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WhatsApp का नया फीचर, लिंक्ड डिवाइस पर भी देख सकेंगे View Once मीडिया फाइल्स

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WhatsApp का नया फीचर, लिंक्ड डिवाइस पर भी देख सकेंगे View Once मीडिया फाइल्स

WhatsApp, जो एक लोकप्रिय इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है, दुनिया भर में 3.5 बिलियन से अधिक यूजर्स द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। अपनी आसान इंटरफेस और मजबूत प्राइवेसी और सुरक्षा सुविधाओं के कारण यह ऐप चैटिंग, वीडियो कॉलिंग और वॉयस कॉलिंग के लिए सबसे पसंदीदा ऐप बन चुका है। कंपनी समय-समय पर अपने यूजर्स के लिए नए अपडेट्स जारी करती रहती है, ताकि यूजर्स को बेहतर अनुभव मिल सके।

हाल ही में WhatsApp ने अपने यूजर्स के लिए एक नया फीचर जारी किया है, जो iOS यानी iPhone और Android यूजर्स दोनों के लिए फायदेमंद होगा। इस नए फीचर का नाम है ‘View Once Media on Linked Devices’, जो अब WhatsApp यूजर्स को लिंक्ड डिवाइस पर भी View Once मीडिया फाइल्स देखने की सुविधा प्रदान करेगा।

Wabetainfo द्वारा साझा की गई जानकारी

Wabetainfo, जो WhatsApp के आगामी फीचर्स और अपडेट्स पर नजर रखता है, ने इस फीचर के बारे में जानकारी साझा की है। इसके मुताबिक, WhatsApp अब एक नया फीचर लाया है, जिसके तहत यूजर्स अपने लिंक्ड डिवाइस पर भी View Once मीडिया फाइल्स देख सकेंगे। यह फीचर अभी बीटा यूजर्स के लिए जारी किया गया है और टेस्टिंग के बाद यह सामान्य यूजर्स के लिए भी उपलब्ध होगा।

WhatsApp का नया फीचर, लिंक्ड डिवाइस पर भी देख सकेंगे View Once मीडिया फाइल्स

View Once फीचर क्या है?

WhatsApp का ‘View Once’ फीचर यूजर्स को अपनी प्राइवेसी को बेहतर तरीके से बनाए रखने का मौका देता है। इस फीचर के अंतर्गत, अगर कोई यूजर किसी मीडिया फाइल को View Once के रूप में भेजता है, तो प्राप्तकर्ता उस फाइल को केवल एक बार ही देख सकेगा। जैसे ही फाइल को खोला जाएगा, वह अपने आप डिलीट हो जाएगी। इस फीचर का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि WhatsApp ने View Once मीडिया फाइल्स में स्क्रीनशॉट लेने की सुविधा भी ब्लॉक कर दी है।

इसका उद्देश्य यह है कि यूजर्स की प्राइवेसी सुरक्षित रहे और वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी और मीडिया को बिना किसी डर के साझा कर सकें। View Once फीचर खासकर संवेदनशील जानकारी या व्यक्तिगत तस्वीरें और वीडियो भेजने के लिए उपयोगी है, जिन्हें यूजर केवल एक बार देखने की अनुमति देना चाहते हैं।

लिंक्ड डिवाइस पर View Once मीडिया का अनुभव

पहले, WhatsApp के View Once फीचर के तहत भेजी गई मीडिया फाइल्स केवल यूजर के प्राइमरी डिवाइस पर ही देखी जा सकती थीं। यानी अगर आप किसी अन्य डिवाइस पर अपने WhatsApp को लिंक करते थे, तो View Once मीडिया फाइल्स वहां नहीं देखी जा सकती थीं। लेकिन अब WhatsApp ने इस लिमिटेशन को खत्म कर दिया है और यूजर्स को लिंक्ड डिवाइस पर भी यह फाइल्स देखने की सुविधा देने का निर्णय लिया है।

अब यूजर्स जब किसी लिंक्ड डिवाइस पर WhatsApp को ओपन करेंगे, तो वहां भेजी गई View Once मीडिया फाइल्स भी दिखाई देंगी, जिन्हें केवल एक बार देखा जा सकेगा। इस फीचर के जरिए WhatsApp अपने यूजर्स के अनुभव को और भी सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की कोशिश कर रहा है।

यह फीचर क्यों है खास?

