकिन अभिनय का जुनून उन्हें चैन से बैठने नहीं देता था। साल 2009 में उन्होंने अपनी स्थिर नौकरी छोड़ दी ताकि एक्टिंग में पूरा ध्यान दे सकें। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें फिल्म ‘धोबी घाट’ के लिए फाइनल कर लिया गया था, जिसके भरोसे उन्होंने नौकरी छोड़ी, लेकिन बाद में वह रोल किसी और को दे दिया गया। यह खबर शरीब के लिए गहरा झटका थी। उस दौर में लोग उनसे दूरी बनाने लगे, आर्थिक हालात बिगड़ गए, लेकिन नसीरीन ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। पति के सपनों को जिंदा रखने के लिए उन्होंने अपने गहने तक बेच दिए, घर गिरवी रखा, लेकिन कभी शिकायत नहीं की। यही विश्वास और त्याग आज शरीब की सफलता की नींव बना।
नसीरीन: सिर्फ जीवनसाथी नहीं, बल्कि संघर्ष की मिसाल
नसीरीन सिर्फ एक आदर्श पत्नी नहीं हैं, बल्कि हौसले और जज्बे की मिसाल हैं। चार-चार कैंसर सर्जरी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। शरीब बताते हैं कि हर बार बड़ी सर्जरी के बाद भी नसीरीन 3-4 दिन में खुद को संभाल लेती थीं और बच्चों, घर और पति की जिम्मेदारी निभाने में जुट जाती थीं। जब शरीब का करियर दोबारा पटरी पर आ रहा था, उसी वक्त नसीरीन की बीमारी ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था, लेकिन नसीरीन ने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। आज जब शरीब हाशमी सफलता के शिखर पर हैं, तो इसके पीछे नसीरीन की निस्वार्थ कुर्बानी, संघर्ष और अटूट विश्वास छिपा है। यही वजह है कि शरीब खुले तौर पर कहते हैं— “अगर नसीरीन नहीं होतीं, तो मैं आज यहां नहीं होता।”
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