Connect with us

टेक्नॉलॉजी

WhatsApp के 5 नए धमाकेदार फीचर्स हुए रोलआउट, चैटिंग का अंदाज बदलेगा

Published

on

WhatsApp के 5 नए धमाकेदार फीचर्स हुए रोलआउट, चैटिंग का अंदाज बदलेगा

WhatsApp दुनिया की सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है, जिसे 3.5 अरब से ज्यादा लोग उपयोग करते हैं। यूजर्स की प्राइवेसी और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए WhatsApp समय-समय पर नए फीचर्स लेकर आता है। अब एक बार फिर WhatsApp ने 5 नए फीचर्स रोलआउट किए हैं, जिससे लाखों यूजर्स को एक बेहतर अनुभव मिलने वाला है।

बता दें कि WhatsApp जब भी नए फीचर्स पेश करता है, तो सबसे पहले इसे बीटा टेस्टर्स के साथ टेस्ट किया जाता है। बीते कुछ महीनों में WhatsApp ने कई नए फीचर्स का परीक्षण किया और अब इसका स्टेबल वर्जन सभी यूजर्स के लिए जारी कर दिया गया है। ये फीचर्स न सिर्फ चैटिंग के एक्सपीरियंस को बेहतर बनाएंगे, बल्कि कई काम भी आसान कर देंगे। आइए जानते हैं WhatsApp के इन लेटेस्ट फीचर्स के बारे में विस्तार से।

1. रंगीन चैट थीम (Colorful Chat Theme)

WhatsApp ने चैट थीम को कस्टमाइज करने का ऑप्शन दिया है। अब यूजर्स अपनी पसंद की थीम और वॉलपेपर सेट कर सकते हैं। WhatsApp ने इसमें 20 नए कलरफुल थीम और 30 नए वॉलपेपर जोड़े हैं, जिससे चैटिंग का मजा दोगुना हो जाएगा।

2. क्लियर चैट नोटिफिकेशन (Clear Chat Notification)

WhatsApp पर अब एक नया Clear Chat Notification फीचर आ चुका है। पहले WhatsApp पर अनरीड मैसेज डॉट के रूप में दिखते थे, जिससे कई बार लोग परेशान हो जाते थे। इस समस्या को दूर करने के लिए कंपनी ने नोटिफिकेशन सेटिंग्स में क्लियर चैट नोटिफिकेशन का ऑप्शन दिया है। अब यूजर्स आसानी से अपठित संदेशों की संख्या को नियंत्रित कर सकेंगे।

WhatsApp के 5 नए धमाकेदार फीचर्स हुए रोलआउट, चैटिंग का अंदाज बदलेगा

3. अनरीड चैट काउंटर (Unread Chat Counter)

WhatsApp ने Unread Chat Counter फीचर को भी जोड़ा है। इससे अब यूजर्स को पता चल जाएगा कि उनके पास कितने अनरीड मैसेज हैं। यह फीचर चैट फिल्टर में ही शामिल किया गया है, जिससे यूजर्स बिना किसी परेशानी के अपने अनरीड मैसेज देख सकेंगे।

4. वीडियो प्लेबैक स्पीड (Video Playback Speed)

अब WhatsApp ने वीडियो सेक्शन के लिए भी स्पीड कंट्रोल का ऑप्शन दिया है। पहले यह सुविधा केवल ऑडियो नोट्स के लिए उपलब्ध थी, लेकिन अब यूजर्स वीडियो की स्पीड को भी 1.5x और 2x तक बढ़ा सकते हैं। इस फीचर से लंबे वीडियो कम समय में देखना आसान हो जाएगा।

5. WhatsApp AI Chatbot

WhatsApp में अब Meta AI चैटबॉट का सपोर्ट भी मिल गया है। अब यूजर्स इस फीचर को अपने फोन के होम स्क्रीन पर भी एक्सेस कर सकते हैं। अगर आप WhatsApp के AI चैटबॉट को इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इसे विजेट सेक्शन में जाकर पर्सनलाइजेशन ऑप्शन से सेट कर सकते हैं। जैसे ही आप इस विजेट को टैप करेंगे, Meta AI चैटबॉट की विंडो खुल जाएगी।

WhatsApp के नए फीचर्स से यूजर्स को मिलेगा बेहतरीन अनुभव

WhatsApp के ये 5 नए फीचर्स यूजर्स को एक नए चैटिंग एक्सपीरियंस का अहसास कराएंगे। खासतौर पर रंगीन चैट थीम और वीडियो प्लेबैक स्पीड कंट्रोल से यूजर्स को बहुत फायदा होगा। वहीं, AI चैटबॉट के जुड़ने से WhatsApp अब और ज्यादा स्मार्ट और एडवांस बन गया है।

इन नए अपडेट्स के बाद WhatsApp सिर्फ इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप ही नहीं, बल्कि एक मल्टी-फीचर्ड कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म बन चुका है। अगर आपने अभी तक इन फीचर्स को एक्सप्लोर नहीं किया है, तो तुरंत WhatsApp को अपडेट करें और नए फीचर्स का आनंद लें!

