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RBI की बड़ी बैठक खत्म! क्या शुक्रवार को बदलेगी रेपो रेट—देश की नजरें संजय मल्होत्रा पर टिकीं

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भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 दिसंबर 2025 से शुरू हो चुकी है। इसकी घोषणा शुक्रवार को की जाएगी। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को बैठक के समापन के बाद रेपो रेट का ऐलान करेंगे, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। वर्तमान में रेपो रेट 5.5% है। यदि रेपो रेट घटाया जाता है, तो बैंकों के लिए उधार लेना सस्ता होगा, जिससे लोन की EMI भी कम हो जाएगी। पहले उम्मीद थी कि मुद्रास्फीति कम रहने के कारण इस बार रेपो रेट में कटौती हो सकती है, लेकिन हाल ही के GDP आंकड़ों और रुपये की गिरावट ने इस फैसले को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस वजह से, RBI के लिए इस बार रेपो रेट पर निर्णय लेना आसान नहीं होगा।

JM Financial का अनुमान: ग्रोथ बढ़ेगी, महंगाई घटेगी

गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 दिसंबर की सुबह 10 बजे रेपो रेट का ऐलान करेंगे। घरेलू ब्रोकरेज फर्म JM Financial ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “हम उम्मीद करते हैं कि RBI वित्त वर्ष 2026 (FY26) के लिए ग्रोथ अनुमान को कम से कम 20 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 7% कर सकता है, जबकि महंगाई अनुमान को 40 बेसिस पॉइंट घटाकर 2.2% कर देगा।” रिपोर्ट के मुताबिक, यदि इस समय रेपो रेट में कटौती होती है, तो यह FY26 की दूसरी छमाही में संभावित धीमी पड़ती आर्थिक गति को सहारा दे सकती है। हालांकि, इससे रुपये के और कमजोर होने का खतरा भी बढ़ जाएगा। विश्लेषकों का मानना है कि अगर इस कटौती के साथ नरम रुख (dovish stance) नहीं अपनाया गया, तो बॉन्ड यील्ड में और गिरावट आएगी। इस परिस्थिति में RBI मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने और आने वाले महीनों में नीतिगत समर्थन का संकेत देने जैसा संतुलित रास्ता अपना सकता है।

क्या 25 बेसिस पॉइंट की कटौती होगी?

कुछ अर्थशास्त्री मानते हैं कि मौजूदा आर्थिक माहौल में 25 बेसिस पॉइंट की ब्याज दर कटौती से भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। खासकर तब, जब महंगाई दबाव बेहद कम है और आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी लाने की ज़रूरत महसूस की जा रही है। हालांकि, रेपो रेट में कटौती से विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी घट सकती है, जिसका प्रभाव रुपये पर नकारात्मक पड़ सकता है। इसलिए, RBI को इस फैसले में घरेलू महंगाई, वैश्विक आर्थिक स्थिति, रुपये की मजबूती और बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का निर्णय पिछले कई MPC बैठकों की तुलना में अधिक जटिल और संतुलित होगा।

Yes Bank की राय: रेपो रेट में बदलाव की संभावना कम

यस बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसे उम्मीद है कि RBI इस बार भी रेपो रेट को स्थिर रखेगा और इसे 5.5% पर बनाए रखेगा। बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंक फिलहाल इंतजार की नीति पर रहेगा क्योंकि आगे और कटौती की गुंजाइश कम होती जा रही है। यस बैंक का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक माहौल स्थिर नहीं होता और घरेलू महंगाई पूरी तरह लक्ष्य के आसपास नहीं पहुंच जाती, तब तक RBI आक्रामक कदम उठाने से बचेगा। इसलिए, संभावना यही है कि इस बार भी RBI यथास्थिति (status quo) बनाए रखेगा। अब निगाहें शुक्रवार के फैसले पर हैं, जो आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा।

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