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शेयर बाजार में भारी कोहराम, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे

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शेयर बाजार में भारी कोहराम, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा, निवेशकों के 9 लाख करोड़ डूबे

हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन शेयर बाजार में जिस तरह की भारी बिकवाली देखने को मिली उसने निवेशकों की नींद उड़ा दी। सुबह बाजार खुलते ही आईटी रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त दबाव दिखने लगा। जैसे जैसे कारोबार आगे बढ़ा बिकवाली और तेज होती चली गई। कमजोर वैश्विक संकेत विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये पर बने दबाव ने निवेशकों के भरोसे को बुरी तरह हिला दिया। नतीजा यह रहा कि बाजार चौतरफा कमजोरी के साथ बंद हुआ। इस बड़ी गिरावट के चलते निवेशकों को एक ही दिन में करीब 9 लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। बाजार का यह मिजाज साफ संकेत दे रहा है कि फिलहाल निवेशक डर और अनिश्चितता के माहौल में हैं और जोखिम लेने से बच रहे हैं।

सेंसेक्स और निफ्टी की हालत हुई खराब

मंगलवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,065.71 अंक की भारी गिरावट के साथ 82,180.47 अंक पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स इससे भी ज्यादा नीचे चला गया था। वहीं एनएसई का प्रमुख सूचकांक निफ्टी भी 350 अंकों से ज्यादा टूटकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली क्योंकि वैश्विक स्तर पर टेक सेक्टर को लेकर चिंता बनी हुई है। रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की। बैंकिंग और मेटल शेयर भी इस गिरावट से अछूते नहीं रहे। बाजार में फैली इस कमजोरी ने छोटे निवेशकों के साथ साथ बड़े संस्थागत निवेशकों को भी सतर्क कर दिया है।

वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की मार

बाजार की इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण कमजोर वैश्विक माहौल माना जा रहा है। अमेरिका और यूरोप में आर्थिक अनिश्चितता के संकेत मिल रहे हैं जिसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ा है। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया है। रुपये में कमजोरी के चलते विदेशी निवेशकों को भारतीय बाजार से पैसा निकालना ज्यादा सुरक्षित लग रहा है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बनी चिंता ने भी निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर झुकते नजर आ रहे हैं।

एक्सपर्ट की राय और आगे की राह

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर के मुताबिक अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से जुड़े मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है। इस फैसले का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है और उभरते बाजारों के लिए यह अहम साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि एफआईआई की लगातार निकासी और रुपये में कमजोरी से बाजार की धारणा नकारात्मक बनी हुई है। खासतौर पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में दबाव ज्यादा देखने को मिल रहा है। मौजूदा हालात में निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए और किसी भी निवेश से पहले मजबूत संकेतों का इंतजार करना चाहिए।

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Hindalco Industries shares: हिंडाल्को के नतीजों ने चौंकाया बाजार छह प्रतिशत गिरा शेयर निवेशकों में हड़कंप

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Hindalco Industries shares: हिंडाल्को के नतीजों ने चौंकाया बाजार छह प्रतिशत गिरा शेयर निवेशकों में हड़कंप

Hindalco Industries shares: मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी Hindalco Industries के शेयरों में शुक्रवार को उस वक्त तेज गिरावट देखने को मिली जब दिसंबर तिमाही के नतीजे सामने आए। सुबह करीब 10 बजकर 17 मिनट पर आदित्य बिड़ला ग्रुप की इस फ्लैगशिप कंपनी का शेयर बीएसई पर लगभग छह प्रतिशत टूटकर 906.75 रुपये पर आ गया। पिछले कारोबारी सत्र में यह शेयर 964.30 रुपये पर बंद हुआ था। अचानक आई इस गिरावट से निवेशकों में चिंता बढ़ गई और बाजार में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। शेयरों में कमजोरी का असर सीधे कंपनी के मार्केट कैप पर पड़ा जो गिरकर करीब 2.03 लाख करोड़ रुपये तक आ गया।

दिसंबर तिमाही के नतीजों ने बढ़ाई चिंता

वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर से दिसंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 2049 करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा पिछले साल की समान तिमाही के 3735 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है। यानी मुनाफे में साल दर साल करीब 45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार को उम्मीद थी कि मजबूत डिमांड और मेटल प्राइस के सपोर्ट से कंपनी का मुनाफा बेहतर रहेगा लेकिन नतीजों ने निवेशकों को निराश किया। यही वजह रही कि नतीजों के तुरंत बाद शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली और स्टॉक दबाव में आ गया।