टेक्नॉलॉजी

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

Published

on

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

देश में इन दिनों फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स के जरिए लोगों को ठगने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस गंभीर खतरे को देखते हुए सरकार ने नई एडवायजरी जारी की है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। ठग आकर्षक रिटर्न का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और बाद में उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि ये ऐप्स दिखने में बिल्कुल असली प्लेटफॉर्म जैसे लगते हैं जिससे आम लोगों के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस स्कैम का शिकार हो रहे हैं।

कैसे काम करता है यह खतरनाक स्कैम

सरकारी एडवायजरी के अनुसार फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का इंटरफेस और डिजाइन बड़े और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म्स जैसा बनाया जाता है। ठग सोशल मीडिया विज्ञापनों मैसेजिंग ऐप्स और फर्जी लिंक के जरिए लोगों को इन ऐप्स को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार जब यूजर ऐप इंस्टॉल कर लेता है तो उसे निवेश के नाम पर पैसा जमा करने के लिए कहा जाता है। असल में यह पैसा किसी निवेश में नहीं लगता बल्कि सीधे ठगों के बैंक खातों में चला जाता है। कई बार यूजर को फर्जी डैशबोर्ड पर मुनाफा दिखाया जाता है ताकि वह और ज्यादा पैसा निवेश करे। इस तरह धीरे धीरे यूजर बड़ी रकम गंवा बैठता है।

नकली ऐप्स दिखते हैं असली जैसे जानिए कैसे पहचानें और बचाएं अपनी मेहनत की कमाई

बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

सरकार ने इस तरह के स्कैम से बचने के लिए कुछ जरूरी सावधानियां बताई हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। सबसे पहले किसी भी ऐप में पैसा निवेश करने से पहले बैंक डिटेल्स को ऑफिशियल सोर्स से जरूर जांचें। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि पैसा सही जगह जा रहा है। दूसरी बात यह है कि हमेशा UPI हैंडल और पेमेंट गेटवे की सत्यता की जांच करें क्योंकि फर्जी ऐप्स अक्सर संदिग्ध पेमेंट विकल्प इस्तेमाल करती हैं। तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी ट्रेडिंग ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसके वेरिफाइड लेबल या प्रमाणन को जरूर देखें। यह एक अहम संकेत होता है कि प्लेटफॉर्म सुरक्षित और कानूनी है।

स्कैम का शिकार होने पर तुरंत करें यह काम

अगर कोई व्यक्ति इस तरह के फाइनेंशियल स्कैम का शिकार हो जाता है तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। देरी करने से पैसे वापस मिलने की संभावना कम हो जाती है। ऐसे मामलों में तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करना चाहिए और पूरी जानकारी देनी चाहिए। इसके अलावा सरकार के साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय रहते सही कदम उठाने से नुकसान को कम किया जा सकता है और ठगों के खिलाफ कार्रवाई में मदद मिलती है।

Continue Reading

टेक्नॉलॉजी

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

Published

on

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

पिछले कुछ वर्षों में साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है। ऑनलाइन ठगी और डेटा चोरी के मामलों ने आम लोगों को आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी दिया है। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने देशभर में साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी रणनीति तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने साइबर फ्रॉड को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा है कि डेटा चोरी और साइबर धोखाधड़ी देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। इस चुनौती से निपटने के लिए Indian Cyber Crime Coordination Centre के माध्यम से एक व्यापक योजना तैयार की जा रही है जो अलग अलग एजेंसियों को एक साथ जोड़कर काम करेगी।

2018 में हुई थी I4C की शुरुआत

I4C यानी इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना वर्ष 2018 में की गई थी। यह संस्था गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है और देश में साइबर अपराध से निपटने के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राज्यों की पुलिस एजेंसियों बैंकिंग सिस्टम और अन्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। I4C एक ऐसा प्लेटफॉर्म प्रदान करता है जहां सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर साइबर अपराध की जांच और रोकथाम में सहयोग करती हैं। इससे न केवल मामलों की जांच तेज होती है बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है।

साइबर अपराध पर डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी, सरकार ने बनाया बड़ा सुरक्षा प्लान

