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U23 World Wrestling Championships 2025: सुजीत कलकल की सुनहरी छलांग, चार मिनट में कर दिया उज्बेक पहलवान का सफाया

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U23 World Wrestling Championships 2025: भारत के युवा पहलवान सुजीत कलकल ने अंडर-23 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप 2025 में इतिहास रच दिया है। उन्होंने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। 27 अक्टूबर को खेले गए फाइनल में सुजीत ने उज्बेकिस्तान के उमिदजोन जलोलोव को 10-0 से हराया। मुकाबला महज चार मिनट 54 सेकंड चला, जिसके बाद रेफरी ने तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर सुजीत को विजेता घोषित कर दिया। पूरे मुकाबले में सुजीत का दबदबा इतना जबरदस्त था कि उनके विरोधी को एक अंक तक हासिल नहीं करने दिया।

पहली बार जीता विश्व खिताब

यह सुजीत कलकल का पहला वर्ल्ड चैंपियनशिप गोल्ड है। हालांकि वह इससे पहले दो बार अंडर-23 एशियन चैंपियन (2022 और 2025) और एक बार अंडर-20 एशियन गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं। पिछले साल इसी प्रतियोगिता में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, लेकिन इस बार उन्होंने अपने प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाकर गोल्ड अपने नाम किया। इस जीत के साथ उन्होंने यह साबित कर दिया कि वे भारत की अगली बड़ी रेसलिंग ताकत बनने की राह पर हैं।

टूर्नामेंट में रहा शानदार प्रदर्शन

सुजीत ने पूरे टूर्नामेंट में बेहतरीन प्रदर्शन किया। शुरुआती दौर में उन्होंने मोल्दोवा के फियोडोर चेवदारी को 12-2 और पोलैंड के डॉमिनिक जाकुब को 11-0 से मात दी। क्वार्टरफाइनल में रूस के बशीर मागोमेदोव के खिलाफ शुरुआत में पिछड़ने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए 4-2 से जीत दर्ज की। वहीं सेमीफाइनल में जापान के यूटो निशियूची को 3-2 से हराया। इस मुकाबले में सुजीत ने आखिरी पलों में दो अंकों का थ्रो लगाकर रोमांचक जीत हासिल की।

तकनीकी कुश्ती में निपुणता ने दिलाई जीत

सुजीत की सफलता का सबसे बड़ा कारण उनकी तकनीकी कुशलता और संतुलन है। वह अपने हर मुकाबले में विपक्षी की चाल को भांपकर रणनीति बदलते नजर आए। उज्बेक पहलवान के खिलाफ फाइनल में उन्होंने बेहद सटीक मूव्स का इस्तेमाल किया जिससे विरोधी पूरी तरह असहाय दिखे। उनकी तेज़ी, स्टैमिना और आत्मविश्वास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सुजीत आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भारत के लिए कई स्वर्ण पदक जीत सकते हैं।

भारत की कुश्ती में नया अध्याय

सुजीत कलकल की इस जीत ने भारतीय कुश्ती में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वह अब बजरंग पूनिया और रवि दहिया जैसे दिग्गजों की पंक्ति में अगली कड़ी बनते दिख रहे हैं। उनकी सफलता ने देश के युवा खिलाड़ियों में नई ऊर्जा और उम्मीद जगाई है। यह गोल्ड मेडल न सिर्फ उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है बल्कि भारतीय खेल इतिहास का गौरवपूर्ण पल भी है।

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