Hindalco Industries shares: हिंडाल्को के नतीजों ने चौंकाया बाजार छह प्रतिशत गिरा शेयर निवेशकों में हड़कंप

ओस्वेगो प्लांट की रुकावट बनी बड़ी वजह

कंपनी की ओर से बताया गया कि मुनाफे में आई इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह न्यूयॉर्क स्थित ओस्वेगो प्लांट में आई रुकावट रही। इस रुकावट के कारण कंपनी को करीब 2610 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। हालांकि इसके बावजूद कंपनी का ऑपरेशनल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 14 प्रतिशत बढ़कर 66521 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन के मुताबिक एल्युमिनियम अपस्ट्रीम सेगमेंट ने 4832 करोड़ रुपये का EBITDA दर्ज किया जो साल दर साल आधार पर 14 प्रतिशत की बढ़त को दिखाता है। इसे मजबूत घरेलू मांग का सहारा मिला। इससे साफ है कि ऑपरेशनल लेवल पर कंपनी की स्थिति पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है।

ब्रोकरेज का भरोसा और आगे की उम्मीद

ब्रोकरेज फर्म JM Financial ने हिंडाल्को के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत में कंपनी का ऑपरेशन स्थिर और मजबूत बना हुआ है। ओस्वेगो प्लांट में आग और रुकावट की वजह से कमाई पर अस्थायी असर पड़ा है जिससे कॉपर बिजनेस को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपनी ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। फर्म ने अगले 12 महीनों के लिए शेयर का टारगेट प्राइस 1120 रुपये तय किया है। मौजूदा स्तर से यह करीब 23.5 प्रतिशत की संभावित बढ़त को दिखाता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद लंबी अवधि में हिंडाल्को पर नजर बनाए रखना निवेशकों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

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Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में ब्लैक फ्राइडे, सेंसेक्स और निफ्टी में 844 पॉइंट्स तक गिरावट

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Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में ब्लैक फ्राइडे, सेंसेक्स और निफ्टी में 844 पॉइंट्स तक गिरावट

Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का दिन ‘ब्लैक फ्राइडे’ साबित हुआ। गुरुवार को आईटी शेयरों में आए भारी नुकसान का असर शुक्रवार को भी दिखाई दिया। सुबह करीब 9:45 बजे सेंसेक्स 844.58 पॉइंट्स या 1.01 प्रतिशत गिरकर 82,830.34 पर कारोबार कर रहा था। वहीं निफ्टी 260.80 पॉइंट्स या 1.01 प्रतिशत लुढ़ककर 25,546.40 पर पहुंच गया। निवेशकों में बेचैनी का माहौल रहा क्योंकि ग्लोबल मार्केट की कमजोरी और टेक्नोलॉजी शेयरों में लगातार बिकवाली ने सेंटिमेंट पर दबाव डाला।

IT शेयरों में बड़ी गिरावट, Infosys सबसे ज्यादा प्रभावित

सेक्टरवार स्थिति देखें तो निफ्टी IT इंडेक्स में 5 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई। Infosys के शेयर 5.6 प्रतिशत टूट गए। TCS, HCL टेक, LTIMindtree, कोफोर्ज और विप्रो भी इस गिरावट से प्रभावित रहे। इस दौरान ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव बना रहा, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.3 प्रतिशत फिसले। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय IT शेयरों में यह कमजोरी वैश्विक टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली का सीधा असर है।

Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में ब्लैक फ्राइडे, सेंसेक्स और निफ्टी में 844 पॉइंट्स तक गिरावट

एशियाई और अमेरिकी बाजारों की स्थिति

ग्लोबल स्तर पर भी शेयर बाजार कमजोर दिखे। जापान का निक्केई 225 0.58 प्रतिशत गिरा जबकि टॉपिक्स में भी समान गिरावट रही। दक्षिण कोरिया के कोस्पी में 0.35 प्रतिशत बढ़त देखी गई, लेकिन स्मॉल-कैप कोस्डैक 1.36 प्रतिशत तक नीचे गया। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स फ्यूचर्स 26,703 पर था, जो पिछले बंद भाव 27,032.54 से कम है। अमेरिकी बाजार में भी टेक शेयरों में लगातार बिकवाली जारी रही। S&P 500 फ्यूचर्स 0.02 प्रतिशत और नैस्डैक 100 फ्यूचर्स 0.04 प्रतिशत बढ़त के साथ फ्लैट रहे। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ।

