व्यापार
अमेरिका ने H-1B visa शुल्क में $100,000 बढ़ोतरी की घोषणा, भारतीय आईटी कंपनियों पर सीमित प्रभाव की संभावना
अमेरिका ने H-1B visa शुल्क में $100,000 की भारी बढ़ोतरी की घोषणा की है, जिसने आईटी उद्योग में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय घरेलू आईटी कंपनियों पर इसका वित्तीय प्रभाव सीमित रहेगा। ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि नई फीस से केवल अल्पकालिक बाजार अस्थिरता हो सकती है, लेकिन कंपनियों के मुनाफे और मार्जिन पर गंभीर असर नहीं पड़ेगा।
अमेरिकी कंपनियों की नई रणनीतियाँ कम करेंगी असर
Financial Express की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कंपनियों ने H-1B कर्मचारियों पर निर्भरता धीरे-धीरे कम कर दी है और वैकल्पिक डिलीवरी मॉडल विकसित किए हैं। इसका अर्थ है कि नई फीस का वास्तविक प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा। ट्रम्प प्रशासन ने कहा है कि $100,000 अतिरिक्त शुल्क केवल नए H-1B वीज़ा आवेदनों पर लागू होगा, जो वित्तीय वर्ष 2027 (FY27) से प्रभावी होगा। FY26 के लिए आवेदन पहले ही अंतिम रूप दे दिए गए हैं, इसलिए उन पर यह बढ़ोतरी लागू नहीं होगी।
STORY | Weaponising immigration policy to advance xenophobic agenda: organisation on Trump’s ‘reckless’ $100,000 H1B fee
US President Donald Trump’s “reckless" proclamation imposing a USD 100,000 fee on H1B visas is not about protecting American jobs but about “weaponising”… pic.twitter.com/nGMc3OaoEm
— Press Trust of India (@PTI_News) September 23, 2025
ब्रोकरेज फर्मों का दृष्टिकोण
CLSA के अनुसार, यदि कंपनियां पूरी बढ़ी हुई लागत को अपने ऊपर उठाती हैं, तो FY27 के राजस्व में लगभग 6% की गिरावट हो सकती है। हालांकि, उनके अनुसार वास्तविक मार्जिन पर असर केवल 1-3% होगा। ICICI Securities का कहना है कि नई H-1B भर्ती पर निर्भरता होने पर मार्जिन में लगभग 100 बेसिस पॉइंट की कमी हो सकती है, लेकिन कंपनियां इस लागत को कम करने के लिए नवाचारी तरीके अपनाएंगी।
भारतीय आईटी कंपनियों की तैयारी और सुरक्षा
Motilal Oswal Financial Services के अनुसार, भारतीय आईटी कंपनियां लंबे समय से स्थानीयकरण और सबकॉन्ट्रैक्टिंग अपनाती रही हैं, जिससे अचानक नीति बदलावों से बचाव होता है। फर्म ने यह भी बताया कि H-1B वीज़ा आवेदनों की सबसे बड़ी संख्या भारतीय आईटी कंपनियों से नहीं बल्कि अमेरिकी बड़ी तकनीकी कंपनियों जैसे Google, Amazon, Microsoft और Meta से आती है।
लंबी अवधि में प्रभाव और भविष्य की रणनीतियाँ
Nuvama Institutional Equities का मानना है कि कंपनियां अधिक प्रभावी स्टाफिंग मॉडल का उपयोग कर इस बढ़ी हुई लागत का सामना करेंगी और मार्जिन और राजस्व पर असर कम करेंगी। कुल मिलाकर ब्रोकरेज फर्मों का कहना है कि यह चुनौती भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एक मौका भी है। उनकी मजबूत रणनीतियाँ और संचालन मॉडल इस बढ़ी हुई फीस के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देंगे।
Business
निवेशकों की नजर वैश्विक तेल बाजार पर, कीमतें $76 से $81 प्रति बैरल तक जा सकती हैं
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई संवेदनशील ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर Ayatollah Ali Khamenei की मौत हुई। इस घटना ने पहले से तनावपूर्ण पश्चिम एशिया की स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने के कारण वैश्विक तेल बाजार में गतिविधियां तेज हो गई हैं और निवेशक तेल की कीमतों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। विशेष रूप से तेल आयातक देशों जैसे भारत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद किया, सप्लाई में होगी कमी
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी विवाद के बीच ईरानी सरकार ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा की है। यह मार्ग बंद होने से कच्चे तेल की सप्लाई में कमी आएगी। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है। इस कारण से सप्लाई में रुकावट होने पर तेल की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी और भावों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है।