इस फीचर के कुछ प्रमुख लाभ हैं, जो WhatsApp यूजर्स के लिए इसे बेहद उपयोगी बनाते हैं:

  1. बेहतर प्राइवेसी: View Once फीचर यूजर्स को अपने निजी डेटा और मीडिया को साझा करते वक्त सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत प्रदान करता है। अब यूजर्स को यह चिंता नहीं रहेगी कि उनके भेजे गए मीडिया का स्क्रीनशॉट लिया जाएगा या वह अन्य डिवाइस पर देखा जाएगा।
  2. लिंक्ड डिवाइस पर एक्सेस: पहले, View Once मीडिया फाइल्स केवल प्राइमरी डिवाइस पर ही देखी जा सकती थीं, लेकिन अब लिंक्ड डिवाइस पर भी इनका एक्सेस संभव होगा, जो यूजर्स के लिए अधिक सुविधाजनक है।
  3. इंप्रूव्ड यूजर एक्सपीरियंस: इस फीचर के साथ, WhatsApp यूजर्स को एक ही अकाउंट पर कई डिवाइसों से जुड़े रहने का मौका देता है, जिससे उनके मीडिया देखने और मैनेज करने का तरीका आसान हो जाता है।
  4. डेटा प्रोटेक्शन: इस फीचर का मुख्य उद्देश्य यूजर्स के डेटा और मीडिया को सुरक्षित रखना है। इसके द्वारा, किसी भी संवेदनशील जानकारी को एक बार देखने के बाद स्वत: डिलीट कर दिया जाएगा, जिससे उसके लीक होने का खतरा भी कम हो जाता है।

इस फीचर के बारे में और क्या जानकारी है?

WhatsApp ने इस फीचर को पहले बीटा यूजर्स के लिए जारी किया है, और यह फीचर जल्द ही सामान्य यूजर्स के लिए भी उपलब्ध होगा। इससे यूजर्स को व्हाट्सएप पर भेजी गई मीडिया फाइल्स को अपने लिंक्ड डिवाइस पर भी सुरक्षित रूप से देखने का अवसर मिलेगा।

हालांकि, यह फीचर अभी पूरी तरह से सभी यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं है, लेकिन व्हाट्सएप ने इसे टेस्टिंग के दौरान बहुत ही सावधानी से लागू किया है। इस फीचर के आने से, WhatsApp की प्राइवेसी और सुरक्षा में और भी सुधार होगा और यूजर्स का अनुभव बेहतर होगा।

WhatsApp के View Once फीचर का नया अपडेट, जिसे ‘View Once Media on Linked Devices‘ कहा गया है, एक महत्वपूर्ण कदम है जो यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को और बेहतर बनाएगा। यह फीचर न केवल उपयोगकर्ताओं को अधिक सुविधा प्रदान करेगा, बल्कि उनकी निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत सुरक्षा तंत्र भी तैयार करेगा। इस फीचर के लॉन्च होने के बाद, WhatsApp का उपयोग और भी सुरक्षित, सुविधाजनक और प्रभावी हो जाएगा।

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नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

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नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

देश में इन दिनों फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए लोगों को ठगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार ने नई एडवायजरी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ठग आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और बाद में उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि ये ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस स्कैम का शिकार हो रहे हैं।

कैसे काम करता है यह खतरनाक स्कैम

सरकारी एडवायजरी के अनुसार फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का इंटरफेस और डिजाइन बड़े और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स जैसा बनाया जाता है। ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी लिंक के जरिए लोगों को इन ऐप्स को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार जब यूजर ऐप इंस्टॉल कर लेता है तो उसे निवेश के नाम पर पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है। असल में यह पैसा किसी निवेश में नहीं लगता बल्कि सीधे ठगों के बैंक खातों में चला जाता है। कई बार यूजर को फर्जी डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखाया जाता है ताकि वह और ज्यादा पैसा निवेश करे। इस तरह धीरे धीरे यूजर बड़ी रकम गंवा बैठता है।

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

सरकार ने इस तरह के स्कैम से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले किसी भी ऐप में पैसा निवेश करने से पहले बैंक डिटेल्स को ऑफिशियल सोर्स से जरूर जांचें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैसा सही जगह जा रहा है। दूसरी बात यह है कि हमेशा UPI हैंडल और पेमेंट गेटवे की सत्यता की जांच करें क्योंकि फर्जी ऐप्स अक्सर संदिग्ध पेमेंट विकल्प इस्तेमाल करती हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी ट्रेडिंग ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके वेरिफाइड लेबल या प्रमाणन को जरूर देखें। यह एक अहम संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म सुरक्षित और कानूनी है।