आईटी स्टॉक्स में गिरावट की वजह AI में भारी निवेश

विशेषज्ञों का कहना है कि US टेक्नोलॉजी कंपनियों द्वारा AI में भारी निवेश IT शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह है। Amazon, Google, Meta और Microsoft जैसी बड़ी कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए लगभग 650 बिलियन डॉलर का निवेश करने वाली हैं। इस बदलते माहौल में निवेशक चिंतित हैं कि क्या इतने बड़े निवेश से रिटर्न सही मिल पाएगा। खर्च बढ़ने और मोनेटाइजेशन में अनिश्चितता के कारण ग्लोबल सॉफ्टवेयर और सर्विस सेक्टर में संभावित रुकावट का डर बना हुआ है।

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Textile Stocks: बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स अमेरिकी बाजार में सस्ते, भारतीय टेक्सटाइल शेयरों में बड़ी गिरावट

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Textile Stocks: बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स अमेरिकी बाजार में सस्ते, भारतीय टेक्सटाइल शेयरों में बड़ी गिरावट

Textile Stocks: बांग्लादेश ने 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले अमेरिका के साथ एक अहम ट्रेड डील कर ली है। इस डील के तहत अमेरिकी टैरिफ पहले के 20 प्रतिशत से घटाकर 19 प्रतिशत कर दिया गया है। समझौते के मुताबिक, बांग्लादेश के टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स पर अमेरिका छूट देगा। डील में यह भी उल्लेख है कि अमेरिकी कपास और मैन मेड फाइबर से बने बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स को टैरिफ के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। इसका सीधा असर यह होगा कि अमेरिका के बाजार में बांग्लादेश के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा।

भारतीय टेक्सटाइल शेयरों में आई बड़ी गिरावट

बांग्लादेश और अमेरिका के बीच इस ट्रेड डील के बाद मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में टेक्सटाइल स्टॉक्स में भारी गिरावट देखने को मिली। KPR मिल के शेयरों में 2.85 प्रतिशत, वर्धमान टेक्सटाइल्स के शेयरों में 4.92 प्रतिशत, वेलस्पन लिविंग के शेयरों में लगभग 2 प्रतिशत और ट्राइडेंट के शेयरों में लगभग 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में इस बात को लेकर चिंता है कि अमेरिका के बाजार में बांग्लादेश को मिलने वाली छूट भारत के टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स के लिए चुनौती साबित हो सकती है।

Textile Stocks: बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स अमेरिकी बाजार में सस्ते, भारतीय टेक्सटाइल शेयरों में बड़ी गिरावट

अमेरिकी बाजार में भारत के लिए बढ़ेगा प्रतिस्पर्धा का दबाव

डील के अनुसार भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट पर 18 प्रतिशत की दर से टैरिफ लागू रहेगा, जबकि बांग्लादेश को जीरो टैरिफ की विशेष राहत दी गई है। निवेशकों का मानना है कि इससे अमेरिकी बाजार में बांग्लादेशी प्रोडक्ट्स भारतीय उत्पादों की तुलना में सस्ते हो जाएंगे। यदि बांग्लादेश अमेरिका के लिए कॉटन या फाइबर का इस्तेमाल करके गारमेंट्स का एक्सपोर्ट करता है, तो उसे जीरो टैरिफ की सुविधा मिलेगी। परिणामस्वरूप भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को अमेरिका में कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा और उनकी मांग प्रभावित हो सकती है।

भारत के कपास उद्योग पर भी पड़ सकता असर

निवेशकों और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी कॉटन के इस्तेमाल पर बांग्लादेश को जीरो टैरिफ की सुविधा मिलेगी, तो बांग्लादेश भारत से कम खरीदारी कर सकता है। भारत के कपास किसान और स्पिनिंग मिलों को इससे नुकसान पहुंच सकता है। यह डील भारत के लिए गंभीर चुनौती साबित हो सकती है क्योंकि बांग्लादेश भारत का एक बड़ा कपास खरीदार है। भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को अब नए रणनीतिक कदम उठाने होंगे, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धा बनाए रखी जा सके।

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