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, निवेशकों की नजर
तेल बाजार में हाल ही में अस्थिरता के बीच कीमतों ने तेजी दिखाई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, IG Group के रिटेल ट्रेडिंग प्रोडक्ट में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत $75.33 प्रति बैरल तक पहुंच गई। यह शुक्रवार की बंद कीमत से लगभग 12 प्रतिशत अधिक है। अन्य मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत $76 से $81 प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। निवेशक और तेल कंपनियां लगातार बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और वैश्विक असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। इसे विश्व के प्रमुख ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। कतर, जो दुनिया का सबसे बड़ा LPG निर्यातक है, अपने लगभग सभी LPG का निर्यात इसी मार्ग के माध्यम से करता है। इसलिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक तेल और गैस बाजार में अस्थिरता बढ़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सप्लाई और बाधित हुई तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।
व्यापार
NHAI ने देश का पहला हाईवे बनाया जहाँ रात में चमकती हैं लाल चेतावनी पट्टियां
मध्य प्रदेश के जबलपुर-भोपाल हाईवे (NH-45) पर यात्रियों को इन दिनों एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने देश में पहली बार सड़क पर चमकदार लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स बिछाई हैं। यह तकनीक न केवल देखने में अलग है, बल्कि इसके पीछे सुरक्षा और वैज्ञानिक कारण भी हैं। हाईवे का यह हिस्सा वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के घने जंगलों से होकर गुजरता है, जहां जंगली जानवर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आते थे। NHAI की यह पहल इन हादसों को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए की गई है।
ब्राइट रेड तकनीक कैसे करती है ड्राइवर को सतर्क
यह सिर्फ रंग का प्रयोग नहीं है। लाल पट्टियों को सड़क की सतह पर उभार कर बनाया गया है। जैसे ही कोई वाहन इन लाल पट्टियों के ऊपर से गुजरता है, टायर और सड़क के घर्षण से गाड़ी में कंपन और आवाज पैदा होती है। इससे ड्राइवर तुरंत सतर्क हो जाता है और ब्रेक लगाने की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से होती है। लाल रंग का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी काम करता है, क्योंकि लाल रंग को खतरे का संकेत माना जाता है। इससे ड्राइवर को पहले ही चेतावनी मिल जाती है कि वह एनिमल क्रॉसिंग जोन में प्रवेश कर रहा है।

रात में सुरक्षा कवच का काम करेगी यह तकनीक
हाईवे पर ज्यादातर सड़क हादसे रात के समय होते हैं, जब विजिबिलिटी कम होती है। घने जंगलों के बीच जंगली जानवर अचानक सड़क पार कर लेते हैं। इन लाल टेबल-टॉप मार्किंग्स की खासियत यह है कि रात के वक्त हेडलाइट की रोशनी में ये चमकती हैं, जिससे ड्राइवर को काफी पहले पता चल जाता है कि आगे एनिमल क्रॉसिंग है। इसका परिणाम यह होता है कि वाहन धीमी गति से गुजरते हैं और जंगली जानवर सुरक्षित होकर सड़क पार कर पाते हैं। इस पहल से ड्राइवर और जानवर दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
वन्यजीवों और इंसानों दोनों के लिए फायदेमंद
NHAI की यह पहल इको-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे बाघ, तेंदुए, हिरण और अन्य दुर्लभ जानवर सुरक्षित रहेंगे। साथ ही, सड़क पर जानवरों से टकराने के कारण होने वाले हादसों में इंसानी जान भी बचाई जा सकेगी। यह तकनीक न केवल हाईवे की सुरक्षा बढ़ाती है, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के प्रति समाज को भी जागरूक करती है। इसे भारत में सड़क सुरक्षा और वन्यजीव सुरक्षा के क्षेत्र में एक मिसाल माना जा रहा है।
व्यापार
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को 6.3 लाख करोड़ की संपत्ति डूबने की खबर
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी उथल-पुथल देखने को मिली। BSE सेंसेक्स दोपहर के कारोबार में 1,300 अंकों से अधिक लुढ़क गया। आईटी और ऑटो सेक्टर में तेज बिकवाली ने निवेशकों को बड़ा झटका दिया। इस गिरावट के चलते करीब 6.3 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति बाजार से साफ हो गई। बाजार पूंजीकरण भी गिरकर लगभग 462 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का कहना है कि आईटी और ऑटो शेयरों की बिकवाली, वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत और निवेशकों की सतर्कता ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है।
आईटी और ऑटो सेक्टर में दबाव
आईटी सेक्टर के शेयरों में आज खासा दबाव देखने को मिला। अमेरिकी एआई कंपनी एंथ्रोपिक द्वारा अपने क्लॉड कोड टूल के दावे के बाद निवेशकों में आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल को लेकर अनिश्चितता बढ़ी। इस वजह से कारोबारी दिन की शुरुआत में ही आईटी इंडेक्स लगभग 3 प्रतिशत तक फिसल गया। ऑटो सेक्टर में भी बिकवाली तेज रही। निवेशक वैश्विक मंदी और नए टेक्नोलॉजी निवेश के असर से सतर्क दिखाई दिए। इस प्रकार दोनों प्रमुख सेक्टरों की कमजोरी ने बाजार में डर और बेचैनी पैदा की।

वैश्विक संकेत और रुपया की कमजोरी
वैश्विक बाजार से मिले संकेत भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव डाल रहे हैं। अमेरिकी वॉल स्ट्रीट में बीते दिन जोरदार गिरावट देखने को मिली। एशिया के ज्यादातर बाजार भी सुस्त थे। इसके अलावा अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने और ट्रंप के 15 प्रतिशत टैरिफ वाले बयान ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई। भारतीय रुपए की स्थिति भी पस्त रही। शुरुआती कारोबार में रुपया 7 पैसे की गिरावट के साथ 90.96 प्रति डॉलर पर ट्रेड करता दिखा। हालांकि, विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने इसे और अधिक गिरने से रोका।
कच्चे तेल की तेजी और निवेशकों की सतर्कता
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड करीब 1 प्रतिशत चढ़कर 72.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। तेल महंगा होने से आयात-निर्भर देशों जैसे भारत पर व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने का दबाव पैदा होता है। इसके चलते निवेशक और अधिक सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करेंगी।
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