स्कैम का शिकार होने पर तुरंत करें यह काम

अगर कोई व्यक्ति इस तरह के फाइनेंशियल स्कैम का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। देरी करने से पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है। ऐसे मामलों में तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए और पूरी जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा सरकार के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते सही कदम उठाने से नुकसान को कम किया जा सकता है और ठगों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है।

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साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

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साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

पिछले कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी के मामलों ने आम लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने देशभर में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि डेटा चोरी और साइबर धोखाधड़ी देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए Indian Cyber Crime Coordination Centre के माध्यम से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है जो अलग अलग एजेंसियों को एक साथ जोड़कर काम करेगी।

2018 में हुई थी I4C की शुरुआत

I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी। यह संस्था गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों बैंकिंग सिस्टम और अन्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। I4C एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जहां सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर साइबर अपराध की जांच और रोकथाम में सहयोग करती हैं। इससे न केवल मामलों की जांच तेज होती है बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है।

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया

जब कोई नागरिक साइबर फ्रॉड की शिकायत हेल्पलाइन नंबर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करता है तो यह शिकायत सीधे I4C के अंतर्गत आने वाले सिस्टम में दर्ज हो जाती है। इसके बाद यह मामला ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से संबंधित स्थानीय पुलिस और बैंक तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया के जरिए ठगी के पैसे को तुरंत फ्रीज करने की कार्रवाई की जाती है ताकि अपराधियों को धन निकालने का मौका न मिले। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रणाली के जरिए अब तक हजारों करोड़ रुपये की राशि को फ्रॉड होने से बचाया जा चुका है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू है जिसमें पुलिस बैंक और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

सिम कार्ड ब्लॉकिंग और सिम बाइंडिंग से कसा शिकंजा

सरकार केवल शिकायतों पर ही कार्रवाई नहीं कर रही है बल्कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस पर भी सख्ती बरत रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक लाखों सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं और कई मोबाइल उपकरणों को भी निष्क्रिय किया गया है। इसके अलावा मैसेजिंग ऐप्स पर साइबर अपराध रोकने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत यूजर का सिम और ऐप एक दूसरे से जुड़ा रहेगा जिससे फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने के लिए समय सीमा दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इन कदमों से साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

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Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

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Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

टेक दिग्गज Microsoft ने अपने लोकप्रिय AI टूल Microsoft Copilot को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि Copilot का इस्तेमाल मुख्य रूप से मनोरंजन और सहायक टूल के तौर पर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी कहा है कि अगर AI किसी तरह की गलती करता है तो उसकी जिम्मेदारी यूजर की होगी, न कि Microsoft की। इस फैसले ने AI के उपयोग और उसकी विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Copilot क्या है और क्यों है खास

Copilot एक एडवांस AI टूल है जिसे काम को तेज और आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह Microsoft 365 जैसे प्लेटफॉर्म पर Excel, PowerPoint और Word जैसे ऐप्स के साथ काम करता है और यूजर्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करता है। शुरुआत में इसे एंटरप्राइज यूजर्स के लिए पेश किया गया था, लेकिन अब इसे आम यूजर्स तक भी पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Microsoft के पास Copilot नाम से जुड़े 70 से ज्यादा प्रोडक्ट मौजूद हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं।

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

AI की सीमाएं बनी बदलाव की वजह

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह AI की सीमाएं हैं। Copilot जैसे टूल Large Language Models पर आधारित होते हैं, जिनमें कभी-कभी गलत या काल्पनिक जानकारी देने की समस्या होती है, जिसे हैलुसिनेशन कहा जाता है। इसी तरह के AI मॉडल जैसे GPT और Claude भी कभी-कभी त्रुटियां कर सकते हैं। हालांकि इन तकनीकों में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह सटीकता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। यही कारण है कि Microsoft ने अपनी जिम्मेदारी सीमित करने का फैसला लिया है।

यूजर्स के लिए क्या है नई सलाह

Microsoft ने यह साफ किया है कि Copilot अब भी काम के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे अंतिम निर्णय लेने वाले सिस्टम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कंपनी की सलाह है कि यूजर्स Copilot से मिली जानकारी को एक संदर्भ के रूप में लें और महत्वपूर्ण मामलों में उसे जरूर जांचें। इसके साथ ही यह कदम संभावित कानूनी जोखिमों से बचने की रणनीति का भी हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि इन बदलावों के बावजूद Microsoft Copilot को लगातार बेहतर बना रहा है और नए AI टूल्स पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में यह तकनीक और ज्यादा प्रभावी बन सके।

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