शिकायत से लेकर कार्रवाई तक की पूरी प्रक्रिया

जब कोई नागरिक साइबर फ्रॉड की शिकायत हेल्पलाइन नंबर या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करता है तो यह शिकायत सीधे I4C के अंतर्गत आने वाले सिस्टम में दर्ज हो जाती है। इसके बाद यह मामला ‘सिटीजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम’ के माध्यम से संबंधित स्थानीय पुलिस और बैंक तक पहुंचता है। इस प्रक्रिया के जरिए ठगी के पैसे को तुरंत फ्रीज करने की कार्रवाई की जाती है ताकि अपराधियों को धन निकालने का मौका न मिले। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रणाली के जरिए अब तक हजारों करोड़ रुपये की राशि को फ्रॉड होने से बचाया जा चुका है। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP भी लागू है जिसमें पुलिस बैंक और अन्य एजेंसियां मिलकर काम करती हैं।

सिम कार्ड ब्लॉकिंग और सिम बाइंडिंग से कसा शिकंजा

सरकार केवल शिकायतों पर ही कार्रवाई नहीं कर रही है बल्कि साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस पर भी सख्ती बरत रही है। गृह मंत्रालय के अनुसार अब तक लाखों सिम कार्ड ब्लॉक किए जा चुके हैं और कई मोबाइल उपकरणों को भी निष्क्रिय किया गया है। इसके अलावा मैसेजिंग ऐप्स पर साइबर अपराध रोकने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया जा रहा है। इस व्यवस्था के तहत यूजर का सिम और ऐप एक दूसरे से जुड़ा रहेगा जिससे फर्जी अकाउंट और धोखाधड़ी की संभावना कम हो जाएगी। सरकार ने सभी प्लेटफॉर्म्स को इसे लागू करने के लिए समय सीमा दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि इन कदमों से साइबर अपराध के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

Continue Reading

टेक्नॉलॉजी

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

Published

on

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

टेक दिग्गज Microsoft ने अपने लोकप्रिय AI टूल Microsoft Copilot को लेकर एक बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने स्पष्ट कर दिया है कि Copilot का इस्तेमाल मुख्य रूप से मनोरंजन और सहायक टूल के तौर पर किया जाना चाहिए। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी कहा है कि अगर AI किसी तरह की गलती करता है तो उसकी जिम्मेदारी यूजर की होगी, न कि Microsoft की। इस फैसले ने AI के उपयोग और उसकी विश्वसनीयता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

Copilot क्या है और क्यों है खास

Copilot एक एडवांस AI टूल है जिसे काम को तेज और आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यह Microsoft 365 जैसे प्लेटफॉर्म पर Excel, PowerPoint और Word जैसे ऐप्स के साथ काम करता है और यूजर्स की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में मदद करता है। शुरुआत में इसे एंटरप्राइज यूजर्स के लिए पेश किया गया था, लेकिन अब इसे आम यूजर्स तक भी पहुंचाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार Microsoft के पास Copilot नाम से जुड़े 70 से ज्यादा प्रोडक्ट मौजूद हैं, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं।

Microsoft Copilot पर बड़ा फैसला, अब गलती की जिम्मेदारी यूजर्स पर डाली

AI की सीमाएं बनी बदलाव की वजह

इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह AI की सीमाएं हैं। Copilot जैसे टूल Large Language Models पर आधारित होते हैं, जिनमें कभी-कभी गलत या काल्पनिक जानकारी देने की समस्या होती है, जिसे हैलुसिनेशन कहा जाता है। इसी तरह के AI मॉडल जैसे GPT और Claude भी कभी-कभी त्रुटियां कर सकते हैं। हालांकि इन तकनीकों में लगातार सुधार हो रहा है, लेकिन पूरी तरह सटीकता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। यही कारण है कि Microsoft ने अपनी जिम्मेदारी सीमित करने का फैसला लिया है।

यूजर्स के लिए क्या है नई सलाह

Microsoft ने यह साफ किया है कि Copilot अब भी काम के लिए उपयोगी है, लेकिन इसे अंतिम निर्णय लेने वाले सिस्टम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कंपनी की सलाह है कि यूजर्स Copilot से मिली जानकारी को एक संदर्भ के रूप में लें और महत्वपूर्ण मामलों में उसे जरूर जांचें। इसके साथ ही यह कदम संभावित कानूनी जोखिमों से बचने की रणनीति का भी हिस्सा है। दिलचस्प बात यह है कि इन बदलावों के बावजूद Microsoft Copilot को लगातार बेहतर बना रहा है और नए AI टूल्स पर काम कर रहा है, जिससे भविष्य में यह तकनीक और ज्यादा प्रभावी बन सके।

Continue Reading